DOEACC CCC Digital Financial Services Study Material Notes in Hindi and English

DOEACC CCC Digital Financial Services Study Material Notes in Hindi and English:- इस पोस्ट में आपकों मिलेगीं CCC डिजिटल वित्तीय सेवाएँ (Digital Financial Services) Study Material Notes, DOEACC CCC बैकिंग उत्पाद (Banking Products) Study Material Notes Hindi and English, CCC लोन तथा ओवर ड्राफ्ट के प्रकार (Types of Loans and Overdrafts) Study Material in Hindi, CCC बैंकिंग सेवा डिलीवरी चैनल (Banking Service Delivery Channel) Study Material Notes in Hindi, DOEACC CCC बैंक मित्र (Bank Mitra) Study Material Notes in Hindi,

DOEACC CCC डिजिटल वित्तीय सेवाएँ  (Digital financial Services) Study Material Notes in Hindi

डिजिटवल वित्तीय सेवाएँ वो वित्तीय सेवाएँ होती है, जिन्हें डिजिटल चैनलों के द्वारा एक्सेस किया जाता है। ये डिजिटल चैनलों ग्राहकों तथा सेवा दाताओं की लागतों में भारी कमी करते हैं तथा सुगमता से वित्तीय सेवाएँ दूरस्थ ताथा वंचित लोगों तक पहुँचा सकते हैं। ये चैनल 24X7X365 सेवाएँ प्रदान करते हैं।

Digital Financial Services are the services than can be accessed and delivered through digital channels, including payments, credit, savings, remittances and insurance. DFS can play an important role in financial inclusion also.

The main objective of digital fincancial services is to delivering financial services through technological innovations like mobile phones. These channels provide their services 24 x 7 x 365.

CCC बचत के लाभ (Need of Savings) Study Material Notes in Hindi

हम जानते हैं कि बचत के कई लाभ हैं, किन्तु बचत न करने के दुष्परिणामों को भी समझने की आवश्यकता है।

बचत से भविष्य में होने वाली किसी दुर्घटना में यह हमारे काम आती है।

किसी आपातकाल की स्थिति में बचत किसी व्यक्ति या परिवार को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।

जीवन के कुछ बड़े ऐसे खर्चे होते हैं जिन्हें पूरा करना आवश्यक होता है।

DOCECC CCC घर पर नकदी रखने के नुकसान (Drawbacks of keeping cash at Home) Study Material Notes in Hindi

नकदी को बैंक में रखना अधिक लाभदायक होता है। घर पर नकदी रखने से लाभ नहीं मिलता साथ ही साथ घर पर नकदी रखने के कुछ नुकसान भी हैं, जिनमें से कुछ निन्मलिखित है-

असुरक्षा (Lack of Safety) अरनी नकदी को बैंक से निकालकर घर पर रखने में यह फायदा हैं कि आप अपने पैसों को अपने घर पर छुपाकर रख सकते हैं और जब जरूरत हो तो उसका प्रयोग कर सकते हैं, पर नकदी को घर पर रखने का यह नुकसान हैं कि उसकी चोरी हो सकती है।

When people have extre cash, many people carry it around in therir wallet, place it in their homes. Unfortunately, all of these strategies put their money at risk. Those who carry their cash around can loose it if their money at home can find themselves without any savings if their house gets burglarized or damaged in a fire.

विकास के अवसर खोना (Loss of Growth Opportunities) अपने पैसों को घर पर रखने का सबसे बड़ा नुकसान यह हैं क हम विकास के अवसर खो देते हैं, क्योंकि इस पर हम कोई ब्याज नहीं कमा पाते। यदि हम पैसों को बैंक में रखें तो हमें एक निश्चित रमक ब्याज के रूप में मिलती है, जिसे जरूरत पड़ने पर हम उययोग कर सकते हैं।

Another reason why you shouldn’t be hiding money in your house is because youyou earn on interest on it. While banks are exactly paying rupees on their high interest savings accounts.

कोई साख योग्यता नहीं (No Credit Eligibility) साख योग्यता का अर्थ है कि बैंक में बचत के कारण अन्य फायदों का लाभ उठाना जैसे- डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, ATM की सुविधा, ऋण की सुविदा आदि। घर नकदी रखने पर इन सभी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता।

After keeping cash at home, you can not get any credit/debit cards, ATM facility on theat cash When you put money in the bank it s protected by the different deposit insurance by different methods.
बैंकों का आवश्यकता (Need of Banks) बैंक उस वित्तीय संस्थान कहते हैं, जो जनता से धनराशि जमा करने तथा जनता को ऋण देने का काम करती है। लोग अपनी अपनी बचत राशि को सुरक्षा की दृष्टि से अथवा ब्याज कमाने हेतु इन संस्थाओं में जमा करते और आवश्यकतानुसार समय समय पर निकालने रहते हैं। बैंक इस प्रकार जमा से प्राप्त राशि को व्यापारियों एवं व्यवसायियों को ऋण देकर ब्याज कमाते हैं। आर्थिक आयोजन के वर्तमान युग में कृषि, उद्दोग एवं व्यापार के विकास के लिए बैंक एवं बैंकिग व्यवस्था एवं अनिवार्य आवश्यकता मानी जाती है। राशि जमा रखने तथा ऋण प्रदान करने के अतिरिक्ति बैंक अन्य काम भी करते हैं, जैसे

