SSC CGL TIER 1 Rajya Sarkar State Government Study Material in Hindi

राज्य सरकार State Government(Rajya Sarkar State Government Study Material in Hindi)
SSC CGL TIER 1 Rajya Sarkar State Government Study Material in Hindi
राज्य सरकार क गठन बी व्यवस्थापिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका से मिलकर होता है।
- भारत को राज्यों का संघ कहा गया है। वर्तमान में 28 राज्य तथा 7 केन्द्रशासित प्रदेश है। जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त है।
- भारत के मात्र 6 राज्यों में व्दिसदनीय व्यवस्थापित है, जहाँ निन्म सदन विधानसभा तथा उच्च सदन विधानपरिषद् का अस्तित्व है । वे राज्य है बिहार, उत्तर प्रदेश , महाराष्ट्र, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश एवं जम्मू- कश्मीर
Back to Index Link SSC CGL Study Material
Back to Index : SSC CGL Study Material Sample Model Solved Practice Question Paper with Answers
राज्यपाल Governor
- अनुच्छेद 153 में राज्यपाल पद का प्रावधान है।
- भारतीय संविधान के अनुच्छेद 168 (1) के तहत प्रत्येक राज्य में एक विधान मण्डल होगा जोकि राज्यपाल तथा दो या जहाँ एक सदन हो, वहाँ एक सदन से मिलकर बनेगा।
- राज्यपाल संसद या राज्य. विधानमण्डल का सदस्य नही हो सकता और यदि किसी सदन का सदस्य है तो राज्यपाल के पद पर नियुक्ति की तिथि से पहले उसे अपने सदन की सदस्यता का त्याग करना होगा
अनिवार्य योग्यताएँ(SSC CGL TIER 1 Rajya Sarkar State Government Study Material in Hindi)
- वह भारत का नागरिक हो। 35 वर्ष की आयु पुरी कर चुका हो
- किसी प्रकार के लाभ के पद पर न हो.
- राज्य विधानसभा का सदस्य चुने जाने के योग्य हो
नियुक्ति
सविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार, राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वार की जाती है
शपथ ग्रहण
राज्यपाल को सम्बन्धित राज्य के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायादीश अथवा उपलब्ध वरिष्ठतम न्यायाधीश के समक्ष शपथ ग्रहण करनी होती है।
पदावधि
अनुच्छेद 156 के तहत राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त अपना पद धारण करेगा और 5 वर्ष तक के कार्यकाल को पूरा करेगा। वह इससे पूर्व भी राष्ट्रपति को अपना त्याग पत्र दे सकता है। जब एक ही राज्यपाल की नियुक्ति दो या अधिक राज्यों के लिए होगी तो उसके वेतन उपलब्धियाँ राष्ट्रपति अवधारित करेगा (अनुच्छेद 158 (3) क)
कार्य व शक्तियाँ( State Government Study Material in Hindi))
- विधायी शक्तियों में वह विधानमण्डल की बैठकों के लिए समय और स्थान को निश्चित करता है और उनका बुलावा भेजता है
- वह वर्ष में एक बार सत्र के आरम्भ में विधानमण्डल की बैठको को सम्बोधित करता है। विधानमण्डल का अधिवेशन नही चल रहा होता है , तो उसे एक अध्यादेश को लागू करने की शक्ति प्राप्त है।
- जब भी विधानमण्डल का अधिवेशन नहीं चल रहा होता है, तो उसे एक अध्यादेश को लागू करने की शक्ति प्राप्त है।
कार्यकारी शक्तियाँ
- बह मुख्यमन्त्री की नियुक्ति करता है और मुख्यमन्त्री की सलाह पर अन्य मन्त्रियों की नियुक्ति करता है।
- वह राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष ओर इसके सदस्यों की नियुक्ति करता है।
- आपातकाल में वह केन्द्र के एजेन्ट के रुप मे कार्य करता है।
वित्तीय शक्तियाँ
राज्य की विधानसभा में कोई भी धन विधेयक राज्यपाल की सिफारिश के बिना पेश नहीं किया जा सकता।
विवेकाधीन शक्तियाँ
- वह यह निर्णय करता है कि राज्य सरकार को संविधान की व्यवस्था के अनुरुप चलाया जा सकता है या नही।
- यदि वह महसूस करता है कि इसे नही चलाया जा सकता है, तो वह अनुच्छेद 356 (1) के अन्तर्गत राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेज सकता है।

