SSC CGL TIER 1 Botany Study Material In Hindi

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वनस्पति विज्ञान

SSC CGL TIER 1 Botany Study Material In Hindi
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विविध प्रकार के पेड़, पौधे तथा उनके क्रियाकलापों के अध्ययन को वनस्पति विज्ञान कहा जाता है थ्रियोफ्रन्टस को वनस्पति विज्ञान का पिता/जनक कहा जाता है।

Life Cycle Of Angiospermic Plants Study Material In Hindi

आवृत्तबीजी पौधे का जीवन-चक्र

Root

जड़

स्तम्भ मूल (Prop root)   –   बरगद

अवस्तम्भ मूल (Stilt root) –   मक्का, गन्ना

अधिपादप मूल (Epiphytic root) –   ऑर्किड

पुलिकित जड़ (Fascicul ated root)   –   डहेलिया

रेशेदार जड़ (Fibrous root)  –   प्याज

पत्तीय जड़ (Leafy root)   –   ब्रायोफाइलम

आरोही जड़ (Climbing root) –   पान, पोथोस

बटरस जड़ (Buttress root) –   टर्मिनेलिया

चूषक जड़ (Sucking root)  –   अमरबेल

श्वसन जड़ (Respiratory root)   –   जूसिया।

Stem

तना

रुपान्तरित तनों के उदाहरण

प्रकन्द (Rhizome)                 –   कमल, अदरक, हल्दी

कन्द (Tuber)                 –   आलू

घनकन्द (Corm)               –   अरबी, कचालू, जिमीकन्द, केसर

शल्ककन्द  (Bulb)            –   प्याज, लहसुन

ऊपरीभूस्तरी (Runner)             –   घास, स्ट्रॉबेरी

अन्त:भूस्तरी  (Sucker)          –   गुलदाऊदी, पोदीना

भूस्तरी  (Stolon)               –   अरबी

स्तम्भ प्रतान (Stem tendril)           –   अंगूर

स्तम्भ कंटक  (Stem thorn)          –   नींबू, करौंदा

पर्णाभ स्तम्भ (Phylloclade)          –   नागफनी, यूफोर्बिया

पत्रकन्द (Bulbil)               –   गलेबा, डायोस्कोरिया

पर्णाभपर्व  (Cladode)             –   सतावर व रस्कस।

  • लहसुन की अभिलाक्षणिक गन्ध का कारण सल्फर यौगिक होता है।
  • कैप्सेसिन की उपस्थिति के कारण लाल मिर्च तीखी होती थी।

Main Fruits And Their Edible Parts For SSC CGL TIER 1

प्रमुख फल एवं उनके खाने योग्य भाग

फल का नामवनस्पतिक नामफल का प्रकारफल का खाने योग्य भाग
सरल फल
गेहूँट्रिटिकम स्पीशीजकैरीओप्सिसभ्रूणपोष एवं भ्रूण
मटरपाइसम सटाइवमलेग्यूमपकने पर बीज
मूँगफलीऐराकिस हाइपोजियालोमेन्टमबीज
अंगूरविटिस विनीफेराबेरीफलभित्ति एवं बीजाण्ड
टमाटरलाइकोपर्सिकम

ऐस्कुलेन्टम

बेरीफलभित्ति एवं बीजाण्ड
अमरुदसाइडियम ग्वाजावाबेरीफलभित्ति एवं बीजाण्ड
केलामूसा सेपिएन्टमबेरीफलभित्ति एवं बीजाण्ड
खजूरफोइनिक्स डेक्टाइलीफेराबेरीमीजोकार्प
आममेन्जीफेरा इण्डिकाड्रूपमीजोकार्प
अखरोटजगलेन्स रीजियाड्रूपकॉटीलीडन्स
पिस्टासियापिस्टासिया वर्वाड्रूपमीजोकार्प
नट
बादामप्रूनस एमाइगडेलसड्रूपबीज
नारियलकोकोस न्यूसीफेराड्रूपअन्त: फलभित्ति, टेस्टा, कॉटीलीडन एवं एवं एम्ब्रियो
नाशपातीपाइरस कोमुनिसपोमफ्लैसी थैलैमस
सेबपाइरस मैलसपोमफ्लैसी थैलैमस
लेमनसिट्रस मेडिकाहेस्पेरिडियमएन्डोकार्पिक ज्यूसी हेयर्स
ककड़ीकुकूमिस यूटिलीसीमापीपोसम्पूर्ण फल
लीचीलीची चाइनेन्सिसनटफ्लेशी ऐरिल
काजूएनाकार्डियम

ऑक्सीडेनटेल

नटकोटीलीडन्स एवं फ्लेशी पेडिसिल
अनारप्रूनिका ग्रेनेटमबालुस्टा या बालोस्टाज्यूसी टेस्टा
सुपारीऐरिका कटेचूबेरीभ्रूणपोष
पुंजफल
कमलनेलुम्बियम स्पीसियोसमऐटिरियो ऑफ एकीनथैलैमस एवं बीज
रसभरीरबस आइडेकसऐटिरियो ऑफ डूप्सथैलैमस
सेग्रथिल फल
कटहलआर्टोकारपस

