M1 R4 Microsoft Windows Study Material Notes in Hindi

M1 R4 Microsoft Windows Study Material Notes in Hindi

M1 R4 Microsoft Windows Study Material Notes in Hindi : इस पोस्ट में आपकों मिलगी माइक्रोसॉफ्ट विंडोज (Microsoft Windows) और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे विंडोज़ के विभिन्न वर्जन्स पर एक नजर, विंडोज 98 की मुख्य विशेषताएँ, विंडोज XP ऑपरेटिंग सिस्टम, आदि के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी।
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माइक्रोसॉफ्ट विंडोज (M1 R4 Microsoft Windows Study Material Notes in Hindi)

माइक्रोसॉफ्ट विंडोज आजकाल का सबसे कॉमन ऑपरेटिंग सिस्टम है। यह पीसी के लिए विश्व में सबसे अधिक बिकने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम है।लेकिन विंडोज, OS से कुछ अधिक है। यह ऐसे फंक्शन प्रदान करता है जो आपकों कई प्रोग्रामों को एक साथ मैनेज करने की, पीसी को कस्टमाइज करने की एवं पीसी से जुडे अन्य कई मैन्टेनैस के कार्य करने की अनुमति देता है। यह कई एसेसरीज सॉफ्टवेयर प्रोग्राम जैसे यूटिलिटीज, मीडिया प्लेयर आदि के साथ आता है।विड़ोज पीसी की देखभाल करने के साथ साथ बैकग्राउंड में ऐसे कई कार्य भी करता है जिन्हें देख नहीं सकते हैं। यह परदे के पीछे काफी व्यस्त रहता है एवं आपके सॉफ्टवेयर तथा हार्डवेयर के कार्यों को मैनेज करता रहता है। विंडोज निम्न कार्य करता है:
  • यह आपको ऐप्लीकेशन प्रोग्राम स्टार्ट करने के तरीके प्रदान करता है।
  • एक बार में कई प्रोग्राम को रन करता है। इस मल्टीटस्किंग कहा जाता है। इसका अर्थ है कि आप के पास एक वर्ड प्रोसेसिंग प्रोग्राम एवं एक स्प्रेड शीट प्रोग्राम, एक ही समय के साथ साथ खुले हो सकते हैं और आप एक से दूसरे में स्विच करके काम करते रहते हैं।
  • फाइल्स को मैनेज करने का एक तरीका प्रदान करता है। फाइल वह डॉक्यूमेंट होता है जिसे आप कम्प्यूटर पर तैयार करते हैं जैसे लेटर्स, मैमोज एवं वर्कशीट। विंडोज एक्सप्लोरर जो एक फाइल मैनेजमेंट प्रोग्राम है और विंडोज के साथ आता है, का प्रयोग करके आप फाइल्स को कॉपी, मूव, ऑर्गनाइज डिलीट एवलं और भी कई कार्य कर सकते हैं।
  • इंटरनेट ऐक्सेस के सैटअप में भी यह आपकी मदद करता है। यदि आपके पास पहले से ही इंटरनेट कनेक्शन नहीं है तो आप इंटर्नेट विजार्ड की सहायता से इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर के साथ अकाउंट सैटअप कर सकते हैं। एक बार जब आपके पास एक अकाउंट हो जाता है, तो आप विडोज के साथ आने वाले इंटरनेट एक्सप्लोरर का प्रयोग करके वेब सर्फिग कर सकते हैं
