NIELIT DOEACC CCC Introduction to Internet Study Material Notes in Hindi English

NIELIT DOEACC CCC Introduction to Internet Study Material Notes in Hindi English

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NIELIT DOEACC CCC Introduction to Internet Study Material Notes in Hindi English

NIELIT DOEACC CCC Introduction to Internet Study Material Notes in Hindi English

इंटरनेट, www तथा वेब ब्राउजर का परिचय  (Introduction to Internet WWW and Web Browser)

नेटवर्क आपस में एक- दूसरे से जुड़े कम्प्यूटरों का एक समूह होता है, जो क दूसरे से संचार स्थापति करने तथा सूचनाओं और संसाधनों का साझा प्रयोग करने में सक्षम होते हैं। किसी नेटवर्क को स्थापित करने के ले एक प्रेषक, माध्यम तथा प्राप्तकर्ता की आश्यकता होती है।

इस नेटवर्किग की मदद से यूजर प्रोग्रामो, सन्देशो सूचनाओं तथा विभिन्न उपकरणों को एक ही जगह पर रहकर साझा कर सकता है।

A computer network is a set of connected computers. A set of computers are connected together for the purpose of sharing data, information and resources. These computers are called modes. Connected computers  can share resources, like access to the Internet, printers, file servers etc. a network is a multipurpose connection, that allows a single computer to do more than its ability.

DOEACC CCC नेटवर्किंग के प्रकार (Types of Networking) Study Material in Hindi

नेटवर्किग ऐसी तकनीक है, जिसके द्वारा कम्प्यूटर्स अपने रिसोर्सेस को शेयर कर सकते हैं। किसी नेटवर्क के कम्प्यूटर किसी अकेली स्टैण्डएलोन मशीन की तुलना में ज्यादा स्टोरेज क्षमता तथा प्रोसेसिंग पावर से लैस होते हैं। इसके अतिरिक्त ये कम्प्यूटर विभिन्न पेरिफेरल युक्तियों को भी शेयर कर पाते है, जिससे उन्हें अलग अलग इंस्टॉल करने पर लगने वाले समय तथा पैसे की भी बचत होती है।

Networking is a technique used to link computers together for the purpose of sharing data, information and other resources. Computers withim a network can share peripheral devices also and thus the time used for installing them can be saved. Networks are build with a combination of computer hardware and software. Networking is divided in various types based on their behavior-

  1. ट्रांसमिशन मीडिया के आधार पर (Based on Transmission Media)- i.e. Wired (UTP, coaxial cables, fiber-optics cables) and wireless.
  2. नेटवर्क के साइज के आधार पर (Based on Network size)- i.e. Lan, MAN, WAN etc.
  3. मैनेजमेण्ट के आधार पर (Based on Management method) Peer-to- peer and client – server method.
  4. कनेक्टिविटी के आधार पर ( Based on Connectivity) Various topologies like Bus, Star or Mask Topology.

CCC ट्रांसमिशन मीडिया के आधार पर (On the basis of Transmission Media) Notes in Hindi and English

किसी कम्प्यूटर से टर्मिनल या किसी टर्मिनल से कम्प्यूटर तक डेटा के संचार के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता होती है, इस माध्यम को कम्प्युनिकेशन लाइन या डेटा लिंक कहते हैं। ये निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-

A Physical environment by which data travels from one computer to another, is called the transmission media. It can be categorized in these two types:

  1. गाइडेड मीडिया (Guided Media or Wired Technologies)
  2. अनगाइडेड मीडिया (Unguided Media or Wireless Technologies)

गाइडेड मीडिया (Guided media)

इसमें डेटा सिग्नल तारों ( Wires) के माध्यम से प्रवाहित होते हैं। इन तारों के द्वारा डेटा का संचार किसी विशेष पथ से होता है। ये तार, कॉपर, टिन या सिल्वर के बने होते हैं।

In these type of media, data Is transferred through wires. Data is transferred through some particular route. These wires are made of copper, tin or silver.

सामान्यत: ये तीन प्रकार के होते हैं

ईथरनेट केबल या टिवस्टेड पेयर (Ethernet Cable or Twisted pair) इस प्रकार के केबल में तार आपस में उलझे (Twisted) होते हैं, जिनके ऊपर एक कुचालक पदार्थ तथा एक अन्य परत का बहरी आवरण (जिसे जैकेट कहते हैं) लगा होता है। दो में से एक तार सिग्नल्स को प्राप्तकर्ता तक पहुँचने के लिए तथा दूसरा अर्थिग के ले उपयोग किया जाता है। इस केबल का प्रयोग छोटी दूरी में डेटा संचार के लिए करते हैं। इस तार का प्रयोग लोकल एरिया नेटवर्क (LAN) में किया जाता है।

कोएक्सिएल केबल (Coaxial Cable ) इस प्रकार के केबल के दावारा उच्च आवृत्ति वाले डेटा को संचालित किया जाता है। यह केबल उच्च गुणवत्ता का संचार माध्यम है। इस केबल को जमीन या समुद्र के नीचे से ले जाया जाता है। इस केबल के केन्द्र में ठोस तार होता है, जो कुचालक तार (Wire) से घिरा होता है। इस कुचालक तार के ऊपर तार की जाली बनी होती है, जिसके ऊपर फिर कुचालक की परत होती है। यह तार अपेक्षाकृत महँगा होता है, किन्तु इसमें अधिक डाटा के संचार की क्षमता होती है इसका प्रयोग टेलीविजन नेटवर्क में किया जाता है।

