M1 R4 Memory Study Material Notes in Hindi

M1 R4 Memory Study Material Notes in Hindi

M1 R4 Memory Study Material Notes in Hindi:- इस पोस्ट में आपकों मिलेगीं मेमोरी (Memory) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे रैम (Ram) रॉम Rom बूटिंग ( Booting ) आदि के विषये में महत्वपूर्ण जानकारी।

 M1 R4 मेमोरी (Memory) Study Material in Hindi

कम्प्यूटर सिस्टम में इनपुट यूनिट द्वारा एंटर के गे डाटा और निर्देशों को वास्तविक प्रोसेसिंग शुरू होने से पहले ही कम्प्यूटर में स्टोर कर किया जाता है सी तरह प्रोसेसिंग के बाद कम्प्यूटर द्वारा दिए गए परिणामों को आउटपुट यूनिट में भेजने से पहले कम्प्यूटर सिस्टम में ही कहीं रखा जाता है। इसके अलावा कम्प्यूटर द्वारा दिए गए मध्यवर्ती परिणामों को भी आगे की प्रोसेसिंग के लिए जमा करके रखा जाता है। कम्प्यूटर सिस्टम की मेन मेमोरी को इन आवश्यकताओं की पूर्ति के अनुरूप ही डिजाइन किया जाता है। यह डाटा एवं निर्देशों को स्टोर करने, मध्यवर्ती परिणामों को स्टोर करने एवं अतिंम परिणामों को स्टोर करने के लिए जगह प्रदान करती है। संक्षेप में कहा जाऐ तो प्राइमरी मेमोरी के निश्चित कार्य हैं निम्न को स्टोर करना: प्रोसेसर किए जाने वाले सभी डाटा एवं निर्देश प्रोसेसिंग के दौरान मिले मध्यवर्ती परिणाम एवं आउटपुट डिवाइसिस में भेजे जाने से पहले मिले अंतिम परिणाम। उदाहरण के तौर पर मैग्नेटिक कोर के मैग्नेटाइजेशन को क्लॉकवाइज डायरेक्शन में 0 द्वारा एवं एंटी क्लॉकवाइस डारयेक्शन में 1 द्वारा दर्शाया जाता है उसी प्रकार एक इलेक्ट्रॉनिक मेमोरी में वेल्टेज लेवल की अनुपस्थिति को 0 द्वारा तथा एक निश्चित वोल्टेज लेवल की उपस्थिति को 1 द्वारा दर्शाया जाता है। इस तरह 0 एवं 1 दो चिन्ह है जो कम्प्यूटर के विभिन्न भागों की बाइनरी स्टेट को दर्शाते हैं। इन्हें ही बाइनही डिजिट्स या बिट्स कहा जाता है। कम्प्यूटर मेन मेमोरी को वर्डस या बाइट्स में विभाजित करने की सुविधा देता है। एक बाइट में सामान्य: 8 बिट्स की सूचना होती है। सेमी कंडक्टर मेमोरी निम्न दो प्रकार की होती है।

M1 R4 Memory Study Material Notes in Hindi

RAM (रैडम एक्सेस मेमोरी) ROM (रीड ओनली मेमोरी) RAM (रैम) (रीड/ राइट मेमोरी) रैम एक रीड राइट मेमोरी होती है। रैम में सूचना को लिखने के साथ साथ पढ़ा भी जा सकता है। यह एक वोलाटाइल मेमोरी है। इसमें सूचना तभी तक स्टोर रहती है जब तक कम्प्यूटर को पॉवर सप्लाई दी जा रही है। जैसे ही पॉवर सप्लाई स्विच ऑफ होती है या बाधित होती है, RAM में स्टोर की गई सूचना नष्ट हो जाती है। अलग अलग क्षमता वाली रैम उपलब्ध हैं, जैसे 256 MB, 512 MB आदि।

M1 R4 स्टैटिक एवं डायनामिक रैम (Static and Dynamic RAM) Study Material in Hindi

रैम मुख्यतᛶ: दो प्रकार की होती है: स्टैटिक रैम एवं डायनामिक रैम। स्टैटिक रैम पॉवर सप्लाई मिलते रहने तक सूचना को स्टोर करके रखती है जबकि डायनामिक रैम में कुछ ही समय में (कुछ मिली सेकेंड) स्टोर की गई सूचना नष्ट हो जाती है फिर चाहें पॉवर सप्लाई ऑन हो। इसलिए प्रति 2 मिली सेकेंड में आमतौर पर डायनामिक रैमस को समय समय पर रिफ्रैश करना पड़ता है। डायनामिक रैम काफी सस्ती होती है, इनकी पैकिंग डेसिटी काफी अधिक होती है तथा इनकी स्पीड मॉडरेट होती है। इनका प्रयोग वहाँ होता है जहां अधिक क्षमता की मेमोरी की जरूरत होती है। स्टैटिक रैम काफी महँगी होती है व इसमें रबिजली की खपत भी अधिक होती है। इसमें रिफ्रेशिंग सक्रिट्री की आवश्यता नहीं होती है। डायनामिक रैम की तुलना में इनकी स्पीड काफी धिक होती है।