  • विडोंज आउटलुक ऐक्सेसरी के साथ आता है जो एक ई-मेल प्रोग्राम है है। इसका प्रयोग करके आप इन्टरनेट इलेक्ट्रॉनिक मेल भेज सकते एवं प्राप्त कर सकते प्राप्त भी कर सकते हैं।
  • विंडोज कई उपयोगी ऐक्सेसरी प्रोग्राम जैसे वर्ड पैड जो एक वर्ड प्रोसेसिंग प्रग्राम है, के साथ आते हैं। इसमें एक टेक्स्ट ऐडिटर, जिसे नोड पैड कहा जाता है और जिससे आप नोट्स एवं अन्य छोटे डॉक्यूमैंट्स टाइप कर सकते हैं, भी होता है।
  • डेस्कटॉप एवं मॉनीटर के अन्य स्क्रीन एरिया को कस्टमाइज करने का एक तरीका प्रदान करता है।

विंडोज के विभिन्न वर्जन्स पर एक नजर (M1 R4 Microsoft Windows Study Material Notes in Hindi)

1983 में माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज पर कार्य करना शुरु किया था। माइक्रोसॉफ्ट OEM( ओरीजनल इक्विपमेंट मैन्यूफैक्चरर्स) के समूह को सिलेक्ट करने के लिए विंडोज का एक टेस्ट वर्जन दिखाया। अधिकतर OEMs ने विंडोज के प्रदर्शन के दौरान विंडोज के कॉन्सेप्ट पर अपनी सहमति जताई। इससे उनके दिमाग में माइक्रोसॉफ्ट के साथ क ऑपरेटिंग एनवारॉनमेट में स्वयं को अलिन करने का विचार आया क्योंकि माइक्रोसॉफ्ट पहले ही बाजर में अच्छे ऑपरेटिंग सिस्टम को ला चुका था जिसे MS-DOS कहा गया।विंडोज सॉफ्टवेयर डेवलपर्स का पहला सेमीनार फरवरी 1984 को आयोजित हुआ जिसमें सॉफ्टवेयर डेवलपर्स को विंडोज की तकनीक से परिचित कराया गया, ताकि वो विडोंज ऐप्लीकेशन बना सकें। सेमीनार से मिले फीडबैक एवं अपने आप के गए शोध कार्यों के द्वारा, विडोंज डेवलमेंट टीम को यह ऐहसास हुआ कि विड़ोंज को वास्तिविकता से कही अधिक बेह्त्र तरीके से बनाया जा सकता है। उन्होने दो बड़े कार्य जिनके नाम वर्चुअल स्टोरेज एवं डायनामिक लिंकिग, को मेमोरी मैनेजमेंट के साथ जोड़ा।मई 1984 में विंड़ोज के दो ऐडीशन करने के बाद माइक्रोसॉफ्ट ने ऐप्लीकेशन बनाने के लिए केवल एक रफ सॉफ्टवेयर वेंडर्स टूलकिट ही भेजा, जिससे विंडोज की सेल नवंबर 1984 तक के लिए लेट हो गी जो इससे भी आगे जून 1985 तक बढ़ी प्रेस, जो इस समय तक बहुत ही वफादार रही, ने विंडोज को वेपरवेयर कहना शुरू किया। यह अनुमान लगाया गया कि माइक्रसॉफ्ट ने विंडोज बनाने के कार्य को बहुत कठिन मान लिया है और वह इसे हैंडल नहीं कर पा रहे है। लेकिन सॉफ्टवेयर डेवलपर्स, जो टूलकिट एवं विंडोज का नियमित अपडेट प्राप्त कर रहे थे, वफादार रहे, और यह पहचान सके कि यह एक क्रांतिकारी उत्पाद होगा और यह जो देर हो रही, वह इसकी जटिलता को देखते हुए जायज है।जून 1985 में माइक्रोसॉफट् नें विंडोज के प्रथम वर्जन को सॉफ्टवेयर डेवलपर्स एवं OEMs के लिए रिलीज किया। लिकिन इस पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया क्योंकि विडोज अभि तक रिटेल सेल में नहीं आया था माइक्रोसॉफ्ट ने जून से नवंबर के बीच के समय को इस्तेमाल किया जब विंडोज को आखिरकार यूजर्स के सामने लाया गया। जिससे वो अपने खुद के विंडोज ऐप्लीकेशन बना सकें जैसे  write, पेंटब्रश एवं डेस्कट़ॉप ऐक्सेसरीज। आज विंडोज सॉफ्टवेयर पैकेज के लिए सबसे अधिक इस्तेमाल होना वाला पीसी ऑपरेटिंग सिस्टम ( ग्राफिकल यूजर इंटरफेस) है।
