M1 R4 Input Devices Study Material Notes in Hindi

M1 R4 Input Devices Study Material Notes in Hindi

M1 R4 Input Devices Study Material Notes in Hindi:- इस पोस्ट में आपकों मिलेगी इनपुट डिवाइसेज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे कीबोर्ड, माउस (Mouse), जॉयस्टिक, फ्लैडबेड स्कैनर, शीटफेड स्कैनर, हैंड हेल्ड स्कैनर, और वेब कैमरा, ट्रैकबॉल, लाइटपेन आदि के विषय़ में महत्वपूर्ण जानकारी।

 M1 R4 इनपुट डिवाइसेज (Input Devices) Study Material in Hindi

इनपुट डिवाइस के द्वारा डाटा और निर्देशों को कम्प्यूटर में एंटर कराया जा सकता है। इनपुट डिवाइस मेन मेमोरी में स्टोर के गए डाटा और निर्देशों को उपयुक्त बाइनरी रूप में परिवर्तित करती है।इनपुट डिवाइस के रूप में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली डिवाइस की बोर्ड है। कई और भी इनपुट डिवाइसिस का विकास हो चुका है जिनमें डाटा को टाइप करने की जरूरत ही नहीं पड़ती है। इस प्रकार की कुछ डिवाइस है, माउस लाइट पेन, ग्राफिक लैबलेट, जॉयस्टिक, ट्रैकचबॉल, टच स्क्रीन आदि। ये सभी डिवाइसिस यूजर को मॉनीटर स्क्रीन पर आवश्यक चीजों को सिर्फ पॉइंट करके सिलेक्ट करने में मदद करते हैं। इसीलिए इन डिवाइससि को पॉइंटिंग डिवाइस भी कहा जाता है। आजकल तो वॉयस इनपुट बॉक्सइन सिस्टम का भी विकास हो चुका है पब्लिक ऐड्रेस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोफोन की तरह के माइक्रोफोन का प्रयोग वॉयस का इनपुट करने के ले होता है।