फाइबर- ऑप्टिक केबल (Fiber-Optic Cable)  यह एक नई तकनीक है, जिसमें धातु के तारों की जगह विशिष्ट प्रकार के ग्लास या प्लास्टिक के फाइबर का उपयोग डेटा संचार के ले कहते हैं। केबल हल्की तथा तीव्र गति वाली होती हैं। इस केबल का प्रयोग टेलीकम्युनिकेशन और नेटवर्किग के लिए होता है।

अनगाइडेड मीडिया (Unguided Media)

केबल के महँगा होने तथा इसके रख रखाव का खर्च अधिक होने के कारण डेटा संचार के लिए इस तकनीक का प्रयोग किया जाता है। अनगाइडेड मीडिया में डेटा का प्रवाह बिना तारों वाले संचार माध्यमों के द्वारा होता है।

इस मीडिया में डेटा का प्रवाह तरंगों के माध्मस से होता हैं। चूँकि इस माध्यम से डेटा का संचार बिना तारों (तरंगों के ) के द्वारा होता है, इसले इन्हें अनगाइडेड मीडिया या वायरलेस तकनीक कहा जाता है।

रेडियोवेव ट्रांसमिशन (Radiowave Transmission) जब दो टर्मिनल रेडियों आवृत्तियों (Radio frequencies) के माध्यम से सूचना का आदान प्रदान करते हैं, तो इस प्रकार के संचार को रेडियोवेव ट्रांसमिशन कहा जाता है। ये रेडियों तरंगे सर्वदिशात्मक (Omnidirectional) होती हैं तथा लम्ब दूरी के संचार के लिए प्रयोग की जा सकती हैं।

रेडियोवेव ट्रांसमिशन वायर्ड तकनीक से सस्ता होता है तथा मोबाइलिटी (Mobility) प्रदान करता है, परन्तु इस पर वर्षा, धूल आदि का बुरा प्रभाव पड़ता है।

रेडियोवेव ट्रांसमिशन वायर्ड तकनीक से सस्ता होता है तथा मोबाइलिटी (Mobility) प्रदान करता है, परन्तु इस वर्षा, धूल आदि का बुरा प्रभाव पड़ता है।

माइक्रोवेव ट्रांसमिशन (Microwave Transmission) इस सिस्टम में सिग्नल्स खुले तौर पर (बिना किसी माध्यम के) रेडियों सिग्नल्स की तरह संचारित होते हैं। इस सिस्टम में सूचना का आदान प्रदान आवृत्तियों के माध्यम से किया जाता है।

माइक्रोवेव इलेक्ट्रोमैगनेटिक (Electro magnetic) तरंगें होती हैं जिनकी आवृत्ति लगभग 0.3 GHZ से 300 GHZ  के बीच में होती है। ये एकल दिशात्मक (Uni- directional) होती हैं। एक कोएक्सियल केबल की तुलना में तीव्र गति से संचाल प्रदान करता है।

इसमें अच्छी बैण्डविथ होती है, किन्तु इस पर वर्षा, धूल आदि (अर्थात खराब मौसम) का बुरा प्रभाव पड़ता है। इसका प्रयोग सेल्यूलर नेटवर्क तथा टेलीविजन ब्रॉडकास्टिंग (Broadcasting) में होता है।

इनफ्रारेड ट्रांमिशन (infrared Wave Transmission) इन्फ्रारेड वेव छोटी दूरी के संचार के लिए प्रयोग में लाए जाने वाली उच्च आवृत्ति की तरंगे होती हैं।

ये तरंगे ठोस ऑब्जेक्ट (solid objects) जैसे कि दीवार आदि के आर- पार नहीं जा सकती हैं। मुख्यतया, ये TV रिमोट, वायरलेस स्पीकर आदि में प्रयोग की जाती हैं।

सेटेलाइट कम्प्यूनिकेशन (Satellite Communication) सेटेलाइट संचार तीव्र गति का डेटा संचार माध्यम हैं यह लम्बी दूरी के संचार के लिए सबसे आदर्श संचार माध्यम होता है।

अन्तरिक्ष में स्थित सेटेलाइट (उपग्रह) को जमीन पर स्थित स्टेशन में सिग्लन भेजते हैं तथा सेटलाइट उस सिग्नल का विस्तार करके उसे किसी दूसरे दूर स्थित स्टेशन पर वापस भेजे देता है।

इस सिस्टम के द्वारा एक बड़ी मात्रा में डेटा को अधिकतम दूरी तक भेजा जा सकता है। इसका प्रयोग फे, टीवी तथा इण्टरनेट आदि के लिए सिग्नल्स भेजने में होता है।

NIELIT CCC कम्प्यूटर नेटवर्क के प्रकार (Types of Computer Network) Study Material in Hindi And English

साइज के आधार पर (On the Basis of Size)

साइज के आधार पर नेटवर्कों को निम्नलिखित प्रकार से बाँटा जा सकता है-

लैन (Local Area Network –LAN) ऐसे नेटवर्कों के सभी कम्प्यूटर एक सीमित क्षेत्र में स्थित होते हैं। यह क्षेत्र लगभग 1 किलोमीटर की सीमा में होना चाहिए, जैसे कोई बड़ी बिल्डिंग या उनका एक समूह।

लोकल एरिया नेटवर्क में जोड़े गए उपकरणों की संख्या अलग अलग हो सकती है। इन उपकरणों को किसी संचार केबल द्वारा जोड़ा जाता है। लोकल एरिया नेटवर्क के द्वारा कोई संगठन अपने कम्प्यूटरो, टर्मिनलों, कार्यस्थलों तथा अन्य बाहरी उपकरणों को एक दक्ष (Efficient) तथा किफायती (Cost Effective) विधि से जोड़ सकता है, ताकि वे आपस में सूचनाओं का आदान प्रदान कर सकें तथा सबको सभी साधनों का लाभ मिल सके।

Lan is a network which is small in size in comparision to MAN and WAN. It is limited within a building or a compus in which each computer is connected through LAN cables and they share data to one another. In other words, we can say that, the network within the local area or limited area is known as local area or limited area is known as local Area Network.