  • मई 1990 में विंडोज, 30 को लाया गया। विंडोज वर्जन 1 और 2 के विपरीत, यह वर्जन वास्तव में इस्तेमाल करने योग्य था।
  • मई 1992 विंडोज 31 को लया गया जिसमें अधिक स्थायित्व जोड़ा गया एवं इसने प्रथम पीढ़ी तथा दितीय पीढी के पीसी (8086 एवं 80286) को अनयूजेबल बना दिया क्योंकि ये इस पर चल नहीं सकते थे।
  • मार्च 1993 में विंडोज फॉर वर्कग्रुप (जिसे WFW या विंडोज 3.11 भी कहा जाता है) को लाया गया, जिससे विंडोज में 32 बिट में तेजी से कार्य करना तथा पीयर टू पीयर नेटवर्किग करना आदि कार्य आसानी से होने लगे।
  • जुलाई 1993 में विंडोज NT को लाया गया जो विंडोज का पहला इंडस्ट्रियल – स्ट्रेंथ वर्जन था।
  • अगस्त 1995 में विंडोज 95, वर्जन 2 ( जिसे 95 Ob या OSR2 भी कहा जाता है) को कम्प्यूटर के निर्माताओं के लिए लाँच किया गया इसमें कुछ गल्तियों को ठीक किया गया एवं अन्य छोटे छोटे कई सारे इंप्रवमेंट किए गए। विंडोज NT 4.0 भी लाँच किया गया जिससे विंडोज 95 इंटरफेस को विंडोज NT पर डाला गया।
  • सितंबर 1998 में विंडोज 98 को लाँच किया गया।

विंडोज 98 की मुख्य विशेषताएँ (M1 R4 Microsoft Windows Study Material Notes in Hindi)

यदि हम प्रत्येक बिट को ऐनालाइज करें तो पाएँगे कि विंडोज 98 में ऐसा कोई मेजर अपग्रेड नहीं है जैसा विंडोज 3.x  से विंडोज 95 में हुआ था। इसमें कई सुधार किए गए है, काफी कुछ जोड़ा गया है, कई सुविधाएँ है एवं कुछ महत्वपूर्ण नेटवर्किग तथा प्रशासनिक सुधार किए गए हैं कुछ विशेषताएँ जो विंडोज 98 में नई नई हैं एवं विंडोज 95 में नहीं पाई गई वो इस प्रकार है:
  • विंडो ट्यून अप विज़ार्ड: सिस्टम टूल्स ग्रुप में एक नया प्रोग्राम जो ऑपरेटिंग सिस्टम एवं हार्ड डिस्क को, हार्ड डिस्क के डीफ्रैग्मेंटेशन, पीक कंडीशन में रखता है। यह अनावश्यक स्टार्टअप कमांड हटा देता ऐक्जीक्यूशन तेज होता है तथा डिस्क स्पेस बढ़ती है।
  • विंडोज सिस्टम अपडेट: यह विशेषता इस बात को सुनिश्चित करती है कि आप के पास सभी आधुनिक सिस्टम सॉफ्टवेयर जैसे ड्राइवर्स एवं सिस्टम फाइल्स उपलब्ध है। आप माइक्रोसॉफ्ट की वेब आधारित सेवा को नेट पर ऐक्सेस कर सकते हैं।