सुरक्षा के लिए लोगों से उनके आभूषण आदि बहुमूल्य वस्तुएँ जमा रखना।

अपने ग्राहकों के लिए अनेक चेकों का संग्रहण करना।

व्यापारिक बिलों की कटौती करना।

एजेन्सी का काम करना

गुप्त रीति से ग्राहकों की आर्थिक स्थिति की जानकारी लेना या देना

There are various needs of banks, some of them are

बचत की आदत रखना (Inculcate the habit of Saving) यह बैंकिग से होने वाले लाभ का सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक है। बैकिंग से लोगों को बचत की आदत लगती है, जोकि भविष्य के लिहाज से लाभदायक है।

Once we open account in bank, it becomes our habit to save the money. This is done when we go to bank and deposit our money.

धन की सुरक्षा तथा लोन और ब्याज लेना (Money Security and getting loans and Interest) बैंक में रखा हमारा धन सुरक्षा की दृष्टि से बैंक का दायित्व हो जाता है कि उसकी सारी सुरक्षा बैंक करेंगा। इसके लिए बैंक अलग से बजट बना कर इसकी व्यवस्था करता है। समय समय पर हम बैंक से ऋण का लाभ भी उठा सकते हैं, जोकि हमें धीरे धीरे लौटना होता है। यदि हम अपना पैसा बैंक में रखें तो इस प्रकार बैंक हमारी मुसीबत के समय भी काम आ सकते हैं।

Storing all your money in cash at home just isn’s safe. When you put money in banks it becomes banks responsibility to secure your money.

Banks spends so much to provide security to your money. Not only security but banks also give interest amount on the amount deposited by us as a customer. It makes our money grow monthly without any extra effort. Besides this, if we have a good credibility with our banks, we can get loan amount from banks in our financial emergencies.

DOEACC CCC पैसे का लेन देन (Cash Transactions) Study Material Notes in Hindi

पैसों के जमा व निकालने के अलावा बैंक का एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि ग्राहक के बिना बैंक में गए वह अपने पैसे किसी र को दे सकता है या अपने लिए निकलवा सकता है। इसके लिए बैंक अपने ग्राहकों को चैक की सुविधा प्रदान करता है। बैंक गए बिना पैसे के स्थानान्तरण के लिए बैंक NEFT और RTGS जैसे तीव्र सुविधाएँ भी प्रदान करता है। डिमाण्ड ड्राफ्ट या डी डी की सुविधा लगभग हर बैंक में उपलब्ध है। यह पैसे को सुरक्षित करके किसी और तक पहुँचाने का सर्वोत्तम उपाय है।

Apart from accepting deposits and lending money, banks also carry out, on behalf of their customers, the act ot transfer of money – both domestic and foreign from one place to another. Bqanks issue demand drafts, banker’s Cheques, Money Orders for transferring the money. Banks also have the facility of quick transfer of money also know as NEFT and RTGS.

बैंकिंग उत्पाद (Banking Products) खातों के प्रकार (Types of Accounts) ये निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

बचत खाता (Saving Account) इस प्रकार का खाता प्राय: उन व्यक्तियों के लिए उपयुक्त होता है, जो कभी कभी तथा बहुत छोटी छोटी मात्राओं में रूपया जना करना या निकालना चाहते हैं। बचत खाता मुख्यत: निश्चित एवं कम आय वाले गृहस्थों की सुविधा के लिए तथा उनमें धन संचय की प्रवृत्ति जाग्रत करने के लिए खोला जाता है। इस प्रकार के खातों में से आवश्यकतानुसार जितनी बार चाहे रूपया निकाला जा सकता है, इसमें भी जमा की कोई निश्चित अवधि नहीं होती। इस खाते में रकम जमा करने पर कोई प्रतिबन्ध नहीं हैं, लेकिन जमा की अधिकतम सीमा निश्चित है।

A deposit saving account held at a bank provides principal security and a modest interest rate. This account is best for small savings. Depending on the specific type of savings account, the account holder may not be able to write cheques from the account (without incurring extra fees or expenses) and the account is likely to have a limited number of free transfers/transactions. Saving account funds are considered one of the most liquid investments outside of demand accounts and cash.

चालू खाता (Current Account) इस खाते में जमा करने वालों को अधिकार है कि वे अपनी इच्छानुसार धन को निकाल एवं जमा कर सकते हैं। बैंक इस प्रकार के खातों पर जमा हेतु ब्याज नहीं देते एवं एक निश्चित राशि से कम जमा पर जमाकर्ता में व्यय वसूल करते हैं। ये खाते ज्यादातर व्यापारियों द्वारा खोले जाते हैं।

A bank deposit account that supports regular money transactions related to a business. This account is suitable for business purpose. The current account is an important indicator about an economy’s health. It is defined as the sum of the balance of trade (goods and services), net income from abroad and net current transfers.

