M1 R4 Information Technology and Society Study Material Not in Hindi

M1 R4 Information Technology and Society Study Material Not in Hindi

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M1 R4 Information Technology and Society Study Material Not in Hindi
M1 R4 Information Technology and Society Study Material Not in Hindi

M1 R4 सूचना तकनीक समाज (The Indian Information Technology – IT) ऐक्ट

इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी ऐक्ट 2000 (ITA – 2000) एक ऐसा ऐक्ट है जो भाररतीय संसद में (No- 21/2000) 17 अक्टूबर, 2000 को नोटिफाइड हुआ था। यह ड्राफ्ट संसद में दिसंबर 1999 में रखा गया एवं मई 2000 में यह पास हुआ। 9 जून, 2000 में राष्ट्रपति के पदासीन होने के बाद यह ऐक्ट अंतत: नोटिफिकेशन संख्या G.S.R. 788 (E)  के तहत 17 अक्टूबर 2000 से कार्यन्वित हुआ।

इस ऐक्ट में एक बड़ा संशोधन किया गया जो 6 फरवरी, 2003 से कार्यान्वित हुआ जिसके परिणाम स्वरूप एक संबंधित कानून बना जो नेगोशिएबल इंस्टूमेंट्स अमेंडमेंट ऐक्ट 2002 के नाम से जाना गया।

इन्फॉर्मेशमन टेक्नॉलॉजी ऐक्ट 200 का अमेंडमेंट बिवल 2006, भारतीय संसद द्वारा 23 दिसम्बर, 2008 में पास किया गया। इस ऐक्ट में 94 सेक्शन टेक्नॉलॉजी ऐक्ट 2000 में निम्न मुददे उठाए गए हैं:

इलक्ट्रॉनिक दस्तावेजों (documents) की कानून पहचान

डिजिटल (Signatures) दस्तखतों की कानूनी पहचान

अपराध एवं उल्लंघन (offenses and contravention)

साइबर अपराधों के लिए न्याय वितरण प्रणाली

इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी (अमेंडमेंट) बिल

भारत सरकार ने ITA – 2000 में कई संशोधन प्रस्तावित किए थे जो इन्फॉर्मेशन टेक्नॉलॉजी (अमेंडमेंट) बिल, 2006 के रूप में आए। यह ऐक्ट सभी इलेक्ट्रॉनिक कम्यूनिकेशन यहाँ तक कि अन्जाने में किए गए अपराधों पर बिना किसी पाबंदी के नजर रखने की अनुमति देता है।

M1 R4 इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) के मुददे Study Material

इंटेलेक्चुअल प्रॉपटी राइट्स (बौद्धिक संपदा अधिकार) मौलिक कार्य को बनाने वाले के विशेष अधिकारों की ओर इशारा करते हैं। IPR एक मुख्य मुददा है क्योकि मौलिक कार्य कई स्रोतों एवं लेखकों से आता है। IPR के अंतर्गत ट्रेडमार्क, पेटेंस एवं डिजाइन के अधिकार आते हैं यह डॉक्यूमेंट केवल कॉपराइट पर ही आधारित होता है जो कि  IPR  की एक खास ब्रॉच है, जो सभी लेखकों या कंटेंट बाने वालो, जो शैशिक कार्य तैयार करते हैं, से संबधित है।

M R4 कॉपीराइट (Copyright) Information Technology and Society Study Material Notes in Hindi

कॉपीराइट एक प्रकार का IPR  है जो तब कार्यकारी होता है, जब कोई कार्य तैयार हो जाता है। उदाहरण के लिए UK में, कॉपीराइट में रजिस्टर करने की कोई जरूरत नहीं है, कॉपीराइट का कानून लेखक को अपने आप ही सुरक्षा देता है, जब भी उसका काम तैयार हो जाता है। किसी खास काम को कॉपीराइट के अंतर्गत सुरक्षित बनाने के लिए, इसे एक विशेष रूप में रिकॉर्ड या प्रस्तुत किया जाना चाहिए, उदाहरण के लिए, प्रिंटेड फॉर्मेंट, साउंड रिकॉर्डिग आदि। कॉपीराइट कॉपी करना, वितरण करना, ब्रॉडकास्ट करना एवं किसी प्रकार का परिवर्तन करना, आदि कामों को इस्तेमाल करने का विशेष अधिकार प्रदान करता है। इन विशेष अधिकारों का निश्चित विस्तार, प्रत्येक ज्यूरिसडिक्शन में अलग अलग हो सकता है जैसे EU कॉपीराइट लॉ में रेंटल अधिकार भी शामिल हैं।