  • सिस्टम फाइल चैकर यूटिलिटी: विंडोज सिस्टम अपड़ेट की तरह जो ऑन लाइन कार्य करती है, यह नई यूनिलिटी, ऑफ लाइल कार्य करती है जब आप इंटरनेट से कनेक्टेड नहीं है। यह इस बात की जाँच करती है कि क्या आप की विंडोज 98 सिस्टम फाइल्स (*.dll,*.com.*.vxd,*.drv,*.ocx,*.inf,*.hlp एवं अन्य कई) बदल दी गई हैं, डेड हैं या खो गई है।
  • डिस्क डीफ्रैग्मेंटर ऑप्टिमाइजेशन विजार्ड: यह डिस्क डी फ्रैग्मेंटेशन की प्रक्रिया का इस्तेमाल करता है जिससे आपके ऐप्लिकेशन को रन करने की स्पीड को बढ़ाया जा सके। इस प्रकार, विजार्ड़ एक लॉग फाइल बनाता है, जो आपके द्वारा अधिकतर इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोग्रामों की पहचान करती है। एक बार लॉग फाइल बन जाने के बाद इसे डिस्क डीफ्रेग्मेंटर इन प्रोग्रामों से संवधित फाइल्स को स्टोर करने के लिए इस्तेमाल करता है। हार्ड डिस्क में एक ही लोकेशन पर, एक दिए गए ऐप्लीकेशन से संबंधित सभी फाइल्स को स्टोर करके यह विजार्ड आप के ऐप्लीकेशन के रन करने की स्पीड को श्रेष्ठतम बनाता है।
  • एन्हांस्ड डॉ. वाट्सन यूनिलिटी (Enhanced Dr. Watson Utility): यह एक यूटिलिटी है, जो कि प्रोग्राम या सिस्टम में खराबी के समय सिस्टम के बारे में सूचना इकट्ठी करता है।
  • डॉ. वाटसन यूटिलिटी यह रिपोर्ट देता है कि किस प्रोग्राम ने रिकॉर्डों तथा इसकी संबंधित सूचना जैसे सिस्टम की स्थिति को करप्ट किया है एवं इसे डिस्प्ले करता है अथवा बाद में देखने के लिए सेव कर लेता है।
  • नया बैकअप प्रोग्राम: सप्लाई किया गया बैकअप प्रोग्राम अब SCSI टेप डिवाइसिस को सपोर्ट करता है एवं इसके जनरल एन्हांसमेंट्स होते हैं जिससे आपके डाटा का बैकआप बनाना आसान और तेज हो जाता है।
  • नई पीढ़ी के हार्डवेयर के लिए सपोर्ट: जबसे विंडोज 95 आया, ढेर सारे नए हार्डवेयर भी सामने आएं जैसे: यूनीवर्सन सीरियल बस (USB), IEEE 1394, ऐक्सीलरेटेड ग्राफिक्स पार्ट (AGP), एडवांस्ड कन्फिगरेशन एंड पॉवर इंटरफेस (ACPI) एवं डिवाइसिस। विंडोज 98 में (DVD), एवं कुछ नई वीडियों कॉन्फ्रेसिंग डिवाइसिस विंडोज 98 में रन नई हार्डवेयर डिवाइसों के लिए ड्राइवर्स (drivers), कंट्रोल एवं सॉफ्टवेयर प्रोग्राम भी होते हैं।
  • इंटेल MMX प्रोसेसरों के लिए सपोर्ट: यह सपोर्ट प्रदान करता है जिससे तीसरी पार्टी सॉफ्टवेयर न बना सके जो इंटेल पेटिंयम मल्टीमीडिया ऐक्सेटेन्शन को तेज ऑडियों के लिए एवं इंटेल पेटियम प्रोसेरों से वीडियों सपोर्ट को एक्सप्लॉएट करता है।
  • ऐक्टिव मूवी (Active Movie): ऐक्टिव मूवी, विंडोज के लिए एक नया मीडिया स्ट्रीमिंग आर्किटेक्टर है जो हाई क्वालिटी वीडियों प्लेबैंक देता है। यह इंटरफेस के एक विस्तृत सैट को सामने लाता है जिस पर मल्टीमीडिया ऐप्लीकेशन एवं टूल्स बनाए जा सकें।
