SSC CGL TIER 1 Work Study Material In Hindi

SSC CGL TIER 1 Work Study Material In Hindi

SSC CGL TIER 1 Work Study Material In Hindi

कार्य (Work)

SSC CGL TIER 1 Work Study Material In Hindi
SSC CGL TIER 1 Work Study Material In Hindi

कार्य, बल तथा बल की दिशा में वस्तु के विस्थापन के गुणनफल के बराबर होता है। इसका मात्रक जूल है।

कार्य (W)

=बल (F)x बल की दिशा में विस्थापन (d)

Know Positive Work Done For SSC CGL TIER 1

धनात्मक कार्य

यदि बल विस्थापन के समान्तर हो, तो कार्य धनात्मक होता है। उदाहरण— जब घोड़ा समतल सड़क पर गाड़ी को खींचता है तथा जब कोई वस्तु स्वतन्त्र रुप से गुरुत्व के अधीन गिरती है।

Know Negative Work Done For SSC CGL TIER 1

ऋणात्मक कार्य

यदि बल विस्थापन के विपरीत हो, तो कार्य ऋणात्मक होता है। उदाहरण— जब कोई वस्तु एक खुरदरी सतह पर फिसलती है।

Know Zero Work Done SSC CGL TIER 1

शून्य कार्य

यदि बल व विस्थापन, परस्पर लम्बवत् होते हैं, तो किया गया कार्य शून्य होता है तथा बल या विस्थापन किसी एक के शून्य होने पर भी कार्य शून्य होता है।

उदाहरण (Example) — जब कोई वस्तु वृत्त का एक पूरा चक्कर लगाती है, जब कुली सिर पर बोझ लिए समतल प्लेटफॉर्म पर चलता है तथा जब व्यक्ति अधिक बोझ लिए हुए अपने स्थान से विस्थापित नहीं होता।

सरल मशीन

  • सरल मशीन एक ऐसी युक्ति है, जिसमें किसी सुविधाजनक बिन्दु पर बल लगाकर, किसी अन्य बिन्दु पर रखे हुए भार को उठाया जाता है।
  • यह बल-आघूर्ण के सिद्धान्त पर कार्य करती है।
  • उत्तोलक, घिरनी, आनत तल, स्क्रूजैक आदि सरल मशीन हैं।
  • कैंची, प्लायर्स, सिंडासी, शीशा झूला, साइकिल के ब्रेक, हैण्ड पम्प प्रथम श्रेणी के उत्तोलक हैं।
  • सरौता, नींबू निचोड़ने की मशीन, कूड़ा ढोने की मशीन आदि द्वीतीय श्रेणी के उत्तोलक हैं।
  • चिमटा, किसान का हल, मनुष्य का हाथ तृतीय श्रेणी के उत्तोलक हैं।

Power Study Material In Hindi

शक्ति

कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं। यह एक अदिश राशि है, इसका मात्रक वाट है।

शक्ति = कार्य/समय = जूल/सेकण्ड =Watt (वाट)

1 वाट सेकण्ड = 1 जूल,

1 वाट घण्टा = 3600 जूल,

1 किलोकवाट घण्टा = 3.6 x 106  जूल

1 अश्व शक्ति = 746 वाट

Energy Study Material In Hindi

ऊर्जा

किसी वस्तु की कार्य करने की क्षमता को उस वस्तु की ऊर्जा कहते हैं।

  • ऊर्जा एक अदिश राशि है, इसका मात्रक जूल है।
  • कार्य द्वारा प्राप्त ऊर्जा यान्त्रिक ऊर्जा कहलाती है, जो दो प्रकार की होती है
  1. गतिज ऊर्जा
  2. स्थितिज ऊर्जा
  • किसी वस्तु में उसकी गति के कारण कार्य करने की जो क्षमता होती है, उसे उस वस्तु की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) कहते हैं।
  • गतिज ऊर्जा = ½ mv2 =p2/2m

जहाँ, m द्रव्यमान, v वेग तथा p संवेग है।

  • वायु की गतिज ऊर्जा पवन चक्की को चलाने के काम आती हैं।
  • गतिज ऊर्जा के कारण ही बन्दूक की गोली लक्ष्य में धंस जाती है।
  • किसी वस्तु में उसकी विशेष स्थिति के कारण ऊर्जा उसकी स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy) कहलाती है; जैसे— तनी हुई स्प्रिंग या कमानी की ऊर्जा तथा घड़ी की चाभी में संचित ऊर्जा।
  • गुरुत्व बल के विरुद्ध संचित स्थितिज ऊर्जा का व्यंजक है PE = mgh
  • ऊर्जा को न तो उत्पन्न किया जा सकता है और न ही नष्ट किया जा सकता है केवल एक रुप में दूसरे रुप में परिवर्तित किया जा सकता है, इसे ऊर्जा संरक्षण का सिद्धान्त कहते हैं।

Some Devices That Alter Energy For SSC CGL TIER 1

ऊर्जा रुपान्तरित करने वाले कुछ उपकरण

उपकरण

ऊर्जा का रुपान्तरण

डायनेमोयान्त्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
विद्युत मोटरविद्युत ऊर्जा को यान्त्रिक ऊर्जा में
माइक्रोफोनध्वनि ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
लाउडस्पीकरविद्युत ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में
विद्युत बल्बविद्युत ऊर्जा को प्रकाश व ऊष्मा ऊर्जा में
सोलर सेलसौर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
मोमबत्तीरासायनिक ऊर्जा को प्रकाश एवं ऊष्मा ऊर्जा में
विद्युत हीटरविद्युत ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा में
जलता हुआ कोयलारासायनिक ऊर्जा को ऊष्मीय ऊर्जा में
प्रकाश विद्युत सेलप्रकाश ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
विद्युत सेलरासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में
सितारयान्त्रिक ऊर्जा को ध्वनि ऊर्जा में

द्रव्यमान ऊर्जा तुल्यता

  • आइस्टीन ने द्रव्यमान तथा ऊर्जा के मध्य एक सम्बन्ध स्थापित किया

E=mc2

जहाँ, c प्रकाश का वेग है।

  • E=mc2 में, द्रव्यमान संरक्षण तथा ऊर्जा संरक्षण का एकीकरण हो जाता है।

SSC CGL Study Material Sample Model Solved Practice Question Paper with Answers

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