M1 R4 कीबोर्ड Study Material Notes in Hindi

Keyboard
Keyboard
M1 R4 कीबोर्ड Study Material Notes in Hindiकम्प्यूटर से जुड़ी हुई यह इन पुट डिवाइस है जिसके द्वारा डाटा और प्रोग्राम को कम्प्यूटर में एंटर कराया जाता है। यह कीबोर्ड बिल्कुल टाइप राइट की तरह होता है। इसमें अक्षर, अंक, विशेष चिन्ह, फंक्शन keys और कुच कंट्रोल  keys होते हैं। एक  key  दबाते ही एक इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल उत्पन्न होता है जो कि एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट जिसे की बोर्ड एनकोडर कहा जाता है के द्वारा खोजा जाता हैकम्प्यूटर के की बोर्ड में टाइप राइटर के सभी keys की अलावा कुछ अतिरिक्त keys  भी होते हैं। ये अतिरिक्त keys: कर्सन कंट्रोल ढिलीट, स्क्रॉल कंट्रोल दि क समान्य की बोर्ड में 101  keys होती है (किसी में अधिक भी होत हैं) की बोर्ड के दाई और न्यूमरिक पैड होता है इसमें नंबर और गणितीय चिन्ह होते हैं।न्यूमरिक कीपैड का प्रयोग कर्सर कंट्रोल के ले भी किया जा सकता है। न्यूमरिक कीपैड का यह डबल फंक्शन Num Lock के द्वारा नियंत्रित होता हैकी बोर्ड में सबसे उपर F1 से F12 तक की फंक्शन keys होती हैं। इनका फंक्शन रन हो रहें प्रोग्राम पर निर्भर करता है।की बोर्ड मे क छोटा प्रोसेसर बिल्ट इन होता है। जब भी आप एक keys  दबाते हैं, कीबोर्ड प्रोसेसर इसे खोजता है और मदरबोर्ड पर स्थित कीबोर्ड कंट्रोलर को इसके अनुरूप एक नंबर (बाइनरी नंबर) भेजता है जिसे स्कैन कोड कहा जाता है। यह कोड अंतत: प्रोसेसर (CPU) को ट्रांसमिट कर दिया जाता है। इसके बाद सीपीयू, कीबोर्ड ड्राइवर नाम के प्रोग्राम का प्रयोग करके इसे प्रोसेस करता है। कीबोर्ड ड्राइवर, कोडों को उनके अनुरूप कैरेक्टरों में बदल देता है।नीचे के सेक्शनों में विभिन्न प्रकार की keys और उनके कार्यों का वर्णन किया गया है:स्टैडर्ड टाइप राइटर keysPC की बोर्ड में  keys का एक सैट होता है, जो टाइपराइटर की  keys  की तरह ही होता है। इसमें न्यूमेरिक keys (0-9) कैरेक्टर keys (A – Z), विशेष कैरेक्टर (! ,@,$,# आदि) शामिल होते हैं। इन keys को अक्सर QWERTY keys कहते है (अक्षरों के ऊपर की लाइन के अनुसार नामकरण हुआ है)।फंक्शन  keysF1  से F12 तक के नाम वाली keys,  पीसी में चलने वाले सॉफ्टवेयर के लिए विशेष प्रकार के कार्य करती हैं। उदाहण के लिए f1 keys, अधिकाश प्रोग्रामों में हेल्प फाइल डिस्प्ले करती है। जो उस प्रोग्राम को प्रयोग करने के लिए उपलब्ध रहती है।कर्सर मूवमेंट keysइन ऐरों keys का प्रयोग कर्सर (मॉनीटर पर दिखने वाली ब्लिंकिंग लाइन) को क्रमश: दाएँ बाएँ, ऊपर, नीचे चलाने में किया जाता है। इसके अतिरिक्त चार र keys होती है, (PgUP) (PgDn) (Home) और (End)। इन keys के द्वारा आप कर्सर को टेक्स्ट पर तैजी से मूव करा सकते हैं। Home और End keys  का प्रयोग कर्सर को क्रमश: टेक्सट के शुरू तथा अंत में रखने के लिए ही खास तौर पर किया जाता है। 101 keys बाले मॉडल कीबोर्ड में कर्सर को मूव कराने वाली चारों ऐरों keys एवं का एक अलग सैट होता है।विशेष प्रयोजन वाली keys (Special Purpose keys)बैक स्पेस key: बैक स्पेस key उन कैरेक्टरों को इरेज करती है जो कर्सर के ठीक बाई ओर होते हैं।एंटर या रिटर्न  key: जब आप टाइप राइटर पर टाइप करते हैं तो रिटर्न  key को दबाते ही आप अगली लाइन में पहुँच जाते हैं। कीबोर्ड में Enter key को रिटर्न key  कहा जाता है और इसका प्रयोग भी लाइन या पैराग्राफ के End को बताने के लिए किया जाता है। इस का प्रयोग कम्प्यूटर को दिए जाने वाले कमांड को  End करने के लिए भी होता है। जिससे कम्प्यूटर उस कमांड या निर्देश को एक्जीक्यूट कर सके।