इन्टीग्रिफोलिया

सोरोसिसब्रैक्ट्स, थेरिएन्थ  एवं बीज
शहतूतमोरस इन्डिकासोरोसिसपेरिएन्थ
अनन्नासअनानास सेटाइवससोरोसिसपेड्यून्किल, ब्रैक्ट्स, थेरिएन्थ एवं बीज
अंजीरफाइकस कैरिकासाइकोनसपेड्यून्किल एवं बीज

Know Leaf For SSC CGL TIER 1

पत्ती

  • एकबीजपत्री पौधों में समानान्तर तथा द्वीबीजपत्री पौधों में जालिकारुपी शिरा विन्यास पाया जाता है।
  • पत्तियों के तने पर लगने की व्यवस्था को पर्णविन्यास (Phyllotaxy) कहते हैं। यह एकान्तर, सम्मुख, अध्यारोपित, क्रॉसिल तथा चक्करदार होता है।

Sexual Reproduction Study Material In Hindi

लैंगिक जनन

  • नर युग्मक तथा अण्ड कोशिका के संयोजन से युग्मनज (Zygote) बनता है। इसे ही लैंगिक जनन कहा जाता है।
  • परागकणों के परागकोष से मुक्त होकर उसी जाति के पौधों के जायांग की वर्तिकाग्र तक पहुँचने की क्रिया परागण (Pollination) कहलाती है।
  • नर युग्मक एवं अण्ड कोशिका के संयोजन को निषेचन (Fertilization) कहते हैं।
  • आवृतबीजी पौधों में द्वीनिषेचन (Double Fertilization) अर्थात् त्रिक संलयन (Tripple Fusion) होता है।
  • त्रिक संयोजन के फलस्वरुप त्रिगुणित भ्रूणपोष (Endosperm) बनता है।

विभिन्न प्रकार के परागण

परागण

कारक

वायु परागणवायु द्वारा
कीट परागणकीटों द्वारा
जल परागणजल द्वारा
जन्तु परागणजन्तु द्वारा
पक्षी परागणपक्षियों द्वारा
मैलेकोफिलीघोंघे द्वारा
चिरोप्टेरोफिलीचमगादड़ द्वारा

Plants Nutrition  Study Material In Hindi

पादप पोषण

  • पौधों की विभिन्न उपापचय क्रियाओं के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा पौधों को खाद्य-पदार्थों के ऑक्सीकरण से प्राप्त होती है। पोषण-विधि के आधार पर पौधों को दो भागों में बाँटा गया है।
  • परपोषित पौधे अपना भोजन स्वयं नहीं बना सकते। अत: वे अपना भोजन अन्य स्त्रोतों से प्राप्त करते हैं। भोजन-स्त्रोत के आधार पर परपोषित पौधे चार प्रकार के होते हैं—1. परजीवी 2. मृतोपजीवी 3. सहजीवी 4. कीटभक्षी।
  • कीटभक्षी पौधे आंशिक रुप से स्वपोषित एवं आंशिक रुप से परपोषित होते हैं।
  • पर्णहरिम की उपस्थिति के कारण कीटभक्षी पौधे अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, परन्तु नाइट्रोजन की पूर्ति के लिए कीटों का भक्षण करते हैं। उदाहरण—नेपेन्थीस, यूट्रीकुलेरिया, ड्रोसेरा आदि।

Viruses For SSC CGL TIER 1

विषाणु

  • विषाणु की खोज रुस के वैज्ञानिक इवानविस्की ने सन् 1892 में की। तम्बाकू के माजैक रोग पर खोज के समय इनकी प्रकृति सजीव और निर्जीव दोनों प्रकार की होती है इसी कारण इन्हें सजीव और निर्जीव की कड़ी भी कहा जाता है।
  • विषाणु के निर्जीव होने के लक्षण
  1. ये काशा रुप में नहीं होते हैं।
  2. इनको क्रिस्टल बनाकर निर्जीव पदार्थ की भाँति बोतलों में भरक वर्षों तक रखा जा सकता है।
  • सजीव जैसे लक्षण
  1. इनके न्युक्लिक अम्ल का द्विगुणन होता है।
  2. किसी जीवित कोशिका में पहुँचते ही ये सक्रिय हो जाते हैं, और एन्जाइमों का संश्लेषण करने लगते हैं।

परपोषी प्रकृति के अनुसार विषाणु तीन प्रकार के होते हैं

  1. पादप विषाणु इसका न्यूक्लिक अम्ल में आर. एन. ए. (RNA) होता है।
  2. जन्तु विषाणु इनमें डी.एन.ए. (DNA) या कभी आर.एन.ए. (RNA) भी पाया जाता है।
  3. बैक्ट्रियोफेज (Bacteriophage) या जीवाणुभोजी ये केवल जीवाणुओं पर आश्रित रहते हैं। ये जीवाणुओं को मार डालते हैं। इनमें डी.एन.ए. (DNA) पाया जाता है; जैसे—टी-2 फैज।
  • जिस विषाणु में आनुवंशिक पदार्थ होता है उसे रेट्रोविषाणु कहते हैं।

SSC CGL Study Material Sample Model Solved Practice Question Paper with Answers

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