M1 R4 Computer Software Study Material Notes in Hindi

M1 R4 Computer Software Study Material Notes in Hindi

M1 R4 Computer Software Study Material Notes in Hindi:- इस पोस्ट में आपकों मिलेगी कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर (Computer Software) और उससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी जैसे ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, कंपाइलर, इंटरप्रिटर, कॉमन हाई लेवल लैग्वेज एवं उनके ऐप्लीकेशन, फ्री डोमेन सॉफ्टवेयर आदि के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी।

M1 R4 Computer Software Study Material Notes in Hindi
M1 R4 Computer Software Study Material Notes in Hindi

M1 R4 कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर Study Material in Hindi

सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर प्रोग्राम, प्रोसीज्योर एवं इससे संबधित डॉक्यूमेंटशन का एक सैट होता है जो कम्यूटर के प्रभावी तरीके से कार्य करने से संबधित होता है। हार्डवेयर कम्प्यूटर के भौतिक भागों को दर्शाता है अर्थात उन भागों को जिन्हें आप देख व छू सकते हैं। इनपुट डिवाइसेज, आउटपुट डिवाइसेज, सीपीयू, फ्लॉपी डिस्क आदि हार्डवेयर के उदाहरण हैं। कम्प्यूटर डार्डवेयर स्वयं कोई उपोयगी कार्य नहीं कर सकता है। इसे कुछ निर्देशों की आवश्यकता होती हैजिसे यह समझ सके और उनका पालन कर सके। आवश्यक कार्य को करने के लिए कम्प्यूटर को निर्देशित करने के लिए जिन स्टेटमेंट्स या निर्देशों के सैट की सूची बनाई जाती है उसे ही प्रोग्राम कहा जाता है।

सॉफ्टवेयर (प्रोग्राम) निम्न टाइप के होते हैं

  • सिस्टम सॉफ्टवेयर
  • ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर

M1 R4 सिस्टम सॉफ्टवेयर Study Material in Hindi

सिस्टम सॉफ्टवेयर अथवा सिस्टम पैकेज एक या अधिक प्रोग्रामों का सैट होता है जो कि मूलत: कम्प्यूटर सिस्टम के ऑपरेशन को कंट्रोल करने के लिए बनाया जाता है। ये सामान्य प्रोग्राम होते हैं जो कम्प्यूटर सिस्टम पर कार्य करने वाले यूजर की मदद के लिए लिखे जाते हैं। इनमें यूजर कई कार्य जैसे सभी हार्डवेयर को कंट्रोल करना डाटा को कम्प्यूटर में इनपुट करना तथा आउटपुट निकालना, एवं सभी ऐप्लीकेशन प्रोग्रामों को एक्जीक्यूट करने के सभी स्टेप्स आदि करता है। संक्षेप में कहा जाए तो सिस्टम पैकेज निम्न को नियत्रित करते हैं:

अन्य सॉफ्टवेयर पैकेजों को रन करना।

  • प्रिंटर, हार्ड डिस्क एवं टेप आदि पेरीफेरल डिवाइसों के साथ कम्यूनिकेट करना।
  • विभिन्न हार्डवेयर रिसोर्सेज जैसे मेमोरी, पेरीफेरल, सीपीयू आदि के उपोयग पर नजर रखना।
  • इस प्रकार सिस्टम सॉफ्टवेयर, कम्प्यूटर सिस्टम के कार्य को अधिक प्रभावी और कुशल बनाता है।
  • विभिन्न हार्डवेयर रिसोर्सेज जैसे मेमोरी, पेरीफेरल, सीपीयू आदि के उपयोग पर नजर रखना।
  • इस प्रकार सिस्टम स़ॉफ्टवेयर, कम्प्यूटर सिस्टम के कार्य को अधिक प्रभावी और कुशल बनाता है।

M1 R4 ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर Study Material Notes in Hindi

ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर विशेष ग्रुप के यूजर जैसे वैज्ञानिकों, इन्वेट्री कंट्रोल, स्कूल् प्रशासन, लाइब्रेरी प्रबंधन आदि के लिए सॉफ्टवेयर हार्डवेयर पर नियत्रंण रखता है तथा ऐप्लीकेशन पैकेजों के कार्य का निरीक्षण करता है। इस प्रकार के सॉफ्टवेयर पैकेज इनपुट/ आउटपुट डिवाइसों का प्रबंधन, फाइल प्रबंधन स्टोरेज प्रबंधन आदि कार्य करते हैं।

सिस्टम सॉफ्टवेयपर वह है जो हार्डवेयर कंपोनेंटों से सीधे बात करता है। ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर सके सिस्टम सॉफ्टवेयर से उनके एक्जीक्यूशन की बात करता है।

एक यूजर के रूप में आप ज्यादा कार्य ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर पैकेज के लिए ही करते हैं

सिस्टम प्रोग्रामिग, हार्डवेयर के अच्छी तरह से प्रयोग के लिए सिस्टम सॉफ्टवेयर क बनाने तता उपयोग में लाने वाली प्रक्रिया है।

सिस्टम सॉफ्टवेयर, कम्यूटर रिसोर्ज को प्रभावी बनाने और प्रोग्रामिंग एवं डीबगिंग करने में मानव प्रयास को कम करने में मदद करता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर के कुछ उदाहरण है भाषा अनुवादक (language translation), लोडर (loaders), लिंकर (linkers) और ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे विंडोज 2000 XP, Visa एवं Linux आदि।

सिस्टम एवं ऐप्लीकेशन सॉफ्टवेयर पैकेजों में अंतर

सिस्टम सॉफ्टवेयर पैकेज, कम्प्यूटर यूजर तथा ऐप्लीकेशन प्रोग्रामर को काफी सुविधा तथा लाभ प्रदान करते हैं। अच्छे सिस्टम सॉफ्टवेयर आसानी से कम्प्यूटर पर ऐप्लीकेशन पैकेज को रन करने की अनुमति देते हैं। सिस्टम सॉफ्टवेयर के बिना कम्प्यूटर सिस्टम पर ऐप्लीकेशन पैकेज रन नहीं कर सकता है। लेकिन सिस्टम सॉफ्टवेयर का निर्माण एक जटिल कार्य है जिसमें कम्प्यूटर साइंस का गहरा ज्ञान और स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग की आवश्यकता पड़ती है।

सिस्टम प्रोग्रामर वह होता है जो सिस्टम सॉफ्टवेयर को तैयार करता है ये प्रोग्रामर उच्च प्रशिक्षण प्राप्त कम्प्य़ूटर एक्सपर्ट होते हैं और कम्प्यूटर को आर्कीटेक्टर टीम के महत्वपूर्म सदस्य़ होते हैं। सिस्टम सॉफ्टवेयर को शायद ही कभी घर के अंदर बनाया जाता है। क्योंकि इसमें तकनीकी जटिलता काफी अधिक होती है। सिस्टम सॉफ्टवेयर को प्राय: कम्प्यूटर के निर्माता ही विकसित वं वितरित करते हैं। एक उपभोक्ता जो कम्प्यूटर सिस्टम खरीदता है या लीज पर लेता है, को आसानी से हार्डवेयर के साथ ही, कुच आवश्यक है।

सिस्टम सॉफ्टवेयपर पूरे कम्प्यूटर सिस्टम का आवश्यक भाग है। यूजर की जरूरत और हार्डवेयर की क्षमता के बीच जो अंतर होता है उसकी यह पूर्ति करता है। सिस्टम सॉफ्टवेयर के बिना कम्प्यूटर बिल्कुल अप्रभावी होगा और इसे ऑपरेट करना भी असंभव होगा।