एस्केप key: ESC key जो  Escape  का छोटा रूप हे, का प्रयोग पीसी को यह निर्देश देने के लिए होता है कि अभी दिए गए कमांड का तुरत कैसिल कर दिया जाए।शिफ्ट  key: जब भी आप (Shift) key  दबाते हैं और एक लोअर केस  a  टाइप करते हैं तो यह अपर केस  A में बदल जाता है। ऐसा टाइपराटर में भी होता है, और यह हमें स्कीन पर दिखाई देता है लिक्न यदि (Caps Lock) key ऑन हो ते यह प्रक्रिया उल्टी हो जाती है। जहाँ एक ही key द्वारा दो चिन्ह या कैरेक्टर टाइप किए जाते हों, वहाँ Shift key  को दबा कर रखने पर  key के केस में, प्रत्येक key पर दो कैरेक्ट चिन्हित होते हैं। अत: (Shift) key को  दबाए रखर नंबर  key दबाने से ऊपरी चिन्ह जैसे ~!@##$$% आदि स्क्रीन पर दिखाई देगेंकैप्स लॉक की: यह एक  toggle key है।  जब आप इसे पहली बार दबाते हैं तो सारे अक्षर कैपिटल में टिप होंगे (उदाहरण: छोटा a बड़े A में छोटे यानी स्मॉल कैस में टाइप होंगे। यदि आप ऐसा टेक्स्ट लिखना चाहते हैं जौ अपर केस में ही दिखे तो आप (Caps Lock) key को दोबारा दबाते हैं तो सारे अक्षर छोटे यानी स्मॉल केस में टाइप होंगे। यदि आप ऐसा टेक्स्ट लिखना चाहते हैं जो अपर कैस में ही दिखे तो आप (Caps Lock) key को दबा सकते हैं।टैब key : टैब की को दबाकर आप कर्सर को पूर्व निर्धारित 5 स्पेस या इससे अधिक भी बढ़ा सकते हैं टैब की टेक्स्ट को टेबल के रूप में टाइप करने में मदद करती है। टैब की का कार्य भी टाइप राइटर के टैब की की तरह ही है जिसका प्रयोग टेबल टाइप करने के लिए किया जाता है।इन्सर्ट की: Ins  इन्सर्ट का संक्षिप्त रूप है। (Ins) की इन्सर्ट र ओवर स्ट्राइक दोनों मोड में काम करती है। जब आप इन्सर्ट की को पहली बार दबाते हैं र एक अक्षर या कैरेक्टर को कीबोर्ड में से टाइप करते है, तो नया टाइप किया हुआ टेक्स्ट, पहले से लिखे हुए टेक्स्ट को दाई ओर आगे बढ़ा देता है। इसे इन्सर्ट टेक्स्ट मोड करते हैं। यदि आप इन्सर्ट key को दोबारा दबाएंगें और कुछ भी टाइप करेंगे तो नया टाइप किया हुआ टेक्स्ट, पहले से टाइप किए गए टेक्स्ट के ऊपर लिखी जाएगा या उस टेक्स्ट को इरेड कर देगा। इसे ओवर स्ट्राइक मोड कहा जाता है।डिलीट की: (Del) key को दबाकर आप कर्सर के ठीक ऊपर के कैरेक्टर को इरेज कर सकते है। आप, जहाँ भी कर्सर है, वहाँ के कैरेक्टर को डिलीट करने के लिए Del की का प्रयोग कर सकते हैं। Del key का कार्य बैकस्पेस key से अलग होता है। बैकस्पेस की कर्सर के बाई र के कैरेक्टर को इरेड करता है जबकि Del key कर्सर के ऊपर के कैरेक्टर को इरेज करती है।प्रिंट स्कीन की: यदि आप Prt Sc key और Shift key  दोनों को एक साथ दबाएँगें तो स्क्रीन पर दिखने वाला टेक्स्ट कम्प्यूटर से जुड़े प्रिंटर पर प्रिंट हो जाएगा।मल्टी की काँबिनेशन: मल्टी की काँबिनेशन एक या एक से अधिक keys काँबिनेशन है जो आप एक ही समय में एक साथ दबाते हैं। जैसे आप को  Sushma लिखना है, तो आप Shift key को दबाकर S टाइप करेंगे तो S  अपर केस में टाइप हो जाएगा अधिकांश key काँबिनेशन कंट्रोल  key Ctrt  और  Altd key का प्रयोग करते हैं। Ctrl Control  का छोटा रूप है जबकि ( Alt) Alternative  का छोटा रूप है। अत: Ctrl + C key  काँबिनेशन को चलाने के लिए आप को एक साथ ( Ctrl)  एवं C keys  दबानी होगी। एक की काँबिनेशन द्वारा किया जाने वाला कार्य रन हो रहे प्रोग्राम पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए यदि आप  (Ctrl) + (Alt) + (Del) इन तीनों  keys को एक साथ दबाते हैं तो आप पाएँगे कि आपका पीसी री स्टार्ट या रीबूट हो जाएगा।