आवर्ती जमा खाता (Recurring Account) इस प्र्कार के खातों में, एक निश्चित रशि प्रतिमाह, एक निश्चित अवधि के लिए चजमा कराई जाती है, बिना किसी असाधारण परिस्थिति के इसमें से रकम को, निश्चित अवधि के पूर्ण होने से पहले निकाला नहीं जा सकता। इस पर दिया जाने वाला ब्याज, जमा खाते की तुलना में अधिक होता है

आवर्ती जमा खाते की अवधि 6 महीने से लेकर 10 साल तक हो सकती है।

Recurring Deposit a special kind to term deposit offered by banks in India which help people with regular incomes to deposit a fixed Deposits. This deposit matures on a specific date in the future along with all the deposits made every month. Minimum period of RD is 6 Months and maximum is 10 years.

इन खातों के अतिरिक्त भी कुछ अन्य खातों के प्रकार होते हैं, जैसे- नकद साख खाता तथा स्थायी खाता।

चालू खाता एवं बचत खाता में अन्तर (Difference between Current Account and Saving Account)

अन्तर का आधार चालू खाता बचत खाता
जमा की अवधि निश्चित अवधि नहीं निश्चित अवधि नहीं
जमा पर प्रतिबन्ध कोई प्रतिबन्ध नहीं है। कोई प्रतिबन्ध नहीं हैं, लेकिन अधिकतम सीमा निश्चित है।
रकम निकालना कोई प्रतिबन्ध नहीं। बैंक के नियमानुसार रकम निकाली जा सकती है।
ब्याज बैंक ब्याज नहीं देता है। इस खाते में ब्याज मिलता है।
उददेश्य इस खाते का उददेश्य व्यापारियों एवं उद्दोग- पतियों की रकम जमा करने तथा निकालने की सुविधा प्रदान करना है। इस खाते में लोगों को बचत करने की आदत बढ़ती है।  

लोन तथा ओवर ड्राफ्ट के प्रकार (Types of Loans and Overdrafts)

बैकों के कई महत्वपूर्ण कार्यों में से एक कार्य ऋण देना भी है। बैंक अपने ग्राहकों, उत्पादकों व्यापारियों आदि को विभिन्न प्रकार की जमानतों पर ऋण देते हैं, ये ऋण अचल सम्पत्तियाँ व्यक्तिगत जमानत के आधार पर नहीं दी जाती।

वाणिज्यिक बैंक निम्नलिखित प्रकार के ऋण देते हैं-

ओवर ड्राफ्ट (OD) चालू खाता वाले जमाकर्ता को उनके खाते में जमा रकम से अधिक राशि निकालने की सुविधा।

ऋण तथा अग्रिम (Debt and Loan)

विनियम पत्रों की कटौती (Retrenchment of Exchange Bills)

नकद साख (Cash Credit)

CCC DOEACC सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश (Investment in Public Securities) Study Material in Hindi and English

होम लोन (Home Loan) घर से सम्बन्धित जो लोन लिया जाता है, सामान्यत: होम लोन कहा जाता है। इसके अन्तर्गत घर खरीदना, घर बनाना, घर का पुनर्निर्माण इत्यादि आता है।

यह लोन निर्धारित ब्याज दर पर दिया जाता है। बैंक कुल लागत का 75 से 80% तक ऋण देती हैं। लोन चुकाने की अवधि 5 वर्ष से 20 वर्ष तक हो सकती है।

Loan taken for home related purposes is called is home loan. Home loans are taken by people for a variety of home-related purposes such as construction of home, home renovation, home extension, buying of property of land, of payment of stamp duties. Home loans comprise an adjustable or fixed interest rate and payment terms.

व्यक्तिगत लोन (Personal Loan) किसी व्यक्ति द्वारा अपने व्यक्तिगत उपयोग के लिए लिया गया लोन व्यक्तिगत लोन कहलाता है। यह लोन मुख्यत: कर्ज चुकाने के लिए, चिकित्सा उपचार के लिए, बच्चों की फीस भरने के लिए, यात्रा के लिए तथा विवाह सम्बन्धी गतिविधि इत्यादि के लिय़ लिया जाता है। व्यक्तिगत लोन का ब्याज दर प्रत्येक बैंक का अलग अलग होता है। यह लोन किसी व्यक्ति के व्यवसाय या पेशा के आधार पर दिया जाता है। व्यक्तिगत लोन चुकाने की अधिकतम अवधि 4 वर्ष तक होती है।

This type of lone is given to individuals after accessing their credentials based on their profession of business, or any other sources of income. The loan can be utilized for any purpose, for example, paying debt, marriage expenses or vacation expenditure. No collateral security is required for this type of loan.