मैन (Metropolitan area Network – MAN) जब बहुत सारे लोकल एरिया नेटवर्क अर्थात् लैन किसी नगर या शहर के अन्दर एक दूसरे से जुड़े रहते हैं तो इस प्रकार के नेटवर्क को मेट्रोपोलिटन एरिया नेटवर्क कहा जाता है। इसे संक्षेप में मैन भी कहते हैं।

A network little wider and larger than Local Area Network and spread over a city or town and provide network access to one another is known as metropolitan Network.

वैन (Wide Area Network – WAN) वाइड एरिया नेटवर्क स जुड़े हुए कम्प्यूटर तथा उपकरण एक दूसरे से हजारों किलोमीटर की भौगोलिक दूरी पर भी स्थित हो सकते हैं। इनका कार्यक्षेत्र कई महादीपों तक फैला हो सकता है। यह एक बड़े आकार का डेटा नेटवर्क होता है। इसमें डेटा के संचारण की दर लोकल एरिया नेटवर्क की तुलना में कम होती है। अधिक दूरी के कारण प्राय: इनमें माइक्रोवेव स्टेशनों या संचार उपग्रहों (Communication Satellites) का प्रयोग सन्देश आगे भेजने वाले स्टेशनों की तरह किया जाता है।

The network spread over the globe and covers entire world, is facilitated to a computer by internet service providers. It is beggest network across the world in that each computer is connected and share or access the data and information. This network is used all the way now-a-days for e.g. finance sector, banking sector, Share Markets and many more. Through wide area network, we can access the information stored far away on the web server in seconds. The only thing we need is to know the address of that data or information stored.

वाइड एरिया नेटवर्क निम्नलिखित प्रकार के होते हैं-

Private Network

Public Network

Wireless Network

प्राइवेट नेटवर्क (Private Network) प्राइवेट नेटवर्क में वैन को एक्सेस करने के लिए प्राइवेट लोकेशन से दूसरे लोकेशन को जोड़ता है। एक लोकेशन से दूसरे लोकेशन को जोड़ता है। इसमें ऑनर को अपने नेटवर्क पर पूर्ण स्वतन्त्रता होती है जिससे वह बहुत अधिक अमाउण्ट में डाटा का ट्रांसमिशन हाई स्पीड से कर सकता है, जैसे रिलायन्स का अपना नेटवर्क जिस पर केवल रिलायन्स अलग अलग स्थान से काम करता है।

The basic technique used in all forms of private WAN is to use private (or more usually leased) circuits to link the location to be served by the network. Between to be served by the network. Between these fixed points the owner of the network has complete freedom to use the circuits in any way they want. They can use the circuit to carry large quantities of data or for high speed transmission.

पब्लिक नेटवर्क (Public Network) यह वह नेटवर्क होता है, जोकि टेली कम्युनिकेशन कम्पनियों द्वारा चलाया जाता है और किसी भी ऑर्गेनाइजेशन या व्यक्तिगत सब्सिक्रिप्शन के लिए उपलब्ध होता है। उदाहरण के लिए पब्लिक स्विच्ड टेलीफोन नेटवर्क पीएसटीएन पब्लिक स्विच्ड डाटा नेटवर्क (आईएसडीएन)।

These networs are those networks which are installed and run by the telecommunication authorities and are made available to any organisation or individual who subscribe. Examplese include public Switched Telephone networks (PSTN), Public Switched Data Network (PSTN), Value Added Service (VANs/VADs) and the Integrated Service Digital Networks (ISDN).

Public Switched Telephone Network (PSTN) the features of the                PSNT are its low speed, the analog nature of transmission, restricted bandwidth & its Side spread availability. As PSTN is designate for telephones, modems are required when it is used for data communication.

Public Switched Data Network (PSDN) The term PSDN covers a number of technologies, all through currently it is limited to Public packet Switch networks available to the public. The main features oa all PSDNs are their high label reliability and the high quality to the connection provided. The can support both high & low speeds at appropriate costs.

Value Added Network Service (VANs/VADs) In value added services, the provider of such services must process, store and manipulate the data that is carried on the network, that add value to it. The technique can be used in specific types of business in which it is advantageous to be able to share information with other companies in the same line.

वायरलेस नेटवर्क (Wireless Network)

वायरलेस नेटवर्क टेक्नोलॉजी एक महत्वपूर्ण नेटवर्क टेक्नोलॉजी है, जिसके माध्यम से इण्टरनेट या लोकल नेटवर्क के रिसोर्स ओर कम्प्यूटर को आसानी से एक्सेस कर सकते हैं। विश्वविद्दालय या ऑफिस कैम्पस में वायरलेस राउटर या एण्टीनी लगा होता है, जोकि नेटवर्क से ब्लू टूथ या वीलैन (वाई-फाई) द्वारा जोड़ता है।

Wireless networks are an important technology through which we access internet or Now-a- days many of universities and industry campus are setting wireless router or antenna which is accessed through Bluetooth or VLAN.