M1 R4 कंपाइलर Study Material in Hindi

कंपाइलर एक प्रोग्राम है जो हाई लेवल लैग्वेज के प्रोग्राम को मशीन लैंग्वेज में अनुवादित करता है। ये सभी प्रकार की लिमिट, रेंज एवं ऐरर की जाँच करता है। लेकिन इसका प्रोग्राम एकजीक्यूशन टाइम काफी अधिक होता है और यह मेमोरी का एक बड़ा हिस्सा घेरता है। इसमें धीमी गति और निम्न कुशलता वाली मेमोरी का प्रयोग होता है। यदि कंपाइलर उसी कम्प्यूटर पर रन करता है जिसके लिए यह ऑब्जेक्ट कोड बनाता है, तो इसे सेल्फ या रेसीडंट कंपाइलर कहते हैं। यदि एक कंपाइलर किसी अन्य कम्प्यूटर पर रन करता है जिसके लिए यह ऑब्जेक्ट कोड नहीं बनाता है तो इसे क्रॉस कंपाइलर कहते हैं।

M1 R4 इंटरप्रिटर Study Material Notes in Hindi

इंटरप्रिटर एक प्रोग्राम होता है जो हाई लेवल लैंग्वेज के प्रोग्राम के एक एक स्टेटमेंट को मशीन कोड में ट्रांसलेट करके से ऐक्जीक्यूट करता है। इसी तरीके से यह आगे बढ़ता जाता है जब तक कि यह प्रोग्राम के सभी स्टेटमेंटों को ट्रांसलेट करके ऐक्जीक्यूट न कर ले। दूसरी तरफ कंपाइलर पूरे हाई लेवल लैंग्वेज प्रोग्राम को एक या दो बार में ही ट्रांसलेट करके मशीन कोड में परिवर्तित कर देता है। कंपाइलर, इंटरप्रिटर की अपेक्षा 5 से 25 गुना तेज होता है। एक इंटरप्रिटर, कंपाइलर की तुलना में छोटा प्रोग्राम होता है। इसमें कम मेमोरी स्पेस की जरूरत होती है। कंपाइलर द्वारा प्रस्तुत ऑब्जेक्ट प्रोग्राम को भविष्य में उपयोग करने के लिए स्थाई रूप से सेव करके रखा जाता है। जबकि दूसरी तरफ इंटरप्रिटर द्वारा प्रस्तुत स्टेटमेंटों के ऑब्जेक्ट कोड को सेव नहीं किया जाता है। यदि एक निर्देश अगली बार उपयोग किया गया तो इसे फिर से मशीन कोड में इंटरप्रिट और ट्रांसलेट किया जाता है।

M1 R4 कॉमन हाई लेवल लैग्वेज एवं उनके ऐप्लीकेशन Study Material in Hindi 

हाई लेवल लैग्वेज सीखने में आसान होती है तथा ऐप्लीकेशन के विकास में इनका व्यापक उपयोग होता है। इस कैटेगरी के प्रोग्राम कम्प्यूटर हार्डवेयर के व्यवहार के वर्णन की अपेक्षा इसके सॉल्यूशन के लिए ज्यादा चिंतित होते हैं। फोर्ट्रान, C, C++ एवं बेसिक आदि हाई लेवल लैग्वेज के कुछ उदाहण हैं। विशेष सॉफ्टवेयर जिन्हें कंपाइलर अथवा इंटरप्रिटर कहते हैं, कम्प्यूटर पर ऐक्जीक्यूट होने से पहले ही इन हाई लेवल लैग्वेज प्रोग्राम को मशीन कोड में बदल देते हैं।

C लैंग्वेज

यह एक जनरल परपस हाई लेवल लैग्वेज है। इस लैग्वेज को 1970 में अमेरिका की कंपनी,  Bell Telephone Laboratories  ने बनाया था। यह इंटर्नल प्रोसेसर रजिस्टरों में मैनीपुलेशन की अनुमति देती है और इसलिए प्रोग्रमर लो लेवल मशीन निर्देशों को लिख सकता है।  C  में एसेबली लैग्वेज के गुण होते हैं। यह एक छोटी और संक्षिप्त भाषा है। यह फंक्शनों की एक लाइब्रेरी का प्रयोग करती है जो सबरूटीन की तरह होते हैं। C प्रोग्राम माड्यूलर और स्ट्रक्टर्ड कॉन्सेप्ट का प्रयोग कर सकते हैं। एक समस्या को कई छोटे छोटे टास्क में विभाजित किया जा सकता है और प्रत्येक टास्क को हल करने के लिए एक फंक्शन का प्रयोग किया जाता है।  C प्रोग्राम फंक्शन के एक ग्रुप को रिप्रेजेन्ट करता  हैजो एक साथ जुड़ कर समस्या का समाधान प्रस्तुत करते है। इस लैग्वेज का प्रयोग सिस्टम प्रोग्रामरों द्वारा कई जटिल प्रोग्राम जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम को विकसित करने में किया जाता है