  • डिस्प्ले सैटिंग एन्हांसमेंट: हम हमारे स्क्रीन की रिजॉल्यूशन एवं कलर डेप्थ को डायनामिक रूप से बदल सकते हैं बिना विंडोज को रीबूट किए, जैसे कि पिछले वर्जनों में होता था।
  • FAT 32: Fat 32 FAT (फाइल ऐलोकेशन टेबल) फाइल सिस्टम का एक उन्नत वर्जन है, जो 2 गीगाबाइट से बड़ी डिस्कों को एक सिंगल ड्राइव के रूप में फॉर्मेट किए जाने की सुविधा देता है। FAT 32, FAT ड्राइवों की अपेक्षा छोटे कलस्टरों का इस्तेमाल करता है जिससे बड़ी डिस्कों पर स्पेस का अधिक कुशलता से इस्तेमाल हो सके।
  • मल्टीपल डिस्प्ले सपोर्ट: मल्टीपल डिस्प्ले सपोर्ट आपकों एक ही पीसी पर कई मॉनीटर एवं या कई ग्राफिक ऐडेप्टरों को इस्तेमाल करने एवं कम्प्यूटर गेम्स खेलने के रलिए फायदेमंद हो सकता है।
  • मल्टीलिंक चैनल एकत्रीकरण के लिए सपोर्ट: इसका अर्थ है आप कई मोडेम को एक साथ जोड़ सकते हैं (यह मानते हुए कि आपके पालस कई सारी डायल अप फोन लाइने उपलब्ध हैं) जिससे इंटरनेट पर आपकों अधिक ट्रांसफर स्प्रीड मिल सके एवं अन्य डायल – अप सेवाओं या रिमोट कम्प्यूटरों में भी स्पीड बढ़ सके।
  • एडवांस्ड इंटरनेट ब्राउजिंग की कार्य प्रणाली: विंडोज 98 के साथ (इंटरनेट एक्सप्लोरर द्वारा), एंडवांस्ड ब्राउजिंग क्षमताओं जैसे ऑटों कंप्लीट ऐन्हांस्ड वेब सर्चिग, इंप्रूव्ड फेवरेट लिस्ट फॉवर्ड/बैक बटनों पर नेवीगेशन हिस्ट्री, एवं इंप्रूव्ड प्रिंटिंग के द्वारा वेब सर्फिग काफी आसान हो गई है।
  • इंटरनेट कम्यूनिकेशन के लिए टूल्स: विंडोज 98 में ऑनलाइन कम्प्यूनिकेशन के लिए बड़े महँगें टूल्स होते हैं जिनमें आउटलुक ऐक्सप्रेस, माइक्रोसॉफ्ट नेटमीटिंग, पर्सनल वेब सर्वर एवं वेब पब्लिशिंग विजर्ड शामिल होते हैं।
  • पॉइंट टू पॉइंट टनेलमग प्रोटोकॉल के लिए क्लाइंट सपोर्ट (PPTP): पॉइंट टू पॉइंट टनेलिंग प्रोटोकॉल, पब्लिक डाटा नेटवर्कों जैसे इंटरनेट को इस्तेमाल करने का एक तरीका प्रदान करता है जिसससे क्लाइंट PC को सर्वर से जोड़ने के लिए काल्पनिक नेटवर्क तैयार किए जा सकें।
  • विंडोज स्क्रिप्टिंग होस्ट: विंडोज 98 यूजर इंटरफेस से सीधे स्क्रिप्ट ऐक्जीक्यूशन को या कमांड लाइन के ऐक्जीक्यूशन को सपोर्ट करता है (एक स्क्रिप्ट, कमांडों की सीरीज होती है जो ऑटोमैटिक रूप से ऐक्जीक्यूट हो जाती है)। यह सपोर्ट विंडोज स्क्रिप्टिंग होस्ट द्वारा दिया जाता है एवं इससे कई यूजर इंटरफेश ऐक्शन जैसे शॉर्टकट बनाना, नेटवर्क सर्वर से कनेक्ट करना, नेटवर्क सर्वर से डिस्कनेक्ट करना आदि कार्य ऑटोमैटिक रूप से हो जाते हैं।
  • 32- बिट डाटा लिंक कंट्रोल: डाटालिंक कंट्रोल प्रोटोकॉल मुख्य रूप से आई बी एम (IBM) मेनफ्रेम और IBM AS/400 कम्प्यूटर्स में ऐक्सेस के लिए प्रयोग किया जाता है। विंड़ोज 98 में बना यह 32- बिट का DLC सॉप्टवेयर, नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेटर को 32 बिट एवं 16 बिट DLC प्रोग्रामों के साथ सपोर्ट करने में मदद करता है।