CCC DOEACC मैनेजमेण्ट के आधार पर (On the Basis of Management) Study Material Notes in Hindi

क्लाइण्ट- सर्वर नेटवर्किग (Client-Server Networking) यह नेटवर्किग फाइल सिस्टम को सेण्ट्रलाइज करता है इससे एक नटवर्क ऑपरेटिंग सिस्टम होता है, जोकि सभी क्लाइण्ट को कण्ट्रोल करता है। जिसे फाइल सर्वर कहा जाता है। जोकि पूरे नेटवर्क का ह्रदय होता है यही से रिसोर्स एवं फाइल के एक्सेस को कण्ट्रोल किया जाता है। रिसोर्स एवं फाइल पर सिक्युरिटी भी दी जा सकती है। इसमें किसी क्लाइण्ट का कोई या सभी पाटर्स चेन्ज किया जा सकता है। उसका दूसरे सिस्टम पर कोई प्रभाव नहीं होता, क्योंकि सभी फाइले सेण्ट्रलाइज सर्वर पर होती हैं। नई कोई भी टेक्नोलॉजी असानी से जोड़ी जा सकती है। इसमें सभी कम्पोनेण्ट क्लाइण्ट, सर्वर, नेटवर्क आदि एक साथ कार्य करते हैं। सर्वर के द्वारा रिमोट एक्सेस किया जा सकता है।

It is kind of network in which computers are connected through client- server architecture. In client- server networking, there is a computer defined as server and number of computers is attached to that server computer through cables and these attached computers can access the permitted information and resources stored on the server where as the server computer can access or do modifications in all they way with client nodes (computers), known a client-server computing or network.

लाभ (Advantages)

Centralize d Resources and data security are controlled through the server,

Scalability Any or all elements can be replaced individually as needs increase,

Flexibility New technology can easily integrated into system,

Interoperability All components  (client/network/server) work together, and

Accessibility Server can be accessed remotely and across multiple platforms.

हानियाँ (Disadvantages)

Expense Requires initial investment in dedivated servers,

Maintenance Large networks will require a staff to ensure efficient operation, and

Dependence when server goes down, operations will cease across the network.

पीयर –टू पीयर नेटवर्किग (Peer- to Peer Networking)

नेटवर्किग सिस्टम में एक कम्प्यूटर के फाइल, फोल्डर एवं सिसोर्स को (पेरिफेरल डिवाइस जैसे प्रिण्टर आदि) को शेयर (साझा) कर दिया जाता है, जिससे ये फाइल, फोल्डर एवं सिसोर्स का उपयोग नेटवर्क पर दूसरे कम्प्यूटर के द्वारा भी किया जाता है।

जब कि इसमें कोई फाइल सर्वर नहीं होता है अर्थात् इसमें भी सेण्ट्रल एडमिनिस्ट्रेशन नहीं होता है, जो पूरे नेटवर्क को कण्ट्रोल करे। सभी कम्प्यूटर केवल रिसोर्स को या फाइल फोल्डर को यूज करने के लिए जुड़े होते हैं कोई किसी के द्वारा गवर्न नहीं होता प्रत्येक कम्प्यूटर एक समान नेटवर्क पर कार्य करते हैं, यहाँ कोई सर्वर और क्लाइण्ट नहीं होता। सब वर्क ग्रुप में काम करते हैं।

Peer-to peer networking systems allows users to share resources and files located on their computers and to access shared resources found on other computers. However, they do not have a file server of a centralized management source. In a peer to peer network, all computers are considered equal, they all have the same abilities to use the resources available on the network  for e.g. Torents, we download a torrent file from the web and put this in queue to be downloaded then from whom or where you access as part of file is known as seed and your computer will be peer for that computer you downloading the data from.

लाभ (advantages)

Setup An operation system (such as Windows XP) already in place my only need to be reconfigured for peer to peer operations.

हानियाँ (Disadvantages)
No central repository for files and applications

Does not provide the security available on a client/server network.

NIELIT CCC कनेक्टिविटी के आधार पर (On the Basis of Connectivity) Study Material Notes in Hindi

NIELIT CCC कनेक्टिविटी के आधार पर (On the Basis of Connectivity) Study Material Notes in Hindi

NIELIT CCC कनेक्टिविटी के आधार पर (On the Basis of Connectivity) Study Material Notes in Hindi

कम्प्यूटर नेटवर्क में कम्प्यूटरों को आपस में जोड़ने के तरीके को टोपोलॉजी कहते हैं। किसी टोपोलॉजी के प्रत्येक कम्प्यूटर, नोड या लिंक स्टेशन कहलाते हैं। दूसरे शब्दों में, टोपोलॉजी नेटवर्क में कम्प्यूटरों को जोड़ने की भौगोलिक व्यवस्था होती है। इसके द्वारा विभिन्न कम्प्यूटर एक दूसरे से परस्पर सम्पर्क स्थापित कर सकते हैं। नेटवर्क टोपोलॉजी निम्नलिखित प्रकार की होती हैं-

बस टोपोलॉजी (Bus Topology)

इस टोपोलॉजी में एक लम्बे से युक्तियाँ जुड़ी होती हैं। यह नेटवर्क इन्स्टॉलेशन छोटे अथवा अल्पकालीन ब्रॉडकास्ट के लिए होते हैं। इस प्रकार के नेटवर्क टोपोलॉजी का प्रयोग ऐसे स्थानों पर किया जाता है, जहाँ अत्यन्त उच्च गति के कम्युनिकेशन चैनल का प्रयोग सीमित क्षेत्र में किया जाता है, परन्तु यदि कम्प्युनिकेशन चैनल खराब हो जाए तो पूरा नेटवर्क खराब हो जाता है।

