68500 Assistant Teacher Bharti Hindi Varnamala Viraam Chinh Study Material in Hindi

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हिन्दी भाषा (Hindi Language)

व्याकरण (Grammar)

हिन्दी वर्णमाला, विराम चिन्ह

(Hindi Alphabet, Punctuation)

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अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

Very Short Question Answer

 

प्रश्न – वर्ण किसे कहते हैं?

उत्तर – वर्ण या अक्षर उस ध्वनि को कहते हैं जिसके टुकड़े नहीं हो सकते हैं।

प्रश्न -वर्णमाला किसे कहते हैं?

उत्तर –अक्षरों या वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।

प्रश्न -हिन्दी वर्णमाला में कितने वर्ण हैं?

उत्तर – मूल रुप से हिन्दी वर्णमाला में 52 वर्ण होते हैं, जिसमें 11 स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ) 35 व्यंजन [क वर्ग- क, ख, ग, घ, ड.; च वर्ग- च, छ, ज, झ, ञ; ट वर्ग- ट, ठ, ड (ड़), ढ (ढ़), ण (यहाँ ड़ तथा ढ़ द्विगुण व्यंजन हैं), त वर्ग- त, थ, द, ध, न; प वर्ग- प, फ, ब, भ, म, अंतस्थ- य, र, ल, व तथा ऊष्म-श, ष, स और ह] तथा 4 संयुक्त व्यंजन [क्ष (क् + ष), त्र (त् + र), ज्ञ (ज् + ञ) तथा श्र (श् + र)] हैं। इनके अतिरिक्त 2 अन्य अं तथा अ: अनुस्वार एवं विसर्ग हैं।

प्रश्न -स्वर किसे कहते हैं?

उत्तर – स्वर वे ध्वनियाँ हैं जिनके उच्चारण में श्वास का अवरोध नहीं होता अर्थात् जिसके उच्चारण में हवा बिना किसी रुकावट के मुँह से निकलती है।

प्रश्न -स्वर के कितने भेद हैं?

उत्तर – स्वर का वर्गीकरण निम्न प्रकार से किया जाता है-

उच्चारण की मात्रा या अवधि के आधार पर – हृस्व स्वर, दीर्घ स्वर, प्लुत स्वर अथवा त्रिमात्रिक स्वर।

अनुनासिकता के आधार पर – अनुनासिक स्वर, निरनुनासिक स्वर।

प्रश्न -कंठ्य ध्वनि व्यंजन कौन-से हैं?

उत्तर – कंठ्य व्यंजन हैं- क, ख, ग, घ, ड., ह (गले से)।

प्रश्न -जिह्वामूलीय ध्वनि व्यंजन कौन-से हैं?

उत्तर – जिह्वामूलीय ध्वनि हैं- क, ख, ग, (गले से थोड़ा नीचे)।

प्रश्न -तालव्य ध्वनि व्यंजन कौन-से हैं?

उत्तर – तालव्य ध्वनि हैं- च, छ, ज, झ, ञ, य, श (तालु से)।

प्रश्न -मूर्धन्य ध्वनि व्यंजन कौन-से हैं?

उत्तर – मूर्धन्य ध्वनि व्यंजन हैं- ट, ठ, ड, ढ़, ष (मूर्धा से)।

प्रश्न -दंत्य ध्वनि व्यंजन कौन-से हैं?

उत्तर – दंत्य ध्वनि व्यंजन हैं- त, थ, द, ध, न (दाँतों से)।

प्रश्न -वर्त्स्य ध्वनि व्यंजन कौन-से हैं?

उत्तर – वर्त्स्य ध्वनि व्यंजन हैं- स, ज, र, ल(दंत मूल से, जहाँ ऊपर का मसूड़ा व दाँत मिलते हैं।)

प्रश्न -ओष्ठ्य ध्वनि वयंजन कौन-से हैं?

उत्तर – ओष्ठ्य ध्वनि व्यंजन हैं- प, फ, ब, भ, म (दोनों होंठो से)।

प्रश्न -दंतोष्ठ्य ध्वनि व्यंजन कौन-से हैं?