विंडोज XP ऑपरेटिंग सिस्टम (M1 R4 Microsoft Windows Study Material Notes in Hindi)

विंडोज XP PC के लिए विंडोज डेस्कटॉप ऑपरेटिंग सिस्टम का बाद में आने वाला वर्जन है। विंडोज XP ने डेस्कटॉप को नया एवं अधिक निजी रूप देने की कोशिश की है जो यूजर के लिए इमेज स्कैन एवं इंपोर्ट करना काफी सरल बनाता है। यह वेब पर म्यूजिक की फाइल्स इकट्ठी करता है एवं उन्हें पोर्टेबल डिवाइसिस में ट्रांसफर करता है। विंडोज XP अलग अलग फेमिली मेंबर्स को अपना अलग ड़ेस्कटॉप एवं फाइल्स का एक पर्सनल सैट इस्तेमाल करने की भी अनुमति प्रदान करता है। स्टार्ट मेनू को दोबारा डिजाइन किया गया है जिससे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले प्रोग्रामों को आसानी से ढूँढा जा सके। विंडोज XP  दो वर्जनों में आता है एक प्रोफेशनल वर्जन एवं दूसरा होम एडीशन वर्जन।

विंडोज  XP की मुख्य विशेषताएँ (M 1 R4 Microsoft Windows Study Material Notes in Hindi)

  • कम्प्यूटरों की शेयरिंग: विंडोज XP प्रोफेशनल, पर्सनलाइज्ड सैटिंग्स स्टोर करने एवं एक दूसरे के लिए प्रिफरेंस सैट करने की अपेक्षा कम्प्यूटर की शेयरिंग को आसान बनाते हैं।
  • एक कम्प्यूटर के मल्टिलपल यूजर के लिए फास्ट यूजर स्विचिंग की सुविधा: बिना लॉगिंग ऑफ या ऑन किए ही एक यूजर से दूसरे में आसानी से यूजर स्विचिंग की जा सकती है।
  • यूजर नेम एवं पासवर्ड स्टोर करना: विंडोज XP प्रोफेशनल के द्वारा, हम अलग अलग साइट्स एवं रिसोर्सेज से कनेक्ट होने के लिए, अलग अलग यूजर नेम और पासवर्ड स्टोर कर सकते हैं। ये नाम और पासवर्ड, हमारे यूजर प्रोफाइल के एक हिस्से की तरह होंगे जिसे हम अलग अलग कम्प्यूटरों में ले जा सकेंगे।
  • फाइल्स एवं सैटिंग्स ट्रांसफर विज़ार्ड: फाइल एवं सैटिंग्स ट्रांसफर विजार्ड की मदद से, हम पनी पर्सनल सैटिंग्स एवं डाटा फाइल्स को पुराने कम्प्यूटर से नए में मूव करा सकते हैं।
  • डेस्कटॉप क्लीनअप विज़ार्ड: डेस्कटॉप क्लीन अप विजार्ड की मदद से, हम उन शॉर्टकटों को डेस्कटॉप से हटा सकते हैं जिनका हम इस्तेमाल नहीं करते हैं।
  • पर्सनल स्क्रीन सेवर: इस विशेषता द्वारा, हम अपनी फोटोग्राफ को ही स्क्रीन सेवर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • एक सीडी में फाइल्स एवं फोल्डर्स की कॉपी करना: यदि हमारे पास एक सीडी रीराइटेबल (CD-RW) या सीडी – रिकार्डेबल ( CD-R) ड्राइव है तो हम रसीजी में फोटों, म्यूजिक या डाटा क़ॉपी कर सकते हैं। या सूना के बैकअप रखने का एक तरीका है।
