SSC CGL TIER 1 Industry Study Material In Hindi

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उद्योग

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औद्योग विकास को आज आधुनिक आर्थिक विकास की पूर्वापेक्षा के तौर पर देखा जाता है। औद्योगिक विकास अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने, राष्ट्रीय आय में वृद्धि करने तथा आय और सम्पत्ति की असमानताओं को कम करने में सहायक होता हैं।

भारत में आधुनिक विकास का इतिहास 153 वर्ष पुराना है, जिसमें स्वातन्त्र्योत्तर काल में गति देखी गई। इसकी शुरुआत सन् 1853 में चारकोल पर आधारित प्रथम लौह प्रगलन संयन्त्र से हुई जो असफल रहा। प्रथम सफल प्रयास सन् 1854 में मुम्बई में सूती वस्त्र बनाने और सन् 1855 में रिसरा में (कोलकाता के निकट) जूट कारखाने का रहा। कोयला खनन उद्योग की शुरुआत भी लगभग उसी समय हुई। सन् 1874 में कुल्टी में कच्चा लोहा बनाने का कारखाना स्थापित किया गया। सन् 1907 में जमशेदपुर में टाटा लौह इस्पात के कारखाने की स्थापना से औद्योगिक विकास को नई दिशा मिली। प्रथम एवं द्वीतीय विश्वयुद्ध के चलते औद्योगिक विकास को गति मिली। इस दौरान पहले से स्थापित उद्योगों का भी काफी विस्तार हुआ। इन्हीं प्रयासों के कारण सन् 1922 से सन् 1939 के बीच इस्पात, सूती वस्त्र, कागज, चीनी आदि का उत्पादन कई गुना बढ़ गया।

स्वतन्त्रता पश्चात् सरकार ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 6 अप्रैल, 1948 को प्रथम औद्योगिक नीति की घोषणा की। जिसमें मिश्रित अर्थव्यवस्था की संकल्पना पर बल दिया गया। बाद में समाजवादी ढंग से समाजवाद की स्थापना के उद्देश्य में सन् 1948 की औद्योगिक नीति में व्यापक परिवर्तन करते हुए दूसरी औद्योगिक नीति की घोषणा 30 अप्रैल, 1956 को की गई। उद्योगों को सार्वजनिक, निजी तथा संयुक्त क्षेत्रों में विभाजित किया गया। अवशिष्ट उद्योगों पंचवर्षीय योजनाओं में उद्योग क्षेत्र की वृद्धि दर, लक्ष्य तथा नई औद्योगिक पहल की घोषणा केन्द्र सरकार द्वारा की जाती रही।

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भारत में उद्योग

उत्पादन विशेषता के आधार पर भारतीय उद्योग को निम्नलिखित भागों में विभक्त किया जा सकता है यथा

धातुकर्म उद्योग         लौह-इस्पात, एल्युमीनियम, ताँबा, सीसा-जस्ता आदि।

वस्त्र उद्योग               सूती वस्त्र, ऊनी वस्त्र, रेशमी वस्त्र, कृत्रिम धागा, वस्त्र, जूट तथा पटसन उद्योग आदि।

इन्जीनियरिंग उद्योग   भारी तथा हल्की मशीन, वायुयान तथा विद्युत इन्जीनियरिंग आदि।

इलेक्ट्रॉनिक उद्योग   मोबाइल, टेलीविजन, कम्प्यूटर, एसी आदि।

परिवहन उद्योग         ऑटोमोबाइल, लोकोमोटिव, वैगन एवं काँच उद्योग।

रसायन उद्योग          पेट्रो रसायन, उर्वरक, औषधि एवं भेषज उद्योग, प्लास्टिक, सीमेण्ट, काँच

वन आधारित उद्योग  कागज, माचिस, खेल एवं प्लाईवुड आदि उद्योग

खाद्य उद्योग             चीनी, आटा, चावल, खाद्य तेल आदि।

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