A bus network is a network topology in which nodes are connected in daisy chain by a linear sequence of buses. Alternatively referred to as a line topology, a bus topology is a network set- up where each computer and network devices are connected to a single cable of backbone. A device wanting to communicate with another device on the network sends a broadcast message onto the intended recipient actually accepts and processes the massage. A single from the sourece is broadcasted and it travels to all workstations connected to bus cable

Although the message is broadcasted but only the intended recipient, whose MAC address or IP address matches, accepts it. A terminator is added to ends of the central cable, to prevent bouncing of singles. A barrel connector can be used to extend it. Below I have given a basic diagram of a bus topology and then have discussed advantages and disadvantages of Bus Network Topology.

लाभ (Advantages)

It is easy to set up and extend bus network.

Cable length required for this topology is the least compared to other networks.

Bus topology costs very less.

Linear Bus network is mostly used in small networks. Good for LAN.

हानियाँ (Disadvantages)

There is a limit on central cable length and number of nodes that can be connected.

Dependency on central cable in this topology has its disadvantages. If the main cable encounters some problem, whole network breaks down.

Proper termination is required to dump signals. Used of terminators is must.

It is difficult to detect and troubleshoot fault at individual sation.

Maintenance costs can get higher with time.

Effifciency  of Bus network reduces, as the number of devices connected to it increases.

It is not suitable for networks with heavy traffic.

Security is very liw because all the computers receive the sent single from the source.

स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) Study of CCC

CCC स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) Study Notes

CCC स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) Study Notes

इस टोपोलॉजी के अन्तर्गत एक होस्ट कम्प्यूटर होता है, जिससे विभिन्न लोकल कम्प्यूटरों (नोड) को सीधे जोड़ा जाता है। यह होस्ट कम्प्यूटर हब कहलाता है। स हब के फेल होने से पूरा नेटवर्क फेल हो सकता है।

स्टार टोपोलॉजी नोड्स के एक अत्यधिक संख्या के माध्यम से डाटा पैकेट से बचाता है। सबसे कम, 3 उपकरणों और 2 लिंक किसी भी दो उपकरणों के बीच किसी भी संचार में शामिल हैं। इस टोपोलॉजी केन्द्रीय हब पर एक विशाल भूमि के ऊपर देता है, पर्याप्त क्षमता के साथ, केन्द्र दूसरों को प्रभावित किए बिना एक डिवाइस के द्वारा बहुत अधिक उपयोग कर सकते हैं।

Star networks are one of the most common computer network topology. A star network features a central connection point called a hub node that may be a network hub, swithch or router.

The Centrall hub can be computer server `that manages the network, or it can be a much simpler device that only makes the connections between computers over the network possible. The star topology reduces the damage caused be line failure be connecting all of the systems to a central node. When applied to a bus- based network, this central hub rebroadcasts all transmissions received from any peripheral  node to all peripheral nodes on the network, sometimes including the originating node. The network is robust in the sense that if one connection between a computer and the hub fails, the othe connections remain intact.

लाभ (Advantages)

This is a high performing topology in comparison of other topologies.

In this topology each device is inherently isolated. This isolation prevents any non- centralized failure from affecting the network.

हानियाँ (Disadvantages)

Star topology relies on the central device (the switch, hub or computer)

If any of these central devices gails the whole network will fail.

As this of network needs all connections to go through a central device the amount of nodes in a network is limited by this factor whereas bus and ring topologies are not limited in such a way.

CCC DOEACC रिंग टोपोलॉजी (Ring Topology) Notes in Hindi

इस टोपोलॉजी में कोई हब या एक लम्बी केबल नहीं होती। सभी कम्प्यूटर एक गोलाकार आकृति के रूप में केबल द्वारा जुड़े होते है। प्रत्येक कम्प्यूटर अपन अधीनस्थ कम्प्यूटर से जुड़ा होता है। समें किसी भी एक कम्प्यूटर के खराब होने पर सम्पूर्ण रिंग बाधित होती है। यह गोलाकर आकृति सर्कुलर नेटवर्क भी कहलाती है।

Ring topology, the computers in the network is connected in a circular fashin, and the data travels in one direction. In a ring network, every deive has exactly two neighbours  for communication purpose. Each computer is directly connected to the next computer, forming a single pathway for Signals through the network. His type of network is easy to install and manage. All message travel through a ring in the same direction (either clockwise or counter clockwise). A failure in any cable of device breaks the loop and can take down the entire network. It there’s a problem in the network, it is easy to pinpoint which connection is defective. It is also good for handling high-volume traffic over long distances since every computer can act as a booster of the signal. Rings can be unidirectional, with all traffic travelling either clockwise or anticlockwise around the ring, of bidirectional (an in SONET/SDH). Because a unidirectional ring topology provides only one path way between any two nodes, unidirectional ring networks may be disrupted by the failure of a single link,

लाभ (Advantages)

Very orderly network where device has access to the token and the opportunity to transmit.

Performs better then a bus topology under heavy network load

Does not require a central node to manage the connectivity between the computers

Due to the point- to point line configuration of devices with a device on either side (each device is connected to its immediate neighbor), it si quite easy to install and reconfigure since adding or removing a device requires moving just two connections.