उत्तर – दंतोष्ठ्य ध्वनि व्यंजन हैं-  व, फ (निचले होंठों और ऊपर के दाँतों से)।

प्रश्न -नासिका ध्वनि व्यंजन कौन-से हैं?

उत्तर – नासिका ध्वनि व्यंजन हैं- ड., ञ, ण, न, म(मुख और नासिका दोनों से प्रत्येक वर्ग का अंतिम वर्ण)।

प्रश्न -अल्पप्राण व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – अल्पप्राण व्यंजन वे व्यंजन हैं, जिनके उच्चारण में वायु की मात्रा कम होती है, जैसे- क, ग, ड., च, ज, ञ, ट, ड, ण, त, द, न, प, ब, म अर्थात् वर्गों के प्रथम, तृतीय तथा पंचम वर्ण। इनके अतिरिक्त ड़, य, र, ल, व भी अल्पप्राण व्यंजन हैं।

प्रश्न -महाप्राण व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – महाप्राण व्यंजन वे व्यंजन हैं, जिनके उच्चारण में श्वास की मात्रा अधिक होती है, जैसे- ख, घ, छ, झ, ठ, ढ, ध, फ, भ अर्थात वर्गों के द्वितीय और चतुर्थ व्यंजन। इनके अतिरिक्त ह भी महाप्राण हैं।

प्रश्न -अघोष व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – जिन ध्वनियों के उच्चारण में स्वरतंत्रियों में कंपन नहीं होता, जैसे- क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ (वर्गों के प्रथम और द्वितीय वर्ण)। इनके अतिरिक्त क़ ख़ फ़ श ष स भी अघोष व्यंजन हैं।

प्रश्न -सघोष व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – जिन ध्वनियों के उच्चारण में स्वरतंत्रियों में कंपन होता है, जैसे- ग, घ, ड., ज, झ, ञ, ड, ढ, ण, द, ध, न, ब, भ, म (वर्गों के तृतीय, चतुर्थ, पंचम वर्ण)। इनके अतिरिक्त र, ल, व, ह भी सघोष व्यंजन हैं।

प्रश्न -स्पर्श व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – जिन व्यंजनों क् उच्चारण में एक उच्चारण अवयव दूसरे उच्चारण अवयव का स्पर्श मात्र करता है, उन्हें स्पर्शी कहते है, जैसे- क, ख, ग, घ, ड., ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म।

प्रश्न -स्पर्श संघर्षी व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – जिन व्यंजनों के उच्चारण में एक उच्चारण अवयव दूसरे उच्चारण अवयव को इस प्रकार स्पर्श करता है कि श्वास कुछ संघर्ष (रगड़) के साथ निकलती है, उन्हें स्पर्श संघर्षी कहते हैं, जैसे-च, छ, ज, झ, ञ।

प्रश्न -संघर्षी व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – जिन व्यंजनों के उच्चारण में श्वास रगड़ खाकर निकलती है और रगड़ के कारण श्वास में कुछ ऊष्मा उत्पन्न होती है। उन्हें संघर्षी व्यंजन कहते हैं। इन्हें ऊष्म ध्वनियाँ भी कहते हैं। जैसे-श, ष, स, ह। ख़, ग़, ज़, फ़, भी संघर्षी ध्वनियाँ हैं।

प्रश्न – अंतस्थ व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – जिन व्यंजनों के उच्चारण में श्वास का अवरोध बहुत ही कम होता है, उन्हें अंतस्थ कहते हैं। य, र, ल, व अंतस्थ व्यंजन हैं।

प्रश्न -प्रमुख विराम चिन्ह कौन-कौन से हैं?

उत्तर – प्रमुख विराम चिन्ह निम्नलिखित हैं :-

विराम चिन्ह का नाम

संकेत चिन्ह

पूर्ण विराम (Full Stop)

अर्द्ध-विराम (Semi-Colon)

;

अल्प-विराम (Comma)

,

उप-विराम (Colon)

:

प्रश्नवाचक चिन्ह (Sign of Interrogation)

?