आमतौर पर कॉपीराइट, कार्य के लेखक के पास ही होता है। लेकिन रोजगार के दौरान बनाए गए काम का कॉपीराइट मालिक के पास होता है कुछ संस्थान एक लैक्स IPR प्रैक्टिस को लागू करना चुनते हैं जैसे विश्वविद्दालय योग्यता को देते हैं। शैक्षिक योग्यता वाले व्यक्ति, प्रकाशनों के लिए IPR ऐग्रीमेंट करने के लिए स्वतंत्र हैं। उदाररण के तौर पर शौध के परिणाम के अधिकार को प्रकाशनों को देना। लेकिन इस  बात को ऐसे ही नहीं मान लेना चाहिए खास कर तब जबकि संबंधित कार्य का आर्थिक एवं प्रतिदंदात्मक प्रभाव पड़ता हो।

साफ व्यवहार (Fair Dealing)

कॉपीराइट के उल्लंघन का अर्थ है, कॉपीराइट मालिक के एकाधिकार से संबंधित कोई कार्य उसकी सहमति के बिना किया गया है। हालाँकि अदिकांश कॉपीराइट कानून एक सुरक्षा प्रदान करते हैं जिसे fairdeafing  कहा जाता है, जो बिना अनुमति के कार्य का इस्तेमाल करनी की अनुमति देता है। उदाहरण के लिए आप निजी परढ़ाई तथा अव्यावसायिक शेध के लिए कार्य प्रयोग कर सकते हैं और उसे अन्य कार्यों में कॉपीराइट मालिक उल्लेख के द्वारा शिक्षा के उददेश्य के लिए, किसी कार्य का एक निश्चित हिस्सा कॉपी किया जाना भी संभव है। लेकिन फेयर डिलिंग मुख्यत: व्यक्ति के ऊपर निर्भर करती है एवं यदि मालिक को लगता है कि किसी प्रकार का उल्लंघन हुआ है तो वह निर्णय के लिए कोर्ट जा सकता है। अत: फेयर डीलिंग का प्रयोग सावधानी पूर्वक ही करना चाहिए।

जब बात इंटरनेट की हो तो यह एक गलत धारम है कि अधिकांश कार्य पब्लिक डोमेन में होता है कारण अधिकांश कार्य कॉपीराइट से कवर किए होते हैं एवं इनके इस्तेमाल के लिए शर्ते होती हैं। इंटरनेट तकनीकों की व्यापकता के कारण डिजिटल लाइब्रेरियों के कंटेंट को अपलोड करना और इसे ऑनलाइन शेयर करना किसी कार्य की एक साथ पब्लिशिंग, ब्रॉड कास्टिंग एवं डिस्ट्रीब्यूटिंग के समान है। दूसरी तरफ इसके विपरित, फेयर डीलिंग आम तौर पर प्राइवेट यूजड के लिए एक सिंगल कॉपी की अनुमति देता है और इसलिए यह ऑन लाइन शैक्षिक कंटेट के प्रोयजन के ले सुरक्षा का सही तरीका नहीं हैं।

M1 R4 सूचना तकनीक के प्रयोग ( Use of Information Technology) Notes in Hindi

हमारे जीवन के प्राय: हर क्षेत्र में कम्प्यूटर्स का व्यापक इस्तेमाल होता है। इनका निम्न क्षेत्रों में विशेष प्रयोग हो रहा हैं:

  • ऑफिसों
  • पुस्तकों के प्रकाशन
  • डाटा ऐनालिसिस
  • अकाउंटिंग, इन्वेस्मेंट एवं इन्वेंट्री कंट्रोल
  • ग्राफिक्स
  • कम्प्यूटर एडेड मैन्यूफैक्चर
  • डाटाबेस मैनेजमेंट
  • प्रोजेक्ट मैनेजमेंट
  • शिक्षा
  • मिलिट्री ऑपरेशन
  • बैंकों
  • अन्य प्रयोग