M1 R4 माउस (Mouse) Study Material Notes in Hindi

माउस एक पाइटिंग डिवाइस है। इसे एक हाथ से पकड़कर एक समतल सतह पर चलाया जाता है।माउस के द्वारा आप मॉनीटर स्क्रीन पर चित्र भी बना सकते हैं। ड्रांइग के कार्य के लिए इसे ग्राफिक टैबलेट पर भी मूव कराया जा सकता है। माउस की मदद से आप टेक्स्ट को एडिट कर सकते हैं स्कीन पर टेक्स्ट की एडिटिंग के लिए, कसर्सर को माउस से मूव कराकर तेजी से वहाँ पर रखा जा सकता है, जहाँ एडिटिंग करनी है।एक प्रकार के माउस में रोलिंग बॉल का प्रयोग होता है। जबकि अन्य में ऑप्टिकल सेसिंग तकनीक इस्तेमाल की जाती है। इन्हें PC के साथ एक केबल द्वारा अथवा इन्फ्र्रेड लाइट के द्वारा जोड़ा जाता है। एक आम माउस में 2 या 3 बटन होते हैं।माउस बटन क्या करते हैं यह आपके पीसी पर रन हो रहें ऐप्लीकेशन प्रोग्राम पर निर्भर करता है। कुछ सिस्टम्स में यह संभव है कि इन बटनों को विशेष कार्य स्वतंत्र रूप से दिया जा सके।माउस से आने वाले सिग्नल को एक प्रोग्राम द्वारा प्रोसेस किया जाता है जिसे माउस ड्राइवर कहते हैं।
Mouse
Mouse
माउस की कार्य प्रणालीएक ऑप्टोमैकेनिकल माउस में  LED (लाइट एमिटिंग डायोड), एवं फोटों डिटेक्टरों के एक काँबिनेशन का प्रयोग, माउस के द्वारा तय की गई दूरी को सेस करने के लिया किया जाता है। आइए देखे कि एक ऑप्टोमैकेनिकल माउस किस तरह कार्य करता है।जब भी माउस को मूव कराया जाता है, तो माउस के नीचे स्थित बॉल भी मूव करती है वं यह दो अलग अलग रोलर्स को टर्न कराती है जो एक दूसरे से 90 डिग्री पर फिक्स रहते हैं।इनमें से एक रोलर, माउस के आगे पीछे के मूवमेंट के साथ जुड़ा होता है अर्थात स्कीन पर कर्सर का वर्टिकल मूवमेंट। अन्य रोलर, माउस के दाएँ बाएँ मूवमेंट के साथ जुड़ा होता है अर्थात स्क्रीन पर कर्सर का हॉरीजाँटल मूवमेंट।प्रत्येक रोलर आगे जाकर एक व्हील से जुड़ा होता है।ये व्हील रोलर के मूवमेंट के अनुरूप ही रोटेट होते हैं।प्रत्येक व्हील के किनारों पर छोटी छोटी ओपनिंग होती है। जैसे जैसे व्हील रोटेट होता है, फोटों डिटेक्टर तथा  LED  का एक जोड़ा यह डिटेक्ट करता है कि उनके बीच से होकर कितनी ओपनिंग निकली है।जितने सिग्नल जनरेट हे हैं उनके बीच से होकर कितनी ओपनिंग निकली है। अर्थात सिग्नलों की संख्या जितनी अधिक होगी, माउस उतनी दूर तक जा सकेगा।ये सिग्नल, PC तक वायर द्वारा भेजे जाते हैं जो माउस को मेन सिस्टम से जोड़ते हैं। इसके बाद PC इन्हें ड्राइवर सॉफ्टवेयर तक भेजता है, जो से दूरी, दिशा एवं स्पीड में परिवर्तित करता है जिसके अनुसार स्क्रीन के कर्सर का मूवमेंट होता है।किसी भी माउस बटन के दबाने से, एक सिग्नल उत्पन्न होता है। कौन सा बटन तबाया गया है, कितनी बार दबाया गया है एवं माउस पांइटर की स्क्रीन पर वर्तमान स्थिति, इन सब पर निर्भर करके सॉफ्टवेयर यूजर द्वारा चाहा जाने वाला कार्य करता है।एक ऑप्टिकल माउस के डिजिटल प्रोसेसर  IC  में एक संपूर्ण पैटर्न रिकॉग्नीशन हार्डवेयर/ सॉफ्टवेयर रहत है।यह पैटर्न रिकॉग्नीशन की क्षमता, बिना किसी माउस पैड के इस्तेमाल के हुए नए ऑप्टिकल माउस को, किसी भी सतह पर इस्तेमाल करनी अनुमति देती है। जैसे जेस माउस मूव होता है, यह इसकी करेंट पोजीशन की मेज को इसकी मेमोरी में पहले से स्टोर की गई इमेजों के साथ तुलना करता है। दो इमेजों के बीच का अंतर यह सूचित करता है कि किस दिशा में माउस को मूव कराना है।इस नए ऑप्टिकल माउस में तीन बेसिक भाग होते है:LED जिससे उस सतह को प्रकाशित किया जा सके जिस पर माउस इस्तेमाल हो रहा है।पोटों डिटेक्टर ऐरे से बना एक सेंसर, जो मूव रूप से एक छोटा वीडीयों कैमरा होता है जो सतह के पैटर्न को डिटेक्ट कर सके।एक डिजिटल सिग्नल प्रोसेसर (DSP) जो पैटर्न रिकॉगनीशन के लिए आवश्यक है।क ऑप्टिकल माउस 1500 से 6000 इमेज प्रति सेकेंड की रेट से सैंपल इकटठे कर सकता है। इस माउस में कोई भी मूविंग हिससे नहीं होते हैं, इसमें समय समय पर मेन्टेनैन्स की आवश्यकता भी नहीं होती है एवं यह जल्दी से खराब नहीं होता है। इस माउतस का एक ही नुकसान है कि यह बहुत ही रिप्लेक्टिव सतह जैसे काँच पर कार्य नहीं कर सकता है।

M1 R4 जॉयस्टिक Study Material in Hindi

ज़ॉयस्टिक भी एक पॉइटिंग डिवाइस है। इकसे भी माउस की तरह ही, कर्सर को स्क्रीन पर एक जगह से दूसरी जगह मूव कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह माउस की तरह की कारय् करता है एवं इसका प्रयोग गेम्स खेलने में होता है।
जॉयस्टिक
जॉयस्टिक
जॉयस्टिक एक छड़ी होती है जिसमें ऊपर तथा नीचे दोनों और एक गोलाकार बॉल लगी होती है। इसे दाएँ बाएँ आगे पीछे सेट्रल पोजीशन से हुए डिस्प्लेसमेंट को डिटेक्ट करता है वं उसे मापता है। इसके बाद यह सूचना प्रोसेसर को भेज द जाती है।