योजक चिन्ह (Hyphen)

उद्धरण चिन्ह (Inverted Commas)

‘—’ या “—”

रेखिका या निर्देशक-चिन्ह (Dash)

विवरण चिन्ह (Colon + Dash)

:-

त्रुटिपूरक चिन्ह (Sign of Loftword)

^

संक्षेप सूचक चिन्ह (Abbreviation)

.

लोप-निर्देश

…..
समानता सूचक (Equal)

=

कोष्ठक (Bracket)

[] {} ()

विस्मयसूचक या सम्बोधक (Sign of Exclamation)

!

 

प्रश्न -पूर्ण विराम चिन्ह को स्पष्ट करें।

उत्तर – पूर्ण विराम का अर्थ है पूरी तरह से रुकना या ठहरना। सामान्यत: यह किसी कथन के पूर्ण होने पर अप्रत्यक्ष प्रश्नों के अंत में तथा कविता में छंद के चरण के अंत में आता है; जैसे—

  1. विस्मयादिबोधक तथा प्रश्नवाचक वाक्यों को छोड़कर प्रत्येक वाक्य के समाप्त होने पर; जैसे— राम अच्छा लड़का है। उसे जाने दो।
  2. अप्रत्यक्ष प्रश्नों के अंत में; जैसे— तुम्हें क्या बताऊँ कि मैं क्या चाहता हूँ।
  3. छंद के अंत में; जैसे—

रघुकुल रीति सदा चलि आई।

प्राण जाय पर वचन न जाई।।

4. कभी-कभी किसी व्यक्ति या वस्तु का सजीव वर्णन करते समय वाक्यांशों के अंत में पूर्ण विराम का प्रयोग होता है; जैसे— प्रशस्त ललाट। पानीदार बड़ी-बड़ी आँखें। सिर के बाल न अधिक बड़े, न अधिक छोटे।

प्रश्न -पूर्ण विराम चिन्हों का प्रयोग कहां नहीं करना चाहिए?

उत्तर – जब एक वाक्य का सम्बन्ध दूसरे वाक्य से हो; तो वहा पूर्ण विराम का प्रयोग नहीं करना चाहिए। जैसे— मैं मनुष्य में मानवता देखना चाहता हूँ, उसे देवता बनाने की मेरी इच्छा नहीं है।

प्रश्न -अर्द्ध विराम चिन्ह का प्रयोग कब किया जाता है?

उत्तर – जहाँ पूर्ण विराम से कुछ कम और अल्प विराम से कुछ अधिक रुकने की आवश्यकता हो, वहाँ अर्द्ध विराम का प्रयोग होता है; जैसे— डटकर परिश्रम करो;  सफलता अवश्य मिलेगी।

प्रश्न -अल्प विराम चिन्ह का प्रयोग कब किया जाता है?

उत्तर – हिन्दी व्याकरण में अल्प विराम सर्वाधिक प्रयुक्त होने वाला विराम चिन्ह है। अल्प विराम का अर्थ ही होता है, थोड़ी देर के लिए रुकना या ठहरना। जहाँ हम क्षण भर के लिए रुकते हैं वहाँ हम अल्प विराम का प्रयोग करते हैं।

प्रश्न -उप विराम का प्रयोग कहाँ किया जाता है?

उत्तर – उप विराम का प्रयोग बहुधा शीर्षकों में होता है; जैसे—कामायनी : एक अध्ययन

प्रश्न -प्रश्नवाचक चिन्ह को स्पष्ट करें।

उत्तर – जब वाक्य में क्या, क्यों, आदि शब्दों का प्रयोग हो, तो वहाँ प्रश्नवाचक चिन्ह का प्रयोग करते हैं; जैसे— तुम रोज सुबह कहाँ जाते हो?

अनिश्चय की स्थिति उत्पन्न होने पर; जैसे— आप शायद दिल्ली के रहने वाले हैं?

व्यंग्योक्ति होने पर; जैसे— आतंकवाद ही सर्वश्रेष्ठ जन सेवा है; है न?