M1 R4 एयर लाइन्स एवं रेलवें टिकट रिजर्वेशन Study Material Notes in Hindi

भारतीय रेलवे में कम्प्यूटराइज्ड रिजर्वेशन की सुवधा प्रा: सभी मुख्य रेलवे स्टेशनों पर है। कमप्यूटर्स में टिकट प्रोसेसिंग के लिए सभी आवश्यक सूचना जैसे ट्रेन नंबर, स्टेशन, स्टेशनों के बीच की दूरी, प्रत्येक ट्रेन में प्रत्येक क्लास के लिए उपलब्ध सीटों की संख्या, ट्रेन का किराया, आदि स्टोर रहती है।

M1 R4 बैंकों में कम्प्यूटर (Computer in Banks) Technology in Study Material

बैंकों में कम्प्यूटर का प्रयोग ग्राहकों को ऑन लाइन सेवाएँ प्रदान करने तथा ग्राहकों के अपने बैलेंस आदि से संबधित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए होता है। कैश को हैंडल करने के लिए बैंकों में कैश डिस्पेंसिग मशीनों का प्रयोग होता है। एक कम्प्यूटर के प्रयोग से, एक अकाउंट से दूसरे में फंड को इलेक्टॉनिक रूप से ट्रांसफर करना संभव है। एक ग्राहक अपने घर, आफिस अथवा स्टोर से अपना आईडी नंबर डालकर, टर्मिनल कीबोर्ड पर ट्रांडैक्शन डीटेल टाइप करता है। तुरंत ही, जितना अमाउंट उसने डाला है वह उसके अकाउंड से निकल कर दूसरे अकाउंट में चला जाता है।

M1 R4 इन्वेंट्री कंट्रोल (Inviter Control) Information in Hindi

इन्वेंट्री का अर्थ है वस्तुओं की सूची। एक संगठन में वस्तुएँ जैसे रॉ मैटीरियल, फिनिश्ड प्रोडक्ट, स्पेयर्स, कन्ज्यूमेबल आदि को स्टॉल में रखा जाता है जिससे जब भी आवश्यकता पड़े तो ये आइटम शेल्फ में उपलब्ध हों और इन आइटमों की अनुपलब्धता की वजह से बिजनेस प्रभावित न हो। एक बिजनेसे तब तक लाभकारी नहीं हो सकता हैं जब तक कि इसमें वस्तुओ के आने और जाने का विस्तृत हिसाब न रखा जाए। एक अच्छे इन्वेंट्री कंट्रोल सिस्टम के मुख्य उददेश्य है:

इन्वेंट्री पर किए गए निवेश को न्यूनतम रखना जिससे फंड को अधिक फायदेमंद उपयोगों के लिए उपलब्ध कराया जा सके जिससे उधार न लेना पड़े और ब्याज से होने वाले नुकसान को बचाया जा सके।

यह सुनिश्चित करना कि स्टोर में जब, जहाँ जैसी जरूरत पड़े तो आइटम उपलब्ध रहें।

अधिक स्टॉक रखने, वस्तुओं के सड़ने अथवा पुरानी हो जाने की वजह से होने वाले नुकसान को कम किया जाना।

प्रोडक्शन की लागत एवं उपकरणों की देखभाल पर आने वाले खर्चे को मेन्टेन करने एवं कम करने के लिए संसाधनों को उत्कृष्ठ बनाना।

कॉस्टिंग एवं अकाउंटिंग कारणों से सही रिकॉर्डो को मेन्टेन करना। इसलिए जह जरूरी है कि सभी संघनों में एक अच्छा इन्वेन्ट्री कंट्रोल सिस्टम होना चाहिए और इस लक्ष्य को प्राप्त करने में कम्प्यूटर आपकों काफी मदद करते हैं

M1 R4 फाइनैन्शियल सिस्टम  (Financial System) Study Material

फाइनैन्शियल सिस्टम वो सिस्टम होते हैं जो विभिन्न संगठनों या व्यक्तियों को पैसों का लेनदेन करने में ही डील करते हैं। इन्हें फाइनैन्शियल अकाउंटिग तथा मैनेजमेंट अकाउंटिंग दो भागों में बाँटा जा सकता है। फाइनैन्शियल अकाउंटिंग फाइनैन्शियल स्टेटमेंट जैसे बैलेंसशीट प्रॉफिट/लॉस अकाउंट आदि तैयार करती हैं जबकि मैनेजमेंट अकाउंटिंग फाइनैस की टाइम से सूचना देता है जिससे मैनेजर अपना कार्य कुशलता से कर सके।