M1 R4 ROM (रॉम) Study Material Notes in Hindi

रॉम स्थाई मेमोरी होती है। इसकी अंतर्वस्तु, पॉवर सप्लाई के स्विच ऑफ होने पर नष्ट नहीं होती है। यूजर रॉम में नहीं लिख सकता है। इसकी अतंर्वस्तु को रॉम के निर्माण केसमय ही लिख दिया जाता है। रॉम में स्थाई प्रोग्राम एवं अन्य प्रकार का डाटा स्टोर किया जाता है, जिसकी आवश्यकता, कम्प्यूटर को यूजर प्रोग्राम को एक्जीक्यूट करते वक्त पड़ती है। Sine, Cosine, logarithm, square rot, expontial एवं code conversion tables इत्यादि फंक्शन रॉम में स्टोर रहते हैं। रॉम का एक उदाहरण है Toshiba Mask ROM, TCS 531000, 512 K x 8 बिट्स

M1 R4 प्रोग्रामेबल रॉम (PROMs) Study Material in Hindi

प्रोग्रामेबल ROM जिन्हें PROM कहा जाता है, भी उपलब्ध है। विभिन्न प्रकार की PROM जैसे इरेजेबल Prom जिन्हें E2PRM में कहा जाता है, भी उपलब्ध है। यूजर PROM, EPROM एवं E2PRMn  में अपनी सूचना लिख सकते हैं। एक बार प्रोग्राम किए जाने के बाद EPRM और E2PRM में रिकॉर्ड की गई सूचना को आप मिटाकर दूसरी सूचना उसमें रिकॉर्ड कर सकते हैं लेकिन PROM में जो सूचना एक बार लिख दी जाती है उसे बदला नहीं जा सकता है। यूजर प्रोग्राम्स एक्जीक्यूट करने के रले इन सूचनाओं की आवश्यकता होती है। 745287 PROM का एक उदाहरम है

M1 R4 EPROM (इरेजेबल PROM) Study Material Notes in Hindi

एक EPROM इरेजेबल PROM होती है। EPROM में स्टोर किए गए डाटा को हाई इंटेसिटी एवं शॉर्ट वेव वाली अल्ट्रा वॉयलेट लाइट के संपर्क में करीब 20 मिनट तक रखने से वह इरेज हो जाता है। जब हम पूरी EPROM को ही अल्ट्रा वॉयलेट लाइट के संपर्क में रखते हैं तो पूरा का पूरा डाटा ही इरेज हो जाता है। EPROM सस्ते एवं विश्वसनीय होते हैं अत: इनका व्यापक रूप से प्रयोग होता है। EPROM का प्रयोग स्थाई प्रोग्रामों को, जिन्हें अपडेट किए जाने की जरूरत होती है, स्टोर करने के लिए किया जाता है। वे प्रोग्राम जा शोध और विकास  की अवस्था में होते हैं, को भी EPROM में स्टोर किए जाने की जरूरत पड़ती है क्योंकि उन्हें कई बार संशोधित किए जाने की आवश्यकता पड़ती है। जहां पर डवलपमेंट स्टेज में प्रोग्रामों में अपडेटिंग या परिवर्तन की आवश्यकता होती है वहाँ PROM की अपेक्षा EPROM अधिक सस्ते पड़ते हैं क्योंकि इनका पुन: प्रयोग किया जा सकता है। इंटेल 87C257 EPROM का एक उदाहरण है

