M1 R4 Operating System Study Material Notes in Hindi

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M1 R4 Operating System Study Material Notes in Hindi

M1 R4 Operating System Study Material Notes in Hindi : इस पोस्ट में आपकों मिलेगी ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

M1 R4 Operating System Study Material Notes in Hindi
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ऑपरेटिंग सिस्टम (M1 R4 Operating System Study Material Notes in Hindi)

ऑपरेटिंग सिस्टम (OS)

ऑपरेटिंग सिस्टम एक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जो कम्प्यूटर हार्डवेयर की आंतरिक गतिविधियों पर नियंत्रण रखता है एवं यूजर इंटरफेस प्रदान करता है। ऐप्लीकेशन प्रोग्रामों को भी हार्डवेयर रिसोर्जेज का प्रयोग करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम से इंटरैक्ट करना पड़ता है।

OS वह पहला प्रयोग होता है जो कम्प्यूटर के स्विच ऑन होने के तुरंत कम्प्यूटर की मेन मेमोरी में लोड (कॉपी) होता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम का एक मुख्य कार्य यूजर और हार्डवेयर के बीच में इंटरपेस प्रदान करना है। यह इंटरफेस एक यूजर को कुशलता पूर्वक हार्डवेयर रिसोर्सेज का उपयोग करने में सक्षम बनाता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम मुख्य रूप से कम्प्यूटर रिसोर्सेज को एक या अधिक कार्य एलोकेट करने या अन ऐलोकेट करने के प्रति अधिक चिंतित रहता है।

जो ऑपरेटिंग सिस्टम एक सिंगल यूजर को एक समय में सपोर्ट करें उसे सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम कहा जाता है जैसे विंडोज XP कुछ OS  जैसे  Linux, Unix आदि एक समय में कई यूजर्स को सपोर्ट करते हैं।

एक ऑपरेटिंग सिस्टम निम्न कार्यों को करता है : (M1 R4 Operating System Study Material Notes in Hindi)

  1. प्रोसेसर मैनेजेंट: कम्प्यूटर सिस्टम द्वार किए जाने वाले अलग अलग कार्यों के लिए OS प्रोसेसरों को असाइन (assign) करता है (यदि एक कम्प्यूटर में एक से अधिक प्रोसेसर हों तो )
  2. मेमोरी मैनेजमेंट : OS मेन मेमोरी एवं सेकेंड्री मेमोरी को सिस्टम, यूजर प्रोग्राम तथा डाटा के लिए ऐलोकेट करता है।
  3. इनपुट/ आउटपुट मैनेजमेंट: यह इनपुट/आउटपुट मैनेजमेंट के कार्य को संपादित करता है एवं विभिन्न इनपुट/आउटपुट डिवाइसिस को को ऑर्डिनेट करके उनकों असाइन (assign) करता है।
  4. फाइल मैनेजमेंट: यह (OS), विभिन्न स्टोरेज डिवाइसिस में फाल्स को मैनेज करता है तथा इन फाइल्स को एक स्टोरेज डिवाइस से दूसरी में ट्रांसफर करता है। इसके अलावा ये टेक्स्ट एडीटर अथवा अन्य फाइल मैनीपुलेशन सॉफ्टवेयर पैकेज द्वारा फाइल्स को आसानी से परिवर्तित एवं संशोधित करने की अनुमति देता है।
  5. शिड्यूलिंग: यह कार्य की प्राथमिकता निर्धारित करके उसका क्रियान्वयन करता है। अर्थात यह कम्प्यूटर सिस्टम में कार्यों को किस क्रम में किया जाना है उस क्रम को निर्धारित करता है।
  6. टाइम शेयरिंग: यह कंप्यूटर सिस्टम पर कार्य करने वाले विभिन्न पैकेजों को को – ऑर्डिनेट और असाइन करता है।
  7. सिक्योरिटी मैनेजमेंट: यह डाटा की सिक्योरिटी एवं इंटेग्रिटी को स्थापित करता है। अर्थात यह विभिन्न प्रोग्रामों तथा डाटा को इस तरह रखता है ताकि वो एक दूसरे के कार्य में हस्तक्षेप न करें। इसके अलावा यह अन्य यूजर द्वारा डाटा को नष्ट होने से बचाता है।
  8. यह डंप, ट्रेसेज, ऐरर मैसेज एवं अन्य डीबगिंग तथा ऐरर डिटेक्टिंग कोड उत्पन्न करता है।
  9. यह इंटर्नल टाइम क्लॉक को एवं लॉग ऑफ सिस्टम को अन्य सभी यूजर्स के लिए मेंटेन करता है।
  10. यह कम्प्यूटर सिस्टम एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर (मानव) के बीच में आसान कम्यूनिकेशन की सुविधा प्रदान करता है।

OS के मुख्य कार्यों को संक्षेप में इस प्रकार से वर्गीकृत किया रजा सकता है: (M1 R4 Operating System Study Material Notes in Hindi)

  1. रिसोर्स मैनेजमेंट (प्रोसेसर मैनेजमेंट, मेमोरी मैनेजमेंट, डिवाइस मैनेजमेंट)
  2. प्रोसेस मैनेजमेंट (जॉब शिड्यूलिंग, टास्क मैनेजमेंट)
  3. डाटा मैनेजमेंट (फाइल मैनेजमेंट एवं इनपुट/आउटपुट मैनेजमेंट)
  4. सिक्योरिटी मैनेजमेंट

कुछ लोकप्रिय OS हैं MS डॉस, विंडोज  XP, विस्टा, विंडोज  7, यूनिक्स, लाइनक्स, सोलारिस एवं  OS/2

सही OS को चार श्रेणियों में बाँटा जा सकता है: (M1 R4 Operating System Study Material Notes in Hindi)

  1. सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम: जो OS एक बार में कम्प्यूटर पर एक ही यूजर को कार्य करने की अनुमति देता है उसे सिंगल यूजर OS कहा जाता है। उदाहरण: डॉस।
  2. मल्टीटास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम: मल्टीयूजर OS, एक ही कम्प्यूटर पर कई यूजर्स को एक साथ कार्य करने की सुविधा देता है। प्रत्येक यूजर को कम्प्यूटर से जुड़ा एक टर्मिनल दे दिया जाता है। उदाहण: लाइनक्स यूनिक्स, विंडोज 2000 आदि।
  3. सिंगल टास्किंग ऑपरेटिंग सिस्टम: जो OS एक बार में एक से अधिक कार्यों के ऐक्जीक्यूशन को सपोर्ट करता है। आजकल के अधिकांश OS कहा जाता है। उदाहरण: डॉस, विंडोज आदि।
  4. मल्टीयूजर ऑपरेटिंग सिस्टम: एक मल्टीयूजर OS, एक ही कम्प्यूटर पर कई यूजर्स को एक साथ कार्य करने की सुविधा देता है। प्रत्येक यूजर को कम्प्यूटर से जुड़ा एक टर्मिनल दे दिया जाता है। उदाहरण: लाइनक्स यूनिक्स, विंड़ोज 200

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