M1 R4 अकाउंटिंग, इन्वेस्टमेंट एवं इनवेट्री कंट्रोल Study Material in Hindi

स्प्रेडशीट प्रोग्राम एक सॉफ्टवेयर पैकेज हैं जो इन्वेस्टमेंट की ऐनालिसिस के लिए होता है। इसके अलावा यह इन्वेंट्री कंट्रोल एवं बजट तैयार करना जैसे कार्यों की भी ऐनालिसिस करता है। लेकिन कुछ खास प्रोग्राम फाइनैन्शियल कैलकुलेशन्स अकाउंटिग आतदि के लिए भी उपलब्ध होते है। इस तरह के पैकेज स्पीड, एफिशिएंसी तथा उन लोगों के कार्य करने की ऐक्यूरेसी को बढ़ाते हैं जो शेयर ऐनालिसिस तथा अकाउंट डिपार्टमेंट में कार्य करते हैं।

M1 R4 इन्वेस्टमेंट ऐनालिसिस (Investment Analysis) Information Technology and Society Study Material

कम्प्यूटर्स का प्रयोग, अधिकतम रिटर्न के लिए इन्वेस्टमेंट को ऐनालाइज़ करने के लिए होता है। कई कंपनियाँ शेयर एवं डिबेंचर निकालती हैं। कुछ लोग ब्रोकर अथवा फाइनैन्शियल मैनेजरों की सलाह लेते हैं। लेकिन अन्य कम्प्यूटर्स की मदद से शेयर को खुद ही ऐनालाइज़ करना चाहते हैं। इस ऐनालिसिस के ले सॉफ्टवेयर पैकेज सस्ते में उपलब्ध होता है। इस तरह के कुछ पैकेज ऑफिस सुईट के साथ एक भाग होते हैं और माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन, USA  द्वारा समर्थन प्राप्त होते हैं। यूज़र को डाटा एंटर करना होता है एवं ऐनालिसिस का रिजल्ट मिल जाता है। इसके अलावा पोर्टफोलियों ऐनालिसिस, मैनेजमेंट एवं पर्सनल फाइनैंस मैनेजमेंट के लिए भी सॉफ्टवेयर पैकेज उपलब्ध हैं।

पोर्टफोलियों मैनेजमेंट पैकेज, एक व्यक्ति के द्वार खरीदे गए शेयर्स के प्रेजेन्ट स्टेटस को ऐनालाइज़ करता है। आपकों इसमें केवल आपके पास कितने शेयर्स है, उसकी संख्या, पर्चेस रेट, करेंट प्राइज आदि चीजें डालनी होती हैं। प्रोग्राम लाभ या हानि, शेयर की खरीद में होने वाली कुल इन्वेस्टमेंट, टोटल करेंट वैल्यू, टोटल गेन (लाभ) या लॉस (हानि) एवं लाभ/ हानि का प्रतिशत आदि को कैलकुलेट करेगा। पर्सनल फाइनैन्स मैनेजमेंट प्रोग्रामों का प्रयोग पर्सनल इन्वेस्टमेंट के लिए रिकॉर्ड कीपिंग तथा ऐनालिसिस करने के लिए होता है। इस तरह के सॉफ्टवेयर पैकेज, बजट तैयार करने, इन्कम कैलकुलेट करने, इंटरेस्ट, इन्श्योरेंस, चेकों की प्रिटिंग जिससे बिलों का पेमेंट हो सके, इन्कम टैक्स का कैलकुलेशन आदि कार्य करते हैं। ये किसी व्यकित की सेविंग्स की भी प्लानिंग करते हैं।

M1 R4 होटल मैनेजमेंट Hotel Management (information Technology Society) Study Material Notes in Hindi

सूचना तकनीक का प्रयोग व्यापक रूप से होटलों में ग्राहकों के विवरण तथा उनकी पसंद एवं विभिन्न उपलब्ध  रेसिपी को स्टोर करने तथा ग्राहकों के ऑर्डर ऑनलाइन लेन, खाना समय से भेजने एवं कमरों की उपलब्धता तथा कउनके प्रतिदिन के रेट आदि के विवरम भी स्टोर करने के लिए किया जाता है। रिसेप्शन, चैक इन, चैक आउट, बिलिंग एवं अकाउंटिग आदि सभी कार्य आजकल कम्प्यूटराइज्ड हो गए हैं। मैनेजमेंट की दृष्टि से, कम्प्यूटर्स का प्रयोग रिपोर्ट प्रिंट करने के लिए होता है जो कमरों की ऑक्यूपेंसी रेट, एक निश्चित समय के भीतर जमा की गई कुल इन्कम, प्राप्त की गई फॉरेन एक्सचेंज आदि से संबंधित होती हैं। इस प्रकार का डाटा भविष्य की योजनाओं में इस्तेमाल होता है।