  • नेटवर्क सैटअप विज़ार्ड: नेटवर्क सैटअप विज़ार्ड की मदद से हम उत्पादकता बढ़ाने के लिए क छोटा ऑफिस नेटवर्क बना सकते हैं।
  • इंटरनेट कनेक्शन शेयरिंग: इंटपरनेट कनेक्शन शेयरिंग, ऑफिस नेटवर्क के कम्प्यूटरों के पास डायरेक्ट इंटरनेट कनेक्शन न भी हो तो भी इस सुविधा से आप इंटरनेट से जुड़ सकते हैं।
  • इंटरनेट कनेक्शन फाइयवॉल (ICF): इंटरनेट कनेक्शन फायरवॉल उन कम्प्यूटरों के लिए जो इंटरनेट से जुड़े होते हैं, एक सुरक्षा प्रदान करता है। यह LAN (लोकल ऐरिया नेटवर्क) के लिए उपलब्ध है।
  • ऑनलाइन हेल्प: विंडोज XP आपरेटिंग सिस्टम के सभी फीचर्स के लिए विशेष मदद प्रदान करता है।
  • रिमोट असिस्टैंस: यह विशेषता किसी भी सपोर्ट टास्क के लिए एक कम्प्यूटर को दूर से बही देख कर कंट्रोल करने की सुविधा प्रदान करती है। किसी भी कम्प्यूटर प्रॉब्लम के लिए आप ऑनलाइन चैट करते करते प्रॉब्लम पर एक साथ काम भी कर सकते हैं।
  • कंपैटिबिलटी यह विशेषता, यूजर की मदद के लिए अपटूडेट, काँप्रिहेंसिव एवं कंपैटिबिलिटी सूचना प्रदान करती है।
  • रिमोट डेस्कटॉप: रिमोट डेस्कटॉप के द्वारा, जब आप दूसरे कम्प्यूटर पर काम कर रहे होते हैं तो भी अपने कम्प्यूटर पर चल रहें विंड़ों सेशन को ऐक्सेस कर सकते हैं।
  • सर्च कंपैनियन (Search Companion): विंडोज़ XP प्रोफेशनल सर्च कंपैनियन के द्वारा, आप ऑब्जेक्ट पिक्चर, म्यूजिक, डॉक्युमेंट, प्रिंटर कम्प्यूटर आदि को खोज सकते हैं।
  • विंडोज़ फाइल प्रोटेक्शन: विंडोज फाइल प्रोटेक्शन, सुरक्षित सिस्टम फाइल्स को नष्ट करने या बदलने से उनकी सुरक्षा करता है।स यह बैकग्राउंड में चलता है एवं विंडोज सैटअप प्रोग्राम द्वारा इंस्टॉल की गई सभी फाइल्स की सुरक्षा करता है।
  • सिस्टम रिस्टोर: यदि सिस्टम में कोई समस्या आ जाए तो सिस्टम रिरस्टोर फीचर, कम्प्यूटर को, बिना किसी पर्सनल डाटा फाइल के नष्ट हुए, वापस पूर्व स्थिति में ले आता है।
  • कंप्रेस्ड फोल्डर: विंडोज XP प्रोफेशनल में कंप्रेस्ड फोल्डर विशेषता का प्रयोग करके, आप फेल्डर्स द्वारा घेरी जाने वाली ड्राइव स्पेस को कम कर ससते हैं।
  • क्लीयर टाइप: अपने स्क्रीन फाँटों के ले क्लीयर टाइप चुनने से कम्प्यूटर स्क्रीन पर दिखने वाले शब्द अधिक साफ दिखेंगें जैसे कि किताब के पेज पर दिखाई देते हैं।
  • फाइल ऐसोसिएशन: विड़ोज XP प्रोफेशनल के साथ, आप यह बता सकते हैं कि कुछ निश्चित फाइल ऐक्सटेंशन वाली फाइल्स हमेशा एक ही प्रोग्राम में खुलेंगी।
  • ऑफ लाइन फाइल एवं फोल्डर: विंडोज XP प्रोफेशनल के द्वारा आप नेटवर्क फाइल्स को ऑफलाइन भी उपलब्ध करवा सकते हैं, जिससे आप जब नेटवर्क से कनेक्टेड ना भी हों तो भी आप उन पर कार्य कर सकते है
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