FORTRAN (फोर्ट्रान)

यह Formula Translation का संक्षिप्त रूप है। फोर्ट्रान को 1957 में IBM कंपनी ने बनाया था। यह लैग्वेज वैज्ञानिक और इंजीनियरिंग कम्पयूटेशन के लिए काफी उपयोगी है क्योंकि इसमें जटिल गणितीय ऑपरेशनों को हल करने के कई फंक्शन होते हैं। यह एक कॉम्पैक्ट प्रोग्रामिंग लैग्वज है। वैज्ञानिक तथा इंजीनियरिंग प्रोग्रामों की कई लाइब्रेरी फोर्ट्रान में लिखी गई है और यूजर के लिए उपलब्ध है। यह बड़ी बिजनेस फाइलों की प्रोसेसिंग के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके कई सारे वर्जन है। पहले फोर्ट्रान IV कापी प्रचलित थी। 1977 में अमेरिकन नेशनल स्टैडर्ड इंस्टीटयूट ने क स्टैडर्ड प्रकाशित किया जिसे फोर्टान 77 कहते हैं। इसका उददेश्य है कि सबी निर्मात एक ही प्रकार की लैग्वेंज का प्रयोग करें।

C++

C++ का विकास C का प्रयोग करके किया गया है जिसमें इसके सिटैक्स (Syntex) के लिए C  को ही बैस बनाया गया है यद्दपि  C++  का प्रयोग C की तरह प्रोसीज्योरल (Procedural) प्रोग्राम लिखने में होता है, इसकी वास्तविक उपोयगिता ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड प्रोग्राम लिखने मं ही। C++  में कई सारे बेहतर सिटैक्स ऐलीमेंट होते हैं जो हमें आसानी से प्रोग्राम को लिखने तथा पढ़ने में मदद करते हैं। इस प्रकार C++ प्रोग्राम, एक्जिस्टिंग सिटैक्स के अलावा ऑब्जेक्ट ओरिएंटेड के अतिरिक्त सैट की सुविधा भी प्रदान करता है।

Java (जावा)

जावा एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है जो प्लैटफॉर्म इंडीपेडेट होती है एवं इंटरनट के प्रयोग के लिए यह काफी सुरक्षित है। Java को एक सरल ऑब्जेक्कट ओरिएंटेड, संतुलित ( robust), सुरक्षित, आर्कीटेक्चर – न्यूट्रल, पोर्टेबल, हाई पर्फार्मेस मल्टीथ्रेडेड एवं डायनामिक लैंग्वेज के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। C और C++ जैसी जनरल परपस लैग्वेज की अपेक्षा, जावा डिजाइनरों ने जावा लैग्वेज को इस प्रकार से डिजाइन किया है तिकि इसके API सीखने और इस्तेमाल करने में आसान हों। जावा प्रोग्रामिंग लैग्वेज का सिटैक्स भी C पर ही आधारित है। इसके कई ऑब्जेक्ट ओरिएटेड प्रोग्रामिंग कॉन्सेष्ट C++ की तरह ही होते हैं। जावा की सफलता के महत्वपूर्ण कारण है, एक एंटरप्राइज के वातावरण में ऑब्जेक्टों की नेटवर्किग र डिस्ट्रीब्यूट करने की इसकी विशेषता।

Prolong (प्रोलॉग)