Point-to point line configuration makes it easy to identify and isolate faults

हानियाँ (Disadvantages)

One malfunctioning workstation can create problems for the entire networks. This can be solved by using a dual ring or a switch that closes off the break.

Moving, adding and changing the devices can affect the network.

Bandwidth is shared on all links between devices.

It is difficult to troubleshoot.

CCC DOEACC ट्री टोपोलॉजी (Tree Topology) Study Material in Hindi

CCC स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) Study Notes

CCC स्टार टोपोलॉजी (Star Topology) Study Notes

इस टोपोलॉजी में एक नोड से दूसरे नोड तथा दूसरी नोड से तीसरी नोड, किसी पेड़ की शाखाओं की तरह जुड़ी होती है। यही ट्री (Tree) टोपोलॉजी कहलाती है। ट्री टोपोलॉजी, स्टार टोपोलॉजी का ही विस्तृत रूप है। इस टोपोलॉजी में रूट (ROOT) नोड सर्वर की तरह कार्य करता है।

This is combination of bus and star topology. Tree topologies integrate multipal star topologies together onto a bus. This particular type of network topology is based on a hierarchy of nodes. The highest level of any tree network consists of a single root node that is connected with single or multiple nodes in the next level down. Tree networks are not constrained to any number of levels, but as tree networks are a variant of the bus network topology, they are prone to crippling network failures should a connection in a higher level of nodes fail/ suffer damage. Each node in the network has a fixed number of nodes connected to it at the next lower level in the hierarchy, this number referred to as the branching factor of the tree.

लाभ (Advantages)

Point- to-point wiring for individual segments.

Supported by several hardware and software venders.

हानियाँ (Disadvantages)

Overall length of each segment is limited by the type of cabling used.

If the backbone line breaks, the entire segment goes down.

More difficult to configure and wire than other topologies.

CCC मैश टोपोलॉजी (Mesh Topology) Study Material Notes in Hindi

इस टोपोलॉजी का प्रत्येक कम्प्यूटर, नेटवर्क में जुड़े अन्य सभी कम्प्यूटरों से सीधे जुड़ा हाता है। इसी कारण से इसे (Point- to- Point) नेटवर्क या (Completely Connected) नेटवर्क भी कहा जाता है। इसमें डेटा के आदान- प्रदान का प्रत्येक निर्णय कम्प्यूटर स्वयं ही लेता है।

Every node connected to every other node Fast Reliable No hub or bus to fail if one device goes down, it is the only node affected Expensive Every Node must be wired to every other node Difficult to add nodes.

लाभ (Advantages)

A mesh topology can withstand high amounts of traffic. Also the network is a collection of two of more computers, which are connected together to share information and resources. The Internet is a wordwide system of computer networks, i.e network of networks. Through Internet, computes become able to exchange information with each other and find diverse perspective on issues form a global audience. Most of the people uses Internet for sending and receiving e-mail and net surfing for retrieving information.

NIELIT DOEACC CCC इण्टरनेट का इतिहास (History of Internet) Study Notes in Hindi

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वर्ष 1969 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोनिया तथा यूनिवर्सिटी ऑफ यूटा अरपानेट (ARPANET- Advanced Reaserach Projects Agency Network) की शुरूआत के रूप में जुड़े। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य विभिन्न विश्वविद्दालयों तथा अमेरिकी रक्षा मन्त्रालय के कम्प्यूटरों को आपस में कनेक्ट करना था। यह दुनिया का पहला पैकेट स्विचिंग नेटवर्क था।

मध्य 80 के दशक मे, एक और संघीय एजेंसी राष्ट्रीय विज्ञान फाउण्डेशन (National Science Foundation) ने एक नया उच्च क्षमता वाला नेटवर्क NS Fnet बनाया जो ARPANET से अधिक सक्षम था NSfnet ने केवल सही कमी थी कि यह अपने नेटवर्क पर केवल शैक्षिक अनुसन्धान की ही अनुमति देता था, किसी भी प्रकार के निजी व्यापार की अनुमति नहीं। इसी कारण निजी संगठनों, तथा लोगों ने अपने खुद के नेटवर्क का निर्माण करना शुरू कर दिया। जिसने बाद में ARPANET तथा NSFnet से जुड़कर इण्टरनेट का निर्माण किया।

In 1969 the university of California at los angeles and the university of Utah were connected with the beginning of the ARPANET (Advanced Reasearch Projects Agency NETwork) using 56 kbit/s circuits, which is sponsored by u.s. (united States) Department of Defenect  (DoD) . the goal of this project was ot connect computers at different Universities and U.S (United Stages) Defense.  It mid 80’s another federal agency, the National Science Foundation Network) Which was more Capable them ARPANET. THE only drawback of NSFnet was that it allowed only academic research on its network and not any kind of private business on it. Now, several private roganisations and people started working to build their own networks, named private networks, which were later (in 1990’s) connected with AR[AMET and NSFnet to form the Internet. The Internet really became popular in 1990’s after the development of world wide wed  (WWW)

DOEACC CCC इण्टरनेट की संरचना का आधार (Basics of Internet Architecture) Notes in Hindi

इण्टरनेट इण्टरकनेक्टड कम्प्यूटर नेटवर्क्स का एक ग्लोबल सिस्टम है, जिसमें LANs, WANs आदि सम्मिलित होते हैं। ये सभी यूजरस् को सर्व करने के लिए स्टैण्डर्ड इण्टरनेट सुइट (Suit) TCP/IP का प्रयोग रते हैं। इण्टरनेट ऑर्किटेक्चर में लेयर होते हैं,