शिक्षा ऋण (Education Loan) यह लोन विशेषकर उच्च शिक्षा एवं व्यावसायिक अध्यय के लिए दिया जाता है। यह लोन लेने के लिए गारण्टर (Guarenter) की आवश्यकता होती है, जो अभिभावक या कोई रिश्तेदार हो सकात है। यह देश के अन्दर एवं बाहर (Abroad) दोनों के लिए दिया जाता है। सामान्यत: देश के अन्दर पढ़ने के लिए दस लाख तथा विदेशी में पढ़ने के लिए बीस लाख दिया जाता है।

Required  by and provided to students who want to pursuer higher education in resident country or abroad. For this type of loan, a guarenter is necessary. Students should have an admission offer from an institution before they apply for an edition loan. The loan takes care of the fees of the institution including examination and library fees, travel expenses for abroad; cost of books and equipments required, any insurance for the student if applicable.

कॉर्पेरेट लोन (Corporate Loan) जब बैंक बड़े व्यावसायिक कम्पनियों को ऋण देता है तो वह कॉर्पोरेट लोन कहलाता है। की भी बैंक अपने कोर कैपिटल (Core Capital) का 55% तक किसी बड़ी कम्पनी को लोन दे सकती है।

Loan given to the corporate firms is known as corporate loan. A bank can allot only 55% of its core capital.

वाहन लोन (Vehicle Loan) व्यक्ति पुरानी या नई (Old and New) गाड़ी खरीदने के लिए बैंक से जो लोन लेता है, वह वाहन या कार लोन कहलाता है। दूसरे लोनों की तुलना में यह लोन आसानी से मिल जाता है।

Compared to other loans, it is easier and simpler to take vehicle loans. The interest rates vary from bank to bank based on their base rate. The repayment process involves monthely EMIs and early repayment options.

गोल्ड लोन (Gold Loan) आज के समय में सोने पर भी ऋण देने का चलन बढ़ा है। बैंक सोने को एक गारण्टी की तरह पने पास गिरवी रखकर अपने ग्राहकों को ऋण मुहैया करा रहे हैं। चूँकि इसमें सोने को गिरवी रखा जाता है इसलिए यह सर्वाधिक सुरक्षित लोन माना जाता है। विभिन्न बैकों के हिसाब से इसकी अवधि 1 से 2 वर्ष तक हो सकती है।

Gold loan is imparted only on providing gold as security to a bank or any other lending institution. It is considered as one of the safest methods as the loan amount is provided on the basis of the security submitted. Depending upon the bank, the tenure of gold loan varies from one day to two years.

ओवर ड्राफ्ट (Over Drafts) यह लोन का एक प्रकार होता है, जब बैंक खाते से उपलब्ध शेष राशि से अधिक राशि की निकासी (Withdraw) होती है तो यह प्रक्रिया ओवर ड्राफ्ट कहलाती है। वर ड्राफ्ट राशि तभी निकाली जाएगी, जब ग्राहक एवं बैंक के बीच कुछ नियमों एवं शर्तों (Terms and Conditions) पर सहमति होगी। उदाहरणस्वरूप आदि आपके चालू खाते (Current Account) में 10000 हो और आपने 20000 की निकासी किया हो (नियमों एवं शर्तों के अनुरूप) तो यह ओवर ड्राफ्ट का उदाहरण है।

An overdraft facility allows you to write cheques to withdraw cash from your current account up to the overdraft limit approved. It is repayable on demand by the bank at any time. The overdraft limit is the maximum amount that you can overdraw. You pay interest only on the amount that you overdraw.

इन ऋणों के अतिरिक्त भी कुछ ऋण होते हैं, जोकि बैंको द्वारा दिए जाते है, जैसे- सम्पत्ति ऋण (Property Loan)>

चेक तथा डिमाण्ड ड्राफ्ट को भरना (Filling Up the chedques and Demand Drafts)

चेक एक प्रकार से विनिमय हुण्डी (Bill of Exchange) होती है, जो एक निर्दिष्ट (विशिष्ट) बैंक के ऊपर आहरित होती है तथा माँग पर ही, जिसका भुगतान किया जाता है।

चेक में तीन पक्ष होते हैं-

भुगतान का आदेश देने वाला, आहर्ता (Drawer)

जिसका आदेश दिया जाता है (Drawee) अर्थात् बैंक

जो भुगतान प्राप्त करता है अर्थात् चेक का धारक (payee)

Follow these Steps to correctly fill up a cheque

Fill in the date This is called the date of issue. Mention the correct date in the top right column. It is day, month and year in figure. A cheque once is valid for the next 3 months.

Note Sometimes, a cheque may require a future date to be written on it. Such a cheque is called a postdated dcheque (PDC). This means that the cheque cannot be cashed until that day. People tend to write a postdated cheque because when they do not want it to be encased or deposited before a particular date. This is often used when one has to pay out a loan or a Monthly Instalment which will be paid out at a future date.

Write the name of the person/company (Payee) you want to address the cheque to.
Note Make sure you spel the name in the same way as sit a;ppears son the beneficiary’s account. It the name does not match, the cheque will not be valid for payment.

It is advisable to strike out or bearer at the end of the payee line.
Note this will ensure that the cheqe is encashed only the person it is addressed to and not to just anyone who holds it.