M1 R4 शिक्षा में कम्प्यूटर Computer in Education  Study Material Notes in Hindi

शैक्षिक संस्थानों में कम्प्यूटर्स का प्रयोग टीचिंग एड, रिसर्च टूल एवं ऐनालाइजिंग सिस्टम के रूप में होता है। जब कम्प्यूटर का प्रयोग एक टीचिंग एड के रूप में होता है, तो इसे कम्प्यूटर असिस्टेड इंस्ट्रक्शन (CAI) कहा जाता है। कम्प्यूटर छात्र से, किसी विषय को समझने की उसकी क्षमता को जाँचने के लिए प्रश्न पूछता है। जब वह छात्र उसके उत्तर देता है, तो कम्प्यूटर अपने कमेंट्स देता है जो ये दर्शाते हैं कि उत्तर सही है या नहीं। यदि उत्तर गलत है तो कम्प्यूटर में एरर सिग्नल आता है। CAI प्रोग्राम कई तरह से तैयार किए जा सकते हैं जैसे ट्यूटोरियल, डिस्कवरी, प्रॉबलम सॉल्विंग, मॉडलिंग ड्रिल एवं प्रैक्टिस आदि। ट्यूटोरियल, मोड में कम्प्यूटर नए आइडिया देता है जिसके बाद टेक्स्ट प्रश्न पूछे जाते हैं। डिस्कवरी मोड में कम्पयूटर सूचना प्रस्तुत करता है और छात्रों को इसका सारंश निकालने के लिए कहता है। प्रॉब्लम सॉल्विंग मोड में कम्प्यूटर छात्रों से एक प्रॉब्लम को सॉल्व करने में अपने कॉन्सेप्ट ऐप्लाई करने के लिए अनुमति देता है। मॉडलिंग मोड में एक प्रोसेस या सिस्टम को गणितीय रूप में प्रस्तुत किया जाता है ओर इसका ऐनालिसिस बनाने के लिए छात्रों को कहा जाता है। कम्प्यूटर किसी मैटीरियल को जितनी बार चाहें उतनी बार प्रस्तुत कर सकता है। इससे यदि छात्रों को किसी विषय के कॉन्सेप्ट पहले समझ में न आए हों तो बार बार देखने से वो समझ आ जाएंगे। प्रश्न बैंकों को तैयार करके कम्प्यूटर में स्टोर किया जाता है। टैस्ट प्रश्न भी स्टोर किए जाते हैं जिससे छात्र अपने ज्ञान को जब वो चाहें तब एक परीक्षा के हिसाब से जाँच सकते हैं।

M1 R4 वीडियों गेम्स Video Games  Study Material Notes in Hindi

वीडियों गेम्स ने कम्प्यूटर की लोकप्रियता को बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया है। 3 डायमेंशनल वीडियों गेम्स के वर्जन के आने से, कम्प्यूटर की लोकप्रियता और बढ़ी है। कस्टम बिल्ट सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर, गेम्स का आश्चर्यजनक प्रभाव लाने के लिए आवश्यक स्पीड तक पहुँचने में मदद करते हैं। घरों के कम्प्यूटर्स में खेले जाने वाले गेम्स तेज नहीं होते हैं कारण उनमें आवश्यक हार्डवेयर सपोर्ट की कमी होती है। इन गेमों में किसी तरह का की कॉम्पलेक्स ग्राफिक एल्गॉरिदम इस्तेमाल नहीं होता है किंतु ये डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग पर आधारित होते हैं।

M1 R4 टेलीफोन एक्सचेंज Study Material in Hindi

टेलीफोन कनेक्शनों की बढ़ती संख्या के साथ, स्विचिंग स्वाओं के ऑटोमैटिक कंट्रोल की भी आवश्यकता बढ़ी है। बॉयस कम्प्यूनिकेशन को कोडर/डीकोडर (codec) की मदद से डिजिटाइज़ किया जाता है। ये कोडर/डीकोडर ऐनालॉग को डिजिटल में तथा डिजिटल को ऐनालॉग में परिवर्तित करते हैं।