प्रश्न -योजक चिन्ह का प्रयोग कहां नहीं करते हैं?

उत्तर – जहाँ योजक चिन्ह का प्रयोग निम्नलिखित स्थानों पर नहीं करते हैं—

  1. कर्मधारय समास से बने शब्दों में योजक चिन्ह का प्रयोग नहीं करते हैं।

यह निम्नलिखित उदाहरणों से स्पष्ट हो जाता है—

अशुद्धशुद्ध
डाक-गाड़ीडाकगाड़ी
धर्म-शालाधर्मशाला
कर-पल्लवकरपल्लव
विद्या-धनविद्याधन
रजत-कंकणरजतकंकण
कमल-नयनकमलनयन

2. अव्ययीभाव समास में योजक चिन्ह का प्रयोग नहीं करते हैं; जैसे-

अशुद्धशुद्ध
यथा-शक्तियथाशक्ति
पहले-पहलपहलेपहल
रात-भररातभर
मुँहा-मुंहमुँहामुंह

3. द्विगु समास से बने सामासिक पदों में योजक चिन्ह का प्रयोग नहीं करते हैं; जैसे-

अशुद्धशुद्ध
नव-ग्रहनवग्रह
पंच-वटीपंचवटी
त्रि-भुवनत्रिभुवन
चौ-मासाचौमासा
सत-सईसतसई
सप्त-लोकसप्तलोक

 

प्रश्न -उद्धरण चिन्ह के कितने भेद हैं?

उत्तर – उद्धरण चिन्ह के दो भेद हैं— इकहरा (‘ ’) और दोहरा (“ ”)।

प्रश्न -दोहरे उद्धरण चिन्ह का प्रयोग कहाँ-कहाँ करते हैं?

उत्तर – जहाँ किसी पुस्तक से कोई वाक्य या अवतरण ज्यों-का-त्यों उद्धृत किया जाए, वहाँ दोहरे उद्धरण चिन्ह का प्रयोग होता है और जहाँ कोई विशेष शब्द, पद, वाक्य-खंड इत्यादि उद्धृत किए जाएं वहाँ इकहरे उद्धरण लगते हैं; जैसे-

“स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है।”

(ii) संधि, कहावत तथा महत्वपूर्ण कथन आदि को उद्धृत करने में दोहरे उद्धरण चिन्ह का प्रयोग होता है; जैसे—

गीता का वचन है, “कर्म करो किन्तु फल की इच्छा न करो।”

प्रश्न -इकहरे उद्धरण चिन्ह का प्रयोग कहां करते हैं?

उत्तर – लेखक का उपनाम, पुस्तक, समाचार-पत्र, लेख का शीर्षक इत्यादि उद्धृत करते समय इकहरे उद्धरण चिन्ह का प्रयोग करते हैं; जैसे-

‘दैनिक जागरण’ एक राष्ट्रीय दैनिक समाचार-पत्र है।

प्रश्न -रेखिका या निर्देशक चिन्ह का प्रयोग कहां करते हैं?

उत्तर – रेखिका चिन्ह का प्रयोग संकेत के लिए होता है; जैसे — शब्द के दो भेद होते हैं— सार्थक और निरर्थक।

प्रश्न -त्रुटिपूरक चिन्ह का प्रयोग कहाँ करते हैं?

उत्तर – त्रुटिपूरक को हंसपद भी कहा जाता है। जब लिखने में कुछ छूट जाता है, तो इसका प्रयोग करते हैं; यथा-

गोदान

प्रेमचंद का ^ ग्राम्य जावन की सजाव झांकी प्रस्तुत करता है।

प्रश्न -संक्षेप सूचक चिन्ह का प्रयोग कहां करते हैं?

उत्तर – शब्दों का संक्षिप्त रुप दिखने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है; जैसे- बी.बी.सी. (ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन), सं. (संवत्), कृ.प.उ. (कृपया पन्ना उलटिए), डॉ. (डॉक्टर)

प्रश्न -लोप निर्देश का प्रयोग कहां करते हैं?