M1 R4 स्कैनर Study Material Notes in Hindi

स्कैनर क हार्डवेयर डिवाइस है जिसका प्रयोग, टेक्स्ट या इमेजों को कम्प्यूटर में स्कैन करके डालने के लिए किया जाता है। कभी सूचना, पिक्चर या टेक्स्ट जो कागज पर पलब्ध होती है, की आवश्यकता कम्प्यूटर में भी होती है। स्कैनर का बेसिक कार्य है डॉक्यूमेंट को डिजिटल फॉर्मेट में परिवर्तित करना। स्कैनर मूलरूप से डेस्कटॉप ऐनानॉग टू डिजिटल कन्वर्टर होते है। ये वस्तुओं, डाक्यूमेंटस मैगजीन पेपर फोटों बिजनेस कार्ड आदि का ऐनालॉग वीजुअल लेते हैं वं उन्हें एक डिजिटाइज्ड बिटमैप में बदल देते हैं जो एक खास सॉफ्टवेयर पैकेज ही समक्ष सकता है और से एक पीसी के द्वारा पढ़ी जा सकने वाली फाइल में बदल देता है।

स्कैनर के प्रकार

विभिन्न ऐप्लीकेशनों के लिए विभिन्न प्रकार के स्कैनरों का प्रयोग किया जाता है। स्कैनर की क्षमता एवं कीमत प्रत्येक प्रकार में अलग अलग होती है। इंडस्ट्रियल कार्य के ले आवश्यक स्कैनर, घरों या छोटे ऑफिसों में प्रयोग होने वाले स्कैनर से अलग होते हैं। स्कैनर तीन प्रकार के होते हैं। ये हैं:
  • फ्लैटबेड स्कैनर
  • शीटफेड स्कैनर
  • हैंड हेल्ड स्कैनर
  • फ्लैडबेड स्केनर

फ्लैटबेड स्कैनर

एक फ्लैट बेड स्कैनर को डेस्कटॉप स्कैनर भी कहा जाता है और यह एक फोटो कॉपीयर की तरह कारय् करता है। यह स्कैनर यूजर को एक कागज, किताब, मैगजीन, फोटो या अन्य वस्तु को स्कैनर की ग्लास सतह पर रखने की अनुमति देता है इसमें उस वस्तु को स्कैन करके इसे डिजिटल रूप में बदलने की क्षमता होती है।
फ्लैटबेड स्कैनर
फ्लैटबेड स्कैनर

शीटफ्रेड स्कैनर

शीटफेड स्कैनर को रोलर फेड स्कैनर भी कहा जाता बहै। यह फैक्स मशीन की तरह कार्य करता है। इसमें इमेज को एक रोलर पर पास कराया जाता है जहाँ इसे कैप्चर कर लिया जाता है। शीटफेड स्कैनर पेपर की लूज शीट्स को स्कैन करनें में काफी वर्साटाइल होते हैं।फ्लैटबेड स्कैनरों की तुलना में शीटफेड स्कैनर सस्ते होते हैं, फ्लैट बेड स्कैनर किताबों से इमेजों को स्कैन करके स्टोर कर लेते हैं बिना पेजों को हटाए लेकिन ऐसा शीटफेड स्कैनर में संभव नहीं है।
शीटफ्रेड स्कैनर
शीटफ्रेड स्कैनर
हैड हेल्ड स्कैनरएक हैड हेल्ड या पोर्टेबल स्कैनर एक ऑप्टिकल स्कैनर है जो इस प्रकार बनाया गया है कि से स्कैन किए जाने वाले डॉक्यूमेंट या ऑब्जेक्ट के ऊपर से हाथ से मूव कराया जा सकता है। आजकल क हैंड स्कैनर का प्रयोग अधिकतर पीसी या वर्ड प्रोसेसरों में एक इनपुट डिवाइस के रूप में होता है। यह एक डॉक्यूमेंट में से इमेज या डाटा को ऑप्टिकली पढ़ता है। इसे हाथ से ऑपरेट किया जाता है।
हैड हेल्ड स्कैनर
हैड हेल्ड स्कैनर
हैंड हेल्ड स्कैनरों का प्रयोग कई सारे ऐप्लीकेशोनों में होता है, जैसे बार कोड रीडर। ये बार कोड रीडर प्रोडक्ट या सर्विसेस की पॉइट ऑफसेल वाले स्थानों पर इस्तेमाल होते हैं। इसके अलावा ओरीजनल डॉक्यूमेंटों पर मौजूद डाटा की रिकॉर्डिग के लिए भी इनका पुनरूत्पादन या प्रोसेसिंग हो सके। इनका प्रयोग डॉक्यूमेंट के ट्रांसलेशन के लिए भी होता है।हैड हेल्ड स्कैनरों को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है:जनरल परपसस्पेशल परपसअधिकांश हैड हैल्ड स्कैनरों का प्रयोग, प्रिंटेड मीचडिया से सूचना एकत्र करने के लिए होता है, इन्हें जनरल परपस की श्रेणी में रखा जाता है जिससे ये विभिन्न ऐप्लीकेशनों के लिए डिजाइन की गई सूचना को पढ़कर स्टोर कर सके। दूसरी श्रेणी के हैंड हेल्ड स्कैनरों को विशेष प्रकार की इमेंजों को स्कैन करने के लिए किया जाता है ताकि ये एक विशेष रूप में सूचना प्रदान कर सकें। इस श्रेणी का सबेस अधिक जाना जाने वाला स्कैनर है बार कोड रीडर ज एक प्रोडक्ट की पहचान को बार कोड इमेज के रूप में ग्रहण करने के लिए प्रयोग किए जाते हैं।हैड हेल्ड स्कैनरों के लाभ:ये सस्ते और पोर्टेबल होते हैं।हैड हेल्ड स्कैनरों की हानियाँ:हैंड हैल्ड स्कैनरों को सही तरीके से खीचकर लाना काफी परेशानी वाला काम है। स्कैनिंग के दौरान सीथे स्कैन करना काफी मुश्किकल होता है और यदि यह अधिक धीरे या तेज चलता है तो इससे स्कैन की जाने वाली इमेज में गड़बड़ी आ सकती है।