यह लैंग्वेज उन प्रोग्रामों के विकास के लिए उपयुक्त है जोनमें जटिल लॉजिकल ऑपरेशन होते हैं। प्रोलॉग का मुख्य प्रयोग आर्टिफिशल इंटिलजेस में होता है। यह लैग्वेज फ्रांश में विकसित हुई थी। जापानियों ने इसे अपने 3rd generation  कम्प्यूटर प्रोजेक्ट के लिए स्टैडर्ड लैंग्वेज चुना है। यह बड़े डाटाबेसों को हैंडल करने और नियम आधिरत एक्सपर्ट सिस्टम ऐप्लीकेशन के लिए काफी उपयुक्त है। प्रोलॉग का विस्तृत रूप है प्रोग्रामिंग इन लॉजिक। यह गणितीय लॉजिक पर आधारित है। प्रोलॉग में थय् और नियमों का एक सैट होता है जो दिए गए डोमेन में ऑब्जेक्टों के बीच के संबंध और ऑब्जेक्ट की व्याखया करते है। वों स्टेटमेंट जो बिना शर्त के सही होते हैं तथ्य (facts) कहलाते हैं। जबकि नियम ( rules) गुणों और संबंधों को प्रदान करते हैं जो दी गई परिस्थियों के आधार पर सही होते हैं।

LISP (लिस्प)

लिस्ट प्रोसेसिंग का संक्षिप्त रूप LISP (लिस्प) है। इसे 1960 में McCarthy ने विकसित किया था। लिस्प नॉन न्यूमरिक ऑपरेशनों जिसमें लॉजिकल ऑपरेशन होते हैं के लिए उपयुक्त होती है। इसका व्यापक प्रयोग आर्टिफिशल इंटेलीजेंस, और पैटर्न रिकॉगनीशन में होता है। कम्प्यूटर गेमों की डिजाइनिंग तथा सिद्धान्तों को सत्यापित (Proving Theorems) करने में भी इसका प्रयोग किया जाता है। टेक्स्ट की लंबी स्ट्रिंग या सूची की सॉर्टिग, हैडलिंग एवं सर्चिग में भी लिस्प का प्रयोग होता है। अत: अक्सर इसका प्रयोग कम्प्यूटराइज्ड ट्रांसलेटरों को इंप्लीमेंट करने में होता है। इसका प्रयोग मुख्य तौर पर बड़े कम्प्यूटरों में होता है पर लिस्प कंपाइलर PC के लिए भी उपलब्ध होते हैं।

वीजुअल बेसिक

बेसिक भाषा से यह वीजुअल बैसिक विकसित हुई है। इसमें सैंकड़ों स्टेटमेंट, फंक्शन और कीवर्ड होते हैं जिनमें से कई विंडोज GUI से सीधे जुड़े होते है। इसमें कार्य करना इतना आसान होता है कि इसके कुछ की वर्डस को सीख कर, एक नया यूजर भी एक बहुत ही उपयोगी ऐप्लीकेशन तैयार कर सकता है। इस लैंगेवेज की पॉवर इतनी होती है कि यह प्रोफेशनल लोगों कोकम से कम समय में एक बहुत ही सॉफिस्टकेटेड पैकेज बनाने की अनुमति देता है। चाहें आपका लक्ष्य अपने लिए एक छोटी यूटिलिटी बनाना हो या अपने वर्कग्रुप के लिए, एक बड़ी एटंरप्राइज के लिए सिस्टम बनाना हो या डिस्ट्रीब्यूटेड ऐप्लीकेशन जो इंटरनेट द्वारा रूरे ग्लोब पर फैल सके, वीजुअल बैसिक में आपकी जरूरत के सारे टूल्स मौदूद हैं।

M1 R4 फ्री डोमेन सॉफ्वेयर Study Material Notes in Hindi

फ्री डोमेन सॉफ्वेयर ऐसे प्रोग्राम होते हैं जो बिना किसी कीमत के उपलब्ध होते हैं। लेकिन ये मालिक के कॉपीराइट होते हैं। जिसका अर्थ है आप इन प्रोग्रामों को बेच नहीं सकते हैं अथवा अपने स़ॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कार्य के लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इसका एक उदाहरण है LINUX प्रोग्राम। कुछ फ्री डोमेन सॉफ्टवेयर भी अन कॉपीराइटेड होते हैं कुछ सिर्फ जरा सी डिस्ट्रीब्यूशन प्राइस ही लेते हैं।

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