एक कंप्यूटर डिजिटल स्विचिंग नेटवर्कों की गतिविधियों को कंट्रोल एवं मैनेज करता है, एक नेटवर्क की इंटरफेसिंग को मैनेज करता हैं तथा नेटवर्क रिसोर्सेज को हैंडल करता है। कॉल फॉर्वडिग, कॉलवेटिंग, कॉलर आइडेंटिफिकेशन, कॉल कॉन्फ्रेसिंग आदि सुविधाएँ सूचना तकनीक की मदद से ही संभव हो पाई हैं। आजकल इस तरह की सुविधाएँ बहुत कम प्राइस पर लोगों को उपलब्ध कराई जाती है।

M1 R4 मोबाइल फोन Mobiles Phone (Information) Notes in Hindi

मोबाइल फोन हमें कभी भी, कही भी कॉल करने तथा उन्हें रिसीव करने एवं अन्य सेवाओं को इस्तेमाल करने की सुविधा देते हैं। आजकल मोबाइल फोन के प्रयोग से कोई भी विभिन्न प्रकार की सूचनाओं जैसे ट्रैफिक की सूचना या ग्रोसरी स्टोर से ई – मेल, आदि तक आसानी से पहुँच सकते हैं। उपरोक्त सभी सुविधाएँ वायरलेस कम्प्यूनिकेशन तकनीक के प्रयोग से संभव हो पाई है। इस तकनीक में रेडियों, इन्फ्रारेड, सेल्यूलर रेडियों एवं सैटलाइट कम्यूनिकेशन तकनीकें आदि शामिल हैं।

इन्फॉर्मेशन (सूचना) कियॉस्क

सूचना कियॉस्क एवं इंटरनेट कियॉस्क सिस्टम एक ही तरह के सॉफ्टवेयर तथा हार्डवेयर फ्लैटफॉर्म का प्रयोग करते हैं जिससे ये कुछ अलग हट के कार्य कर सकें। सूचना कियॉस्क को एक या अधिक फोकस्ड ऐप्लीकेशनों तक पहुँचने के लिए डिज़ाइन किया जाता है जैसे किसी स्टोर के प्रोडक्ट कैटालॉग को ब्राउज़ करना या एक वेन्यू की उपलब्ध सेवाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करना। दूसरी ओर इंटरनेट कियॉस्क विभिन्न प्र्कार की इंटरनेट साइटों, ई-मेल आदि में प्रति मिनत फीस के ऐवज में ऑन डिमांड ऐक्सेस प्रदान करने हैं। हाल ही में ऩए कियॉस्क सिस्टम आए हैं जो दोनों तरह के कियॉस्कों की सुविधा प्रदान करते हैं। चाहें आप कम्प्यूटर सूचना कियॉस्क पर काम कर रहे हों या इन्टरनेट कियॉस्क पर, यह अवश्य सुनिश्चित करें कि आपका सॉफ्टवेयर एक सुरक्षित, लॉक्ड (locked) डाउन वातावरण तथा एक मजबूत कियॉस्क मैनेजमेंट टूल्स प्रदान करता है।

M1 R4 मूवीज़ में स्पेशल इफेक्ट (Special Effects in Movies) Information Technology Study Material in Hindi

आजकल, मूवी उद्दोग कम्प्यूटर्स का व्यापक उपयोग, ऐनीमेशन बनाने तथा कुछ सीन में स्पेशल इफेक्ट डालने के लिए करते हैं। उदाहरण के लिए एक ही व्यक्ति के डबल रोल (जैसाकि हिंदी फिल्म डयूप्लिकेट में था जिसमें दो शाहरूख खान एक साथ दिखाई देते थे), मॉर्फिग (जैसे एक शेर देखते ही देखते एक आदमी में बदल जाता है या इसका उल्टा होता है) आदि। इसी प्रकार ग्राफिस इमेज जो बैक ग्राउंड में चलती रहती है जब एक व्यक्ति किसी शो की एंकरिंग करता है या जुरासिक पार्क जैसी फिल्म में डायनासॉर आदि कुछ उदाहरण हैं जिनसे कम्प्यूटर्स का मूवी में प्रयोग, के बारे में पता चलता है। इसके अलावा कार्टून, टेलीविज़न, ऐडवार्टाइजमेंट में पिक्चर एवं कमर्शियल्स आदि में भी कम्प्यूटर का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है।

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