M1 R4 वेब कैमरा Study Material in Hindi

एक वेव कैमरा, कम्प्यूटर की एक ऑब्जेक्ट पर केवल फोकस करके उसका इनपुट ग्रहण करने की अनुमति देता है। कैमरे को इनपुट ऑब्जेक्टक पर फोकस किया जाता है। जिससे उस ऑब्जेक्ट की पिक्चर ली जा सके। इस तरह ली गई पिक्चर को कम्प्यूटर नेटवर्क द्वारा दूर तक ट्रांसफर किया जा सकता है।इस ऑब्जेक्ट की इमेज को, इंटरनेट द्वारा या नेटवर्क द्वारा दूरस्थ कम्प्यूटर के मॉनीटर पर देखा जा सकता है। इस नेटवर्क पर वॉयस को भी ट्रांसफर किया जा सकता है। अत: दो या अधिक व्यक्ति इस तरीके से एक दूसरे से बातचीत कर सकते हैं। यही तरीका वीडीयों कॉन्फ्रेंसिग में इस्तेमाल होता है।

M1 R4 ट्रैकबॉल Study Material in Hindi

ट्रैकबॉल भी एक प्रकार की पॉइटिंग डिवाइस होती है। इसमें एक बॉल होती है जो किसी भी दिशा में घुमाई जा सकती है। कर्सर को मॉनीटर पर चलाने के लिए यूजर इस बॉल को अलग अलग दिशाओं में घुमता है। इसमें लगा हआ इलेक्ट्रॉनिक सर्किट इसके घूमने की स्पीड तथा दिशाओं पर नजर रखता है एवं इस सूचना को प्रोसेसर तक भेजता है। इस प्रकार की पॉटिंग डिवाइस का प्रोयग आम तौर पर लैपटॉप कम्प्यूटर में होता है
ट्रैकबॉल
ट्रैकबॉल

M1 R4 लाइटपेन Study Material in Hindi

लाइटपेन भी एक पॉइंटिग डिवाइस है से मॉनीटर स्क्रीन पर दिखाई देने वाले मेन्यू ऑप्शनों को सिलेक्ट करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। यह एक फोटों सेसिटिव पेन के तरह की डिविस होती है। जैसे ही इसकी टिप स्क्रीन को टच करती है, इसका फोटों सेल सेंसिटिव एलीमेंट स्क्रीन से आने वाली लाइट को डिटेक्ट करता है तथा उसके अनुरूप सिग्नल का प्रोसेसर में भेजता है। मेन्यू प्रोग्राम किए गए ऑप्शनों का एक सैट होता है जो यूजर के सामने रखा जाता है। यूजर अपनी पसद् वाछित मेन्यू के विवरण के आगे लाइट पेन को टच करके बताता है।
लाइटपेन
लाइटपेन
प्रोसेसर, लाइट पेन से भेजे एक सिग्नल द्वारा मेन्यू ऑप्शन को पहचानता है। लाइट पेन का प्रयोग ई- मेल पर छोटे संदेश लिखने और उन्हे भेजने में इस्तेमाल होने वाले हैंड हेल्ड पैड में भी होता है।