सबनेटवर्क लेयर (Subnetwork Layer) इस लेयर में LAN से जुड़ी सभी स्वतन्त्र डिवाइस होती हैं जिसे सब नेटवर्क कहते हैं।

इण्टरनेटवर्किग लेयर (Internetworking Layer) सबनेटवर्क से ऊपरी लेयर, इण्टरनेटवर्क लेयर है, जो गेटवेज के द्वारा नेटवर्क के बीच संचार की सुविधा प्रदान करती है। प्रत्येक सबनेटवर्क, इण्टरनेटवर्क में अन्य सबनेटवर्क्स से जुड़ने के लिए गेटवेज का प्रयोग करते हैं। इण्टरनेटवर्क लेयर वह लेयर है जहाँ डेटा गेटवेज से जब तक स्थानान्तरित होता है तब तक वह अपनी डेस्टीनेशन तक पहुँच नहीं जाता और फिर सबनेटवर्क लेयर से गुजर नहीं जाता। यह इण्टरनेट प्रोटोकॉल को रन करती है।

सर्विस प्रोवाइडर प्रोटोकॉल लेयर (Service Provider Protocol Layer) सर्विस प्रोवाइडर प्रोटोकॉल लेयर नेटवर्क के सभी एण्ड टू एण्ड संचार के लिए जिम्मेदार है। ये लेयर TCP  और अन्य प्रोटोकॉल को रन करती है। यह डेटा ट्रैफिक के प्रवाह को स्वयं सम्भालती है और स्थानान्तरण के लिए सन्देश की विश्वसनीयता सुनिश्चित करती है।

एप्लीकेशन  सर्विस लेयर (Application Service Layer) यह यूजर एप्लीकेशन के लिए इण्टरफेस का समर्थन करती है।

CCC इण्टरनेट पर सेवाएँ (Services on Internet) Notes

NIELIT DOEACC CCC इण्टरनेट पर सेवाएँ (Services on Internet) Study Material in Hindi and English

NIELIT DOEACC CCC इण्टरनेट पर सेवाएँ (Services on Internet) Study Material in Hindi and English

इण्टरनेट एक ग्लोबल आधारित सूचना सिस्टम है, जो मल्टीमीडिया सूचना को विश्व भर के कम्प्यूटरों से उपलब्ध कराता  हैं। सामान्य: इण्टरनेट प्रयोक्ता केवल वर्ल्ड वाइड वेब को ही इण्टरनेट एक मात्र संसाधन समझता है।

परन्तु सत्य यह है कि इण्टरनेट के द्वारा वेब प्रयोग तथा ई-मेल के अतिरिक्त भी अन्य महत्वपूर्ण सेवाएँ प्राप्त की जा सकती है। इन सेवाओं में फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल, इलेक्ट्रॉनिक मेल, गोफर, वर्ल्ड- वाइड वेब, टेलनेट, यूजनेट, वेरानिका, आर्ची आदि हैं। इण्टरनेट एप्लीकेशन एरिया की सूची काफी विस्तृत है जिसका लाभ कम्प्यूटर नेटवर्क स्थापित कर किया जा सकता है।

There are a lot of services, which can be benefited by Internet. Some potential applications of computer networks for books, technical reports, papers and articles on particular topics, Niws access machines, which can search past news, stories of abstracts with given search criteria.

Some of the most common services like airline reservation, hotel booking, railway- reservation, car- rental etc can be availed through internet. Electronic mall, chat etc services are available on internet.

www तथा वेबसाइट्स ( WWW and Websites)

www और उससे सम्बन्धित शब्दावली निम्नलिखित हैं-

1 वर्ड वाइट वेब ( World Wide Web)  वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) विशेष रूप से स्वरूपित डॉक्यूमेंण्ट्स का समर्थन करने वाले इण्टरनेट सर्वर की एक प्रणाली है। यह 13 मार्च, 1989 को पेश किया गया था।

डॉक्ययूमेण्ट्स मार्कअप लैंग्वेज HTML में फॉर्मेटिड होते हैं तथा दूसरे डॉक्यूमेण्ट्स के लिए लिकं, साथ ही ग्राफिक्स, ऑडियो और वीडियों फाइल का समर्थन भी करते हैं। उपयोगकर्ता फ्रेण्डली, इण्टरऐक्टिव, मल्टीमीडिया डॉक्यूमेण्ट्स (ग्राफिक्स ऑडियो, वीडियों, एनिमेशन और टैक्स्ट) इत्यादि इसके विशिष्ट फीचर्स हैं।

वेब पेज (Web Page) वेब बहुत सारे कम्प्यूटर डॉक्यूमेण्ट्स या वेब पेजों का संग्रह है। ये डॉक्यूमेण्ट्स HTML में लिखे जाते हैं तथा वेब ब्राउजर द्वारा प्रदर्शित किए जाते हैं।

ये दो प्रकार के होते हैं- स्टैटिक (Static) तथा डायनेमिक (Dynamic) स्टैटिक वेब पेज हर बार एक्सेस करने पर एक ही सामग्री हर बार बदल सकती है।

वेबसाइट (Website) एक वेबसाइट वेब पेजों का संग्रह होता है, जिसमें सभी वेब पेज हाइपरलिंक द्वारा एक दूसरे से जुड़े होते हैं। किसी भी वेबसाइट का पहला पेज होमपेज कहलाता है। उदाहरण –Http://iete.org इत्यादि।