उत्तर – जब पूर्व बात की पुरुक्ति करनी होती है, तो उस बात को आरंभ के दो-तीन शब्द लिखकर बीच में (…..) ‘लोप चिन्ह’ दे दिए जाते हैं।

प्रश्न -समानता सूचक चिन्ह का प्रयोग कहां करते हैं?

उत्तर – समानता सूचक चिन्ह गणित में अधिक प्रयुक्त होता है किंतु संक्षिप्तता के आग्रह से कभी-कभी सामान्य भाषा में भी इसका प्रयोग करते हैं, जैस-रात्रि=निशा, दिवस=दिन

प्रश्न -विस्मयसूचक या संबोधक (!) चिन्ह का प्रयोग कहां करते हैं?

उत्तर – (i) यह चिन्ह विस्मय (आश्चर्य आदि) का बोध कराने वाले दो पद बंधों अथवा वाक्यों अंत में आता है; जैसे-अहा! कितना सुहाना मौसम है।

(ii) सम्बोधन के लिए – श्याम! अब तुम पढ़ो।

(iii) जहां अपने से छोटों के प्रति शुभकामनाएं और सदभावनाएं प्रकट की जाएं- पुत्र चिरंजीवी हो! भगवान तुम्हारा भला करे।

(iv) जहां मन की हंसी-खुशी व्यक्त की जाए; जैसे- कैसा निखरा रुप है। वाह! तुमने क्या रुप पाया है।

प्रश्न -भाषा की सबसे छोटी इकाई है-

उत्तर – भाषा की सबसे छोटी इकाई ध्वनि है। ध्वनि को ही ‘वर्ण’ कहते हैं।

प्रश्न -‘पंचानन’ शब्द में अनुस्वार किस ध्वनि के स्थान पर प्रयुक्त किया गया है?

उत्तर – अनुस्वार स्वर के बाद आने वाला अयोगवाह है जो न तो स्वर है और न व्यंजन है, जिनकी ध्वनि नाक से निकलती है। ‘पंचानन’ शब्द में अनुस्वार ञ् के स्थान पर प्रयुक्त किया गया है।

प्रश्न -क़, ग़, ज़, फ़ ध्वनियाँ किसकी हैं?

उत्तर – क़, ग़, ज़, फ़ ध्वनियाँ अरबी-फारसी से उत्पन्न हुई हैं।

प्रश्न -व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – स्वरों की सहायता से बोले जाने वाले वर्ण व्यंजन कहलाते हैं।

प्रश्न -व्यंजन कितने होते हैं?

उत्तर – परम्परागत रुप से व्यंजनों की संख्या 33 मानी जाती है। द्विगुण व्यंजन ड़, ढ़ को जोड़ देने पर इनकी संख्या 35 हो जाती है।

प्रश्न -कंठ्य ध्वनियाँ किसे कहते हैं?

उत्तर – जिन व्यंजनों का उच्चारण करते समय हवा कंठ से निकलती है, उन्हें कंठ्य ध्वनियाँ कहते हैं। इसके अंतर्गत क वर्ग के व्यंजन आते हैं।

प्रश्न -मूर्धन्य व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर – मूर्धन्य व्यंजन वे व्यंजन होते हैं, जिनका उच्चारण करते समय वायु मूर्धा से निकलती है (मुँह के ऊपरी भाग के अग्र भाग से) इसके अंतर्गत ट वर्ग वाले व्यंजन (ट, ठ, ड, ढ, ण) आते हैं।

प्रश्न -‘श’,‘ष’,‘स’,‘ह’ किस प्रकार के व्यंजन हैं?

उत्तर – जिन व्यंजनों के उच्चारण में श्वास रगड़ खाकर निकलती है और रगड़ के कारण श्वास में कुछ ऊष्मा होती है, उन्हें संघर्ष स्पर्शी अथवा ऊष्म व्यंजन कहते हैं। जैसे-श, ष, स, ह। ख़, ग़, ज़, फ़, भी संघर्षी ध्वनियाँ हैं।

प्रश्न -हिन्दी में स्वतंत्र रुप से बोले जाने वाले अक्षर क्या कहलाते हैं?