M1 R4 वॉयस इनपुट वं रिकॉग्नीशन सिस्टम Study Material Notes in Hindi

वॉयस इनपुट वं रिकाँनीशन सिस्टम एक इनपुट डिवाइस है जिसमें एक माइक्रोफोन या टेलीफोन लगा होता है जो मानव की आवाज को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में परिवर्तित करता है। इस तरीके से मिले सिग्नल पैटर्न को कम्प्यूटर में भेजा जाता है जहाँ इसे पहले से स्टोर किए गए पैटर्नो से मिलाकर देखा जाता है ताकि इनपुट की सही पहचान हो सके। जब क अत्यंत पास का मेच मिलता है तो सिस्टम उस शब्द को पहचान लेता है। पहले से स्टोर किए गए पैटर्न के सैट को सिस्टम की शब्दावली कहते हैं। इस शब्दावली को बनाने के लिए सिस्टम को इस तरह प्रशिक्षित किया जाता है कि वह शब्दावली के शब्दों तथा वाक्यांशों को समझ सके। अत: सिस्टम शुरूआत में ट्रेनिंग मेड में कार्य करता है। इस मोड में यूजर शब्दों और वाक्यांशों को कई बार बोलकर, सिस्टम को उसकी आवाज के पैट्र्न को पहचानने का प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) देता है इस ट्रेनिंग मोड में भविषय् के मैटिंग के लिए, पैटर्नों को बनाया और स्टोर किया जाता है। चूँकि सभी वाक्यों के उचारण में अंतर होता है, अत: वॉएस रिकॉग्नीशन सिस्टम अक्सर वक्ता पर निर्भर करता है। सिस्टम को एक से अधिक लोगों की आवाज को पहचाने की ट्रेनिंग दी जाती है इस स्थिति में कम्प्यूटर प्रत्येक यूजर के लिए अलग अलग शब्दावली को स्टोर किया जाता है।वॉयस रिकॉगनीशन सिस्टम के प्रयोगकुछ विशेष परिस्थितियों में जब यूजर के हाथ व्यस्त हों या उसकी आँखे मापने वाले यंत्र पर टिकी हों या किसी अन्य वस्तु पर टिकी हों, तब यदि वह कम्प्यूटाइज्ड सिस्टम में डाटा को इनपुट करना चाहता है तो वॉयस रिकॉग्नीशन सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। इसका प्रोयग सिक्योरिटी सिस्टम द्वारा, सिस्टम के अधिकृत यूजर की पहचान के लिए भी होता है। शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए जहां टेलीफोन इनपुट की जरूरत होती है- वहाँ भी व्यक्ति इस सिस्टम का प्रयोग करते हैं। वास्तव में वॉयस रिकॉग्नीशन सिस्टम का प्रयोग उन परिस्थितियों में हो सकता है जब भी इनपुट छोटा और बड़ा ही निश्चित तथा सही हो

लाभ

इस सिस्टम के प्रयोग से थकान कम होती है क्योंकि हाथ से कीबोर्ड में keys  की जगह हम मौखिक ( Verbal) निर्देश देते हैं। की बोर्ड की अपेक्षा आवाज द्वारा डाटा को एंटर कराने से उच्च शुद्धता प्राप्त होती है। इस के साथ ही की बोर्ड की तुलना में इस सिस्टम के साथ कार्य करने पर यूजर को स्वतंत्रता का अनुभव होता है। वॉयस रिकॉगनीशन सिस्टम में आसानी से रखे हुए माइक्रोफोन में, डाटा को एंटर करने के लिए ऑपरेटर को कहीं भी कढ़े होने और चारों तरफ घूमने की स्वतंत्रता होती है। इस सिस्टम में ऑपरेटर को ट्रेनिंग देना भी आसान होता है।

M1 R4 OMR (ऑप्टिकल मार्क रीडर) Study Material Notes in Hindi

OMR एक विशेष प्रकार का स्कैनर होता है जिसका प्रयोग पेन या पेंसिल में बनाए गए विशेष प्रकार के चिन्हों को पहचाने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग, आजकल आयोजित होने वाली विभिन्न परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिका की जाँच मं हो रहा है। उदाहरण के लिए  DOEACC  के ऑब्जेक्टिव टेस्ट पेपर में आप उत्तर को एक विशेष शीट पर बने छोटे वर्ग या गोले को पेन या पेंसिल से गाढ़ा कर देते हैं। इस उत्तर पुस्तिकाओं को ऑप्टिकल मार्क रीडर के प्ररयोग से कम्प्यूटर में डाटा जाता है। इसके बाद कम्प्यूटर उन उत्तर पुस्तकाओं की जाँच करता है। OMR का प्रयोग केवल इस प्रकार की परीक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कोई भी इनपुट डाटा जोकि चयन प्रणाली पर आधारित हो, उसे आप OMR इनपुट के लिए रिकॉर्ड कर सकते हैं।OMR जाँचे जाने वाले पेज पर लाइट को फोकश करता है और इन गहरे किए गए चिन्हों से रिफ्लेक्ट होकर आने वाले लाइट पैटर्न को तब डिटेक्ट किया जाता है।बार कोड रीडर एक विशेष डिवाइस होती है जो बार कोडेड टाटा को पढ़ने के लिए इस्तेमाल की जाती है। बार कोड एक विशेष प्रकार का कोड है, जिसका उपयोग आइटमों को तेजी से पहचानने के लिए होता है। इसमें छोटी छोटी लाइनों की एक सीरीज होती है जिन्हें बार कहा जाता बार की व्स्तिविक कोडिंग, बार की चौड़ाई होती है ना कि इस की ऊँचाई। से मुख्य रूप से वस्तुओं, किताबों, पोस्ट पैकेज और बैज आदि की पहचान करने के लिए होता है।