Write the amount to be paid in words along the rupees column. Striks a line after you fill in the amount in order to prevent any alteration.

Rewrite the exact same amount in figures within the abjacent box.
Note Say to pay a sum of 1000 Rupees, write One Thousand only (in words), 1000/- (in figures)ub tge vix.

Put your signature above your name to authorize the transaction. This should be the same dor closest likeness of the signature specimen you have submitted to your bank while opening your account.

The name and account number of the holder is usually already printed on the cheque leaf. If it is not, carefully write your name in  BLOCK letters and enter your Account Payee only written in the middle, on the top left corner of the cheque. This is called crossing out a cheque.
Note this means your cheque will be paid into the account of the person being paid and not to the person holding the cheque for payment at the counter. Follow this carefully to direct the amount transfer into the account of the right payee. It is an important step to safeguard your money.

To cancel a cheque mark CANCEL in bold across the face of the cheque and if possible, inform the bank officials of make a note of the chequr unmbeer and record it das cancelled.

Your should also mutilate the MICR code of your cancelled chequr or shred the whole chequr. You should additionally scratch out your signature on the cheque.

Some Points to Remenber

चेक भरते समय कुछ याद रखे जाने योग्य विशेष बिन्दु निम्नलिखित हैं-

अपने हस्ताक्षर (Signature) करने को बाद लेन-देन (Transaction) को पास (Approve) किया जाता है।

एमआईसीआर (Magnetic Ink Character Recognition) बैण्ड (Band) के ऊपर हस्ताक्षर (Signature) नहीं करें।

चेक भरते समय कभी-भी Overwrite एवं Cutting (काटना) नहीं करें।

चेक भरते समय तिथि (Date) डालना (Put) नहीं भूलें।

चेक का रिकॉर्ड रखें अर्थात् चेक का वह भाग जिसे किसी को देने के पश्चात् चेक के अग्र भाग में निहित होता है।

अब हमारे देश में भुगतान हेतु चेक उसके जारी करने की तारीख से 3 महीने के लिए वैध रहता है।

डिमाण्ड ड्राफ्ट भरना (Filling Demand Draft) डिमाण्ड ड्राफ्ट, चेक की ही तरह लेनदेन के लिए उपयोग किए जाने वाले माध्यमों में से ही एक माध्यम है, जिसका उपयोग भुगतान के लिए किया जा सकता है। किन्तु चेक का भुगतान धारक को भी किया जा सकता है। इसके द्वारा भुगतान करना सर्वाधिक सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसे जिसके लिए भुगतान करना होता है उसी के नाम से जारी किया जाता है।

A Demand Draft can also be Compared to a cheque. However, demand drafts are difficult to countermand. Demand drafts can only be made payable to specified party, also known as pay to order. But, cheque can also be made payable to the bearer. Follow these steps to correctly fill a Demand Draft (DD) application from for state Bank of india (SBI)

On reaching the branch get a Demand Draft/Banker’s Chequr Application form from the customer Help Desk Counter. It will look like the application form in the illustration above.

Fill in the application form. According to the guidelines given next.

Name of the Branch you are currently applying to for the demand Draft.

Put a tick mark on the Draft option to select it, since this is a dual form for Bankers Cheque too.

Write the current date.

As per WPC guidelinces, the DD is tb be made in favour of PAO (HQ), Dot , New Delhi

Fill in the amount (in words) for which you have to make the DD. For Grade II license it is Rs. 100 and for grade II license dit is 60 Please verify the amount as per current rules, before filling it in.

At the payble at field, fill in New Delhi

At the Payble At Branch field, fill in Service.

The applicants signature comes here

Write down your full name and sresidential address (preferably how it appears in your ASOC Application Form)

Fill in the amount of DD s(Either 60/100 as per requirement) and fill in the Exchange /Commission Amount (30 for amounts below 10000 as per http://www.statebankof.india.com/user.htm). Total it up in the Total field.

Signature of the receiver comes here. You may sign here beforehand, except if another person will be collecting it on your behalf.

Fill in the counter foil on the left side of the form

Write the current date.

Write down your full name as it appears on the main form.

As per WPC guidelines, the DD is to be made in favour of PAO (HQ), DoT, New Delhi

At the payable at/Branch field, fill in Service Branch, New Delhi.

Fill in the amount (in words) for which you have to make the DD. As per the new amendment, for General or Restricted Grade license, the fee is 1000 For 20 years or Rs. 2000 for lifetime license. Please verify the amount as per current rules, before filling it in.

Fill in the Amount on the DD (Either Rs. 1000/2000 as per requirement) and fill in the exchange/commission Amount (R 30 for amounts below 10000 as per http://www.statebankofindia.com/user.html). Total it up in the Total field.

Submit this application form at the apporopriate window. Your Demand Draft will be printed withim  minutes and given to you.