उत्तर – जिन वर्णों का उच्चारण बिना विघ्न-बाधा के है तथा किसी वर्ण की सहायता से किया जाता है, स्वर कहलाते हैं।

प्रश्न -जिन शब्दों के अंत में ‘अ’ आता है, उन्हें क्या कहते हैं?

उत्तर – जिन शब्दों के अंत में ‘अ’ आता है, उन्हें अकारांत कहते हैं। जैसे- बालक, राम, श्याम आदि।

प्रश्न -हिन्दी भाषा में कौन-सी ध्वनियाँ हैं, जो दूसरी ध्वनियों की सहायता से बोली या लिखी जाती हैं?

उत्तर – व्यंजन का उच्चारण स्वरों की सहायता से किया जाता है। प्रत्येक व्यंजन के उच्चारण में ‘अ’ की ध्वनि छिपी रहती है।

प्रश्न -‘ज्ञ’ किन वर्णों के संयोग से बना है?

उत्तर – ज्ञ, ज् + ञ के संयोग से बना है, इसे संयुक्त वर्ण कहते हैं।

प्रश्न -विराम का अर्थ है-

उत्तर – विराम का शाब्दिक अर्थ विश्राम या आराम करना होता है। इसे ठहराव भी कहते हैं।

प्रश्न -पूर्ण विराम का प्रयोग कहां किया जाता है?

उत्तर – पूर्ण विराम का प्रयोग वाक्य के अंत में किया जाता है।

प्रश्न -हिन्दी व्याकरण में सर्वाधिक रुप से प्रयोग होने वाला विराम चिन्ह कौन सा है?

उत्तर – हिन्दी व्याकरण में सर्वाधिक रुप से अल्प विराम (,) का प्रयोग होता है।

प्रश्न -दो शब्दों को जोड़ने के लिए कौन-सा चिन्ह प्रयोग किया जाता है?

उत्तर – दो शब्दों को जोड़ने के लिए योजक चिन्ह (-) का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न -उद्धरण चिन्ह का प्रयोग कब किया जाता है?

उत्तर – जब किसी पुस्तक से कोई वाक्य या किसी का कथन ज्यों-का-त्यों उद्धृत कर लिया जाता है, तो वहाँ उद्धरण चिन्ह का प्रयोग होता है।

प्रश्न -अहा _ _ _ कितना सुंदर पुष्प खिला है। रिक्त स्थान पर कौन सा चिन्ह प्रयोग करना उचित होगा?

उत्तर – जब वाक्य में आश्चर्य या विस्मय का बोध हो, तो वहाँ पर विस्यमबोधक चिन्ह (!) का प्रयोग किया जाता है। उपर्युक्त वाक्य में विस्मय का बोध हो  रहा है।

प्रश्न -निर्देशक चिन्ह या रेखिका का प्रयोग किया जाता है।

उत्तर – निर्देशक चिन्ह या रेखिका का प्रयोग संकेत के लिए किया जाता है। यथा-शब्द के दो भेद हैं- सार्थक और निरर्थक।

प्रश्न -संक्षिप्त रुप दिखाने के लिए किस चिन्ह का प्रयोग किया जाता है?

उत्तर – जब शब्दों का संक्षिप्त रुप लिखना होता है, तो शब्द का पहला अक्षर के बाद संक्षेपण चिन्ह (.) का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न -दिवा-दिवस में रिक्त स्थान पर उचित चिन्ह का प्रयोग कीजिए।

उत्तर – जब पहले शब्द तथा दूसरे शब्द का अर्थ एक ही हो, तो वहाँ समानता सूचक (=) चिन्ह का प्रयोग किया जाता है। रिक्त स्थान पर = चिन्ह का प्रयोग होगा।

प्रश्न -लोप निर्देश (——–) का प्रयोग कहाँ किया जाता है?

उत्तर – जब पूर्व बात की पुरुक्ति करनी हो, तो उस बात को आरंभ के दो-तीन शब्द लिखकर बीच में लोप चिन्ह (——-) का प्रयोग करते हैं।

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