M1 R4 MICR (मैग्नेटिक इंक कैरेक्टर रिकॉग्नीशन) Study Material in Hindi

MICR बैंक चैकों तथा डिपॉजिट स्लिपों पर जो विशेष कैरेक्टर एनकोडेड होते हैं, उन्हें डिटेक्ट करता है। इन कैरेक्ट्रों को डिटेक्ट करने के बाद, MICR उन्हें कम्प्यूटर के रलिए डिजिटल डाटा में बदल देता है।OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रीडर)यह डिवाइस, एक कम्प्यूटर प्रिंटआउट में से, जिसमें टाइप किया या हाथ से लिखे टेक्स्ट के पूरे पूरे पेज होते हैं, अल्फाबेटिक एवं न्यूमेरिक कैरेक्टर डिटेक्ट करने में सक्षम है। इन कैरेक्टोरं की जाँच के लिए, इन्हें एक स्ट्राँग लाइट एवं लेंस सिस्टम के नीचे से होकर निकाला जाता है। इंक वाले रिया बिना इंक वाले एरिया से अलग होते हैं। एक बार जब पूरा कैरेक्टर स्कैन कर लिया जाता है, इसकी उस कैरेक्टर के साथ तुलना की जाती है जिसकों पहचानने के लिए मशीन को प्रोग्राम किया गया है। यदि दोनों कैरेक्टोरों का पैटर्न मैच कर जाता है तो स्कैन किया गया कैरेक्टर, आगे के कार्यों के लिए स्वीकृत हो जाता है।

लाभ

यह स्कैनर के प्रयोग से डाटा एंट्री को सरल एवं तेज बनाता है।यह उन लोगों के लिए काम के बोझ को कम करता है जिन्हें काफी सारा डाटा कम्प्यूटर में नियमित रूप से फीड करना होता है।

M1 R4 कार्ड रीडर Study Material in Hindi

कार्ड रीडर एक डिवाइस है जो पंच किए गए कार्ड को पढ़ती है। पंच कार्ड एक मोटे कागज के कार्ड पर बना एक स्टोरेज माध्यम है जिसमें पंच किए गए होल्स के रूप में डाटा रखा जाता है। कम्प्यूटर से कनेक्ट की गई पंच कार्ड पेरीफेरल डिवाइस अथवा एक की पंच मशीन द्वारा, कार्ड में होल्स पंच किए जाते हैं।पंच कार्ड कोड होल्स पर होकर गुजरने वाली लाइट के पैटर्न द्वारा डिटेक्ट किया जाता है।एक अन्य कार्ड रीडर जिसे मैगनेटिक कार्ड रीडरर कहते है, का प्रयोग क्रेडिट कार्ड के पीछे बनी मैग्नेटिक पटटी को पढ़ने में और कार्ड के माध्यम से भेजे जाने वाले डाटा को ट्रांसफर करने में होता है।

M1 R4 वीडियों कैमरा Study Material in Hindi

वीडियों कैमरा एक ऐसा कैमारा है जो लगातार तस्वीरे खीचता है तता डिजिटल या ऐनालॉग सिग्नल उत्पन्न करता है जो एक मॉनीटर पर डिस्प्ले हो सके अथवा स्थी रिकॉर्डिग के लिए भेजे जा सकें। वीडियों कैमरे से उत्पन्न सिग्नल, परंपरागत तरीके से ऐनालॉग होते हैं लेकिन आजकल डिजिटल वीडियों कैमरे भी उपलब्ध है जो कि ऐनालॉग सिग्नलों को डिजिटल सिग्नल में परिवर्तित कर देते हैं।एक वीडियों कैमरा, इमेजों को लाइनों के सीरीज में तोड़कर फिर उन्हें कैप्चर करता है। प्रत्येक लाइन एक एक करके स्कैन की जाती है एवं लाल, हरी और नीली लाइटों की लगातार बदलने वाली इंटेसिटी को फिल्टर करके, लगातार बदलने वाले (ऐनालॉग) सिग्नल में परिवर्तित किया जाता है। इसके बाद इन्हें कम्प्यूटर द्वारा एक नेटवर्क पर पिक्टर को भेजने के लिए प्रयोग किया जाता है।Life Our Facebook PageSee Also : O Level Study Material Notes Sample Model Practice Question Papers with AnswersO Level

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