खाता खोलने के लिए आवश्यक दस्तावेज (Documents for Account Opening)

बैंक में खाता खोलने के लिए कुछ दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, जिनके द्वारा बैंक ग्राहक की असली पहचान उसके निवास स्थान, उम्र आदि को सत्यापित करता है। भारत सरकार द्वारा प्रमाणित ऐसे दस्तावेज जिन्हें एड्रेस प्रुफ या आइडेण्टीटी प्रुफ आदि के तौर पर मान्यता है।

ग्राहक को इन मूल दस्तावेजों के साथ साथ इनकी छायाप्रति फोटोकॉपी भी बैंक को प्रदान करनी होती है।

Passport

Aadhaar card issued by unique identification Authority of india (UIDAI)

Voeter ID Card

Aadhaar letter card issued by unique identification Authority of India (UIDAI)

Pension Payment Order/passbook/card issued by state/Central Govt. of India

Senior Citizen Card issued by State/Central Government

Defence Dependent Card or Discharge Book Issued by Cantonment Borad or Ex-Servicement Card issued by Zilla Sainik Board

Domicile Certificate with Communication Address, DOB/Age and Photograph issued by District Collector/Deputy Commissioner / District Magistrate or equal rank officer

Photo ID Card Issued by Central/State Government Departments, Central or State Govt. Undertakings, Defence, Public Sector Undertaking, Public Sector Banks, Reserve Bank of India

India, Securities and Exchange Borad of India, EXIM Bank. (Card issued to permanent employees)

Driving licence

Job card issued by NREGA duly signed by an officer of the state Government

Utility Bills (Electricity bill/Gas connection / Telephone Bill) not older than therr months

Consumer gas connection card/passbook along with receipt for gas supply not older than three months

Certificate from the post office confirming address of applicant, either on letter head or under office seal and signed by Post Master/Asst. post master

Registered leave and licence agreements along with utility bill not older than three months in the name of the landlord.

Perperty Tax bill along with receipt should not be more than calendar one year old from the bill issuance date./Water Tax bill along with receipt (not older than six months)

अपने ग्राहक को जानिए (Know Your Customer)

अपने ग्राहक को जानिए दिशा- निर्देशों का उपयोग ग्राहक पहचान प्रक्रिया के लिए किया जाता है। KYC का प्रयोग बैंकों द्वारा अपने ग्राहकों की पहचान रखने के लिए भी किया जाता है। इसमें खातों के हितार्थी स्वामी की सही पहचान, निधि के स्त्रोत, ग्राहक के उद्दोग का स्वरूप, ग्राहक के कारोबार के सम्बन्ध में खाते के परिचालन में उचितता इत्यादि शामिल हैं, जिससे बैंकों को विवेकसम्मत जोखिम प्रबन्धन से सहायता मिलती है।

Known Your Customer (KYC) is the process used to verify the identify of the client. The term is also used to refer to the bank regulation which governs these activities. The objective of DYC guidelines is to prevent banks from being used (intentionally or unintentionally) by criminal elements for money laundering activities.

CCC बैंकिंग सेवा डिलीवरी चैनल (Banking Service Delivery Channel) Study Material Notes in Hindi

प्रौद्दोगिकी के निरन्तर विकास ने बैंकिग क्षेत्र में भी अनेक नवाचारों को प्रोत्साहन प्रदान किया है। इन प्रौद्दोगिकीय नवाचारों के कारण बैंकिंग गतिविधियों का भी सार्वभौमीकरण हो रहा है। इनके साथ ही लेन देन, भुगतान, धन योजना, खाता अद्दतन करने (Up to Date),चेक जमा करने आदि अनेक कार्यों हेतु उपभोक्ता की बैंक कर्म्चारियों पर निर्भरता समाप्त हो गई है। इससे एक ओर जहाँ बैंकों की कार्यकुकशलता में वृद्धि हो रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राहकों को भी सुविधा हो रहीं है। पिछले कई दशकों में भारत के बैंकिंग क्षेत्र की गतिविधियों में तकनीकी रूप से तेजी से विकास हुआ है। बैंकिग क्षेत्र के प्रमुख नवाचार निम्नलिखित हैं-

ऑटोमेटिड टैलर मशीन (Automated Teller Machine ATM)

स्वाचलित टैलर मशीन (Automated Teller Machine ATM) एक ऐसा कम्प्यूटरीकृत बैंकिंग उपकरण है, जो ग्राहकों को शाखा प्रतिनिधि की किसी सहायता के बिना धन से सम्बन्धित मूलभूत सेवाएँ प्रदान करता है। सामान्यत: एटीएम दो प्रकार के होते है- पहला, जिसमें यूजर केवल पैसे निकाल सकता है तथा दूसरा, जिसमें कई सुविधाएँ होती है। जैसे डिपोजिट ग्रहण करना, अकाउण्ट की जानकारी आदि।

एटीएम से ग्राहकों को निम्नलिखित लाभ प्राप्त होते हैं-

24 x 7 और 365 दिन लेन देन की सुविधा

तीव्र एवं कार्यकुशलता सेवा

लेन – देन में गोपनीयता

लेन-देन में विश्वसनीयता

एटीएम में बैंकों को निम्नलिखित प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं-

बैंकों की गतिविधियों में विस्तार।

बैंकों के कार्य संचालन हेतु पर्याप्त समय की उपलब्धोता।

बैंक के कर्मचारियों कपर अनावश्यक कार्यभार में कमी।

नई बैंक शाखाएँ खोलने हेतु प्रोत्साहन।

बैंकों को धन के विशाल हस्तान्तरण से मुक्ति।

बैंक के मानव संसादन का अनुकूलतम उपयोग।

वित्तीय समावेशन को प्रोत्साहन।

ATM is an electronic banking outlet, which allows customers to complete basic transactions without the aid of a branch representative or teller. There are two primary types of automated teller machines or ATM.