M1 R4 Booting (बूटिंग) Study Material in Hindi

बूट का अर्थ है स्टार्ट करना या कम्प्यूटर सिस्टम को तैयार (Ready) करना जिससे यह निर्देशों को ले सके। Boot  शब्द Bootstrap शब्द से आया है। जिस प्रकार Bootstrap आपकों जूते पहनने में मदद करते हैं उसी प्रकार कम्प्यूटर की बूटिंग इस ROM के निर्देशों को मेन मेमोरी में लोड करने में मदद करती है। जब कम्प्यूटर को सबसे पहले स्विच ऑन किया जाता है, इसे cold booting ता है। जब आप अपने कम्प्यूटर को ऑन करते हैं, तब इस बात की पूरी संभावना होती है कि ऑपरेटिंग सिस्टम बूट के लिए तैयार हो चुका है (RAM में ऑटामैटिक रूप से लोड होना)। यह क्रम इस प्रकार चलता है: जैसे ही कम्प्यूटर ऑन होता है आपके सिस्टम की ROM की स्थित बेसिक इनपुट आउटपुट सिस्टम (BIOS) जाग जाता हैं और अपना चार्ज संभाल लेता है। BIOS पहले से ही लोड होता है क्योंकि यह ROM चिप में बिल्ट इन होता है। RAM को ठीक विपरित, ROM के कंटेंट, कम्प्यूटर के स्विच ऑउफ होने पर इरेज नहीं होते हैं। BIOS सबसे पहले पॉवर ऑन सेल्फ कटेस्ट ( Psost) करता है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कम्प्यूटर के सभी भाग कार्य कर रहे  हैं। BIOS का बूट प्रोग्राम कुछ विशेष बुट प्रोग्रामों को ढूँढता है जो ऑपरेटिंग सिस्टम को वास्तव में हार्ड डिस्क पर लोड करते हैं।

M1 R4 Memory Study Material Notes in Hindi

पहले यह ड्राइव A पर देखता है (यदि डिस्क ड्राइव नहीं है या आपने इसे अलग तरीके से सैट किया तो यह ऐसा नहीं करेगा) कि इससे एक निश्चित जगह पर ऑपरेटिंग सिस्टम की बूट फाइले रखी हैं या नहीं। ( यदि ऑपरेटिंग सिस्टम MSDOS होता है (उदाहरण के लिए ) तो यह दो फाइले IO. SYS और MSDOS.SYS को खोजगा)। यदि ड्राइव A में एक डिस्केट है पर यह सिस्टम डिस्क नहीं है तो BIOS आपकों एक मैसेज भेजेगा कि ड्राइव A सिस्टम डिस्क नहीं है। यदि ड्राइव A में कोई डिस्केट नहीं है जोकि अधिकतर होता है), BIOS. हार्ड ड्राइव की एक निश्चित जगह पर सिस्टम फाइलों को खोजता है। इसके बाद यह RAM में बूट रिकॉर्ड को लोड करता है। बूट रिकॉर्ड में एक प्रोग्राम होता है जहाँ BIOS इसमें चला जाता है और कम्प्यूटर के बुट रिकॉर्ड का कंट्रोल उसे दे देता है। बूट रिकॉर्ड डिस्केट या हार्ड डिस्क से प्रारंभिक सिस्टम फाइल (उदाहण: DOS सिस्टम के लिए, IO.SYS) को लेकर RAM में लोड करता है। यह प्रारंभिक फाईल (उदाहरण): IO.SYS में SYSINIT नामक प्रोग्राम होता है) इसके बाद बाकी ऑपरेटिंग सिस्टम को RAM में लोड करती है। (इस पॉइंट पर बूट रिकॉर्ड की जरूरत नहीं पड़ती है एवं इसे अन्य डाटा द्वारा ओवरेलेड किया जा सकता है)। प्रारंभिक फाइल (जैसे SYSINIT) एक सिस्टम फाइल (जैसे SYSINIT) एक सिस्टम फाइल (जैसे MSDOS. SYS) को लोड करती है जिसे यह पता होता है कि BIOS के साथ किस प्रकार कार्य करना है। ऑपरेटिंग सिस्टम फाइलों में से जो पहली फाइल लोड की जाती है उसे सिस्टम कन्फिगरेशन फाइल (DOS के लिए यह CONFIGSYS है) कहा जाता है। इस कन्फिगरेशन फाइल की सूचना लोडिग प्रोग्राम को यह बताती है कि अब कौन से विशेष ऑपरेटिंग सिस्टम फाइल को लोड़ करने की जरूरत है।( उदाहरण: स्पेसिफिक डिवाइस फाइल)। एक अन्य विशेष फाइल जो लोड की जाती है, वह यह बताती है कि बूट प्रोसेस के एक हिससे के रूप में वह कौन सा खास ऐरप्लीकेशन या कमांड है जो यूजर चाहता है। DOS में इस फाइल को AUTOEXECBAT कहा जाताहै। विडोंज में इसे Win . INI कहा जाता है। सभी ऑपरेटिंग सिस्टम फाइलों के लोड होने के बाद, ऑपरेटिंग सिस्टम को कम्प्यूटर का कंट्रोल दे दिया जाता है और यह रिक्वेस्टिड किया गया प्रारंभिक कमांडों को संचालित करके पहले इंदरेक्टिव यूजर इनपुट के लिए इंतजार करता है। Life Our Facebook Page See Also : O Level Study Material Notes Sample Model Practice Question Papers with AnswersO Level

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