The basic units allow the customer to only withdraw cash and receive a report of the account’s balance. The more complex machines will accept deposits, facilitate credit card payments and report account information.

DOEACC CCC बैंक मित्र (Bank Mitra) Study Material Notes in Hindi

बैंक मित्र वे लोग होते हैं, जो लोगों को बैंकिंग सुविधाएँ (खाता खोलना, खाते में पैसा जमा करना) उपलब्ध करवाते हैं। विशेषकर बैंक मित्र उन जगहों पर कार्य करते हैं, जहाँ किसी बैंक की शाखा (Branch) एवं एटीएम मशीन नहीं होते हैं। ये एक प्रकार के बैंक के अभिकर्ता (Agent) होते हैं तथा लोगों को बैंक खाते खोलने में हर तरह की मदद करते हैं।

बैंक मित्रों द्वारा निम्नलिखित कार्य किया जाता है-

बचत (saving) एवं लोन से सम्बन्धित जानकारी लोगों को देना।

प्रधानमन्त्री जन- धन योजना के अन्तर्गत एवं दूसरी सुविधाओं के बारे में लोगों को जागरूक एवं शिक्षित करना।

ग्राहकों की पहचान करना।

प्राथमिक जानकारी, आँकड़ों को एकत्र करना, फॉर्म को सम्भालकर रखना, लोगों द्वारा दी गई जानकारी की जाँच करना तथा लोगों द्वारा दी गई राशि को जमा करना।

खाते (account) से सम्बन्धित जानकारी ग्राहक को उपलब्ध करवाना।

A Bank Mitra acts like an agent in facilitating bank and banking related disservices, especially in unbanked areas of the country. They help in areas where of the country. They help in areas where there is no ATMs and branches of Banks. A Banks Mitra provides numberous services to the unbanked people of India. They first take a look at potential customers and help them in opening accounts by verifying identity and collecting all relevant documents. They may provide a range of services as decided by the bank from time to time. A Bank mitra is an important individual in the bank and can help bridge the void, between the banked and the unbanked people in India.

प्वाइण्ट ऑफ सेल (Point of Sale)

इसे खरीदने की जगह (Point of Purchase) भी कहा जाता है। POS वह स्थान एवं समय हैं, जहाँ खुदरा लेन देन (Transaction) किया जाता है। पीओएस के समय व्यापारी ग्राहक पर देय रारशि का मूल्यांकन करके इंगित करता हैं तथा ग्राहक पर देय राशि का मूल्यांकन करके इंगित करता हैं तथा ग्राहक के लिए एक विवरण पत्र तैयार कर सकता है (जो नकद रजिस्टर या प्रिण्ट आउट हो सकता है) तथा वह ग्राहक को भुगतान करने का विकल्प दे सकता है। पीओएस एक ऐसा माध्यम हैं जहाँ ग्राहक व्यापारी को किसी सामान (Goods) या सेवा (Services) के बदले में भुगतान करता है। भुगतान (Payment) प्राप्ति के पश्चात् व्यापारी उस लेन देन की एक रसीद (Receipt) जारी कर सकता है, जो अधिकांशत: छेपी हुई (Printed) होती है, लेकिन अधिकतर रसीद इलेक्ट्रॉनिक रूप में भेजी जाती है।

The point of sale  (POS) is the time and place where a retail transaction is completed. It is also called point of purchase. It is the point at which a customer makes a payment to the merchant in exchange for goods or after provision of a service. At the point of sale, the merchant would prepare an invoice for the customar (which be a cash register printout) or otherwise calculate the amount owed by the customar and provide  options for the customar to make payment. After receiving payment, the merchant will also normally isuse a receipt for the transaction. Usually the receipt is printed, but is is increasingly beng dispensed electronically.

बैंकिग सेवा डिलीवरी चैनल- II (Banking Services Delivery Channel II)

ये दो प्रका के हहोते हैं

Internet Banking

National Electronic fund Transfer (NEFT) and Real Time Gross Settlement (RTGS)

इण्टरनेट बैंकिंग (Internet Banking)

इण्टरनेट बैंकिंग के द्वारा बैंक का  ग्राहक वेबसाइट के माध्यम से अपने बैंक का पूर3 हिसाब देख सकता है और उसका लेन देन भी कर सकता है। इण्टटरनेट बैंकिंग को ऑनलाइन बैंकिग, आभासी बैंकिंग या ई-बैंकिंग के नाम से भी जाना है। इस सेवा का लाभ उठाने के लिए ग्राहक को बैंक की वेबसाइट पर अपना रजिस्ट्रेशन करना होता है और उसके बाद एक यूजर आईडी और पासवर्ड बनाना पड़ता है। यूजर आईडी और पासवर्ड द्वारा ही ग्राहक की पहचान वेबसाइट पर होती है। बिना सहीं यूजर आईडी या पासवर्ड के ग्राहक अपने खाते की कोई भी जानकारी नहीं ले सकता है। यहाँ से वह अपने खाते को किसी अन्य व्यक्ति के खाते से भी जोड़ सकता है। इस प्रकार आपस में पैसे का लेन देन बहुत आसानी से हो जाता है।

Internet banking is an electronic payment system that enables customers to conduct financial transactions on a website operated by the institution, such as a retial bank, virtual bank, credit union or building society. Internet banking is also referred as online banking, E-banking, virtual banking and by other terms. To access a financial institution’s online banking facility, a customer with internet access would need to regist3er with the institution for the service and set up a password and other credentials for customer verification. Now, Banks routinely allocate customers numbers’ whether or not customers have indicated an intention to access their online banking facility. Customers numbers are normally not the same as account numbers, because a number of customer accounts can be linked to the one customer number. The customer number can be linked to any cheque, savings loan, credit card and other accounts.

NEFT (National Electronic fund Transfer)

देश में इण्टरनेट के माध्यम से फण्ड स्थानान्तरण करने का तरीका है। इसकी शुरूआत नवम्बर 2005 में हुई थी। इसके अन्तर्गत कोई व्यक्ति, फर्म या कम्पनी एक बैंक शाखा से दूसरे किसी बैंक की शाखा में किसी व्यक्ति, फर्म या कम्पनी के खाते में पैसा ट्रांसफर किया जा सकता है।

NEFT (National Electronic fund Transfer) के अन्तर्गत न्यूनतम या अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है। NEFT के अन्तर्गत स्वयं की अनुपस्थिति में उस बैंक में खाता होते हुए भी, नदक राशि जना कराने पर दूसरी बैंक की शाखा में पैसा अन्तरण किया जा सकता है। इसके लिए पैसा जमा कराने वाले व्यक्ति को अपना पहचान – पत्र प्रमाण स्वरूप देना होगा।

It is one of the most prominent electronic  funds transfer systems of India. Started in Nov. 2005, NEFT is a facility provided to bank customers to enable them to transfer funds easily and securely on a one-to-one basis. It is done via electronic messages. This is not on real- time basis like RTGS (Real Time Gross Settlement). This is a net transfer facility which is executed in hourly batches resulting in a time lag.

RTGS (Real Time Gross Settlement)

इस व्यवस्था में एक बैंक से दूसरे बैंक में फण्ड का स्थानान्तरण वास्तविक समय (Real Time) में एवं सकल आधार (Gross Basis) पर होता है। Real Time का अर्थ हैं। इसमें  Fund Transfer तुरत, बिना किसी समयान्तराल के होते है। तत्काल निपटान (Gross Settlement) का अर्थ है, किसी अन्य Transaction के साथ RTGS का कोई Netting या Link नहीं होता है। इस बार प्रक्रिया होने के बाद यह अन्तिम व अपरिवर्तनीय माना जाता है। RTGS (Real Time Gross Settlement) द्वारा लेन देन के लिए न्यूनतम सीमा रू. 2 लाख निर्धारित है।

Real –time gross settlement systems (RTGS) are specialist funds transfer systems where transfer of money or securities takes place from one bank to another on a real time and on gross basis. Settlement in real time means payment transaction is not subjected to any waiting period. The minimum amount for RTGS is 2 lakh.

बीमा (Insurance)

एक ऐसी व्यवस्था जिसमें कोई बीमा कम्पनी (Insurance Company) आपके (ग्राहक) किसी भी प्र्का का नुकसान, दुर्घटना, बीमारी, मृत्यु इत्यादि के सन्दर्भ में मुआवजा देने की गारण्टी देता है। बीमा बेचने वाला व्यक्ति (या कम्पनी) इन्शयोरर तथा बीमा खरीदने वाला व्यक्ति पोलीसी होल्डर कहलाता है। बीमा प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक होता है, क्योंकि यह-

किसी व्यक्ति के आकस्मिक निधन के पश्चात् यह (बीमा) उसके परिवार के सदस्य को वित्तीय सुरक्षा देता हैं जो उस परिवार के लिए सहारा होता है।

चिकित्सा सुरक्षा (Medical Safety) के रूप में यदि किसी व्यक्ति की आपात चिकित्सा (medical Emergency) की स्थिति उत्पन्न हो जाए, तो उस स्थिति में बीमा कम्पनी धन (Money) उपलब्ध करवाती है।

Insurance is the equitable transfer of the risk of a loss, from one entity to an insurer, or insurance carrier, is selling the insurance, the insured, or policyholder, is the person or entity buying the insurance policy.

The amount of money to be charged for a certain amount of insurance coverage is called the premium. Risk management, the practice of appraising and controlling risk, has evolved as a discrete field of study and practice.

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