वेब ब्राउजर (Web Browser) वेब ब्राउजर एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है, जिसका प्रयोग वर्ल्ड वाइड वेब के कण्टेण्ट को ढूँढने, निकालने व प्रदर्शित करने में होता है।

ये प्राय: दो प्रकार के होते हैं-

Text Wab Browser इस वेब ब्राउजर में टैक्स्ट आधारित सूचना को प्रदर्शित किया जाता है। उदाहरण – Lynx

Graphical Web Browser यह टैक्स्ट तथा ग्राफिक सूचना दोनों को सपोर्ट करता उदाहरण –Firefox, Chrome, Netscape, Internet Explorer इत्यादि।

वेब सर्वर (Web Server) यह एक कम्प्यूटर है, जोकि HTML पेजों या फाइलों की जरूरतों को पूरा करता है। वेब क्लाइण्ड उपयोगकर्ता से सम्बन्धित आग्रहित (Requested) प्रोग्राम हैं। प्रत्येक वेब सर्वर जोकि इण्टरनेट से जुड़े हैं, का एक अदितीय एड्रेस होता है जिस IP एड्रेस कहते हैं उदाहरण – Apache HTTP Server, Internet Information Services इत्यादि।

वेब एड्रेस (Web Address) इण्टरनेट पर वेब पेज की लोकेशन को पहचानता है। वेब एड्रेस को URL (Uniform Resources Locater) भी कहते हैं। URL इण्टरनेट से जुड़े होस्ट कम्प्यूटर पर फाइलों के इण्टरनेट एड्रेस को दर्शाते है। टिम बर्नर्स ली (Tim Berners Lee) ने वर्ष 1991 में पहला URL बनाया, जोकि वर्ल्ड वेब पर हाइपरलिंग को प्रकाशित करने में इस्तेमाल होता है उदाहरण –“http/www.gogle.com/Services/index.htm”

http                                       –      प्रोटोकॉल आइडेण्टिफयर (Protocol Identifier)

www                                     –     वर्ल्ड वाइड वेब

Google.com                       –              डोमेन नेम

/services/                            –              डायरेक्टरी

Index.htm                           –              वेब पेज

डोमेन नेम (Domain Name) डोमेन नेटवर्क संसाधनों का एक समूह है, जिसे उपयोगकर्ता के समूह को आवण्टिक किया जाता है। डोमेन नेम लोकेट करने के काम में आता है। डोमेन नेम सदैब आदितीय होना चाहिए। इसमें हमेशा डॉट (.) द्वारा अलग किए गए दो या दो से अधिक भाग होते हैं।

उदाहरण –google.com, yahoo.com इत्यादि डोमेन संगठनों या देश के प्रकार को अंकित करते है। उदाहरण के लिए

Info        –              सूचना संगठन (informational Organisation)

Com       –              वाणिज्यि (Commerical Organization)

Gov        –              सरकारी संस्थान (Government Organization)

Edu        –              शैक्षणिक संस्थान (Educational Organization)

Mil          –              सैन्य संस्थान (Military Organisation)

Net        –              नेटवर्क संसाधन (Network Resources)

Org         –              गैर- लाभकारी संगठन ( Non- Profit Organization)

In            –              भारत (India)

An          –              ऑस्ट्रेलिया (Australia)

Fr            –              फ्रांस (France)

Nz           –              न्यूजीलैण्ड (New Zealand)

Uk          –              यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom)

सामान्यत यदि डोमेन नेम के अन्तिम भाग में तीन अक्षर हैं तो वह संगठन को दर्शाता है कि यदि दो अभर हैं तो वह देश को दर्शाता है।

डोमेन नेम सिस्टम (Domain Name System) यह डोमेन नेम को आईपी एड्रेस में अनुवादित करता है। सर्वर्स को पहचानने के लिए डोमेन नेम सिस्टम का प्रयोग होता है। सर्वर्स की ऐड्रेसिंग, नम्बरों पर भी आधारित है।

उदाहरण – 204.157.54.9 इत्यादि, सभी IP एड्रेसेज हैं।

इण्टरनेट पर कम्प्युनिकेशन (Communication on Internet) इण्टरनेट पर कम्प्यूनिकेशन निम्नलिखित के द्वारा सम्भव है-

ब्लॉग्स (Blogs) यह एक वेब पेज या वेबसाइट होती है, जिसमें किसी व्यक्ति विशेष की राय/सलाह, दूसरी साइटों के लिंक नियमित रूप से रिकॉर्ड होते हैं। किसी भी सामान्य ब्लॉग में टैक्स्ट, इमेज्स व अन्य ब्लॉगों, वूब पेजों या किसी अन्य टॉपिक से सम्बन्धित मीडिया के लिंक होते हैं। इनमें मुख्य रूप से टेक्सचुअल, कलात्मक चित्र, फोटोग्राफ, वीडीयों, संगीत, इत्यादि सम्मिलित हैं।

It is a webpage or a website, typically run be an individual of small group, that is written in an informal or conversational style. Topics sometimes include brief philosophical musings, about music or other social issues.

न्यूजगुप्स (Newsgroups) यह एक ऑनलाइन डिस्कशन ग्रुप होता है, जिसके अन्तर्गत इलेक्ट्रॉनिक बुलेटिन बोर्ड सिस्टम तथा चैट सेशन्स के द्वारा बातचीत करने की अनुमति प्रदान की जाती है।

यह न्यूजग्रुप्स विषयों को उनके पदक्रम में संगठित करने के काम में आता हैं। जिसमें न्यूजग्रुप का पहला अक्षर प्रमुख विषय की श्रेणी को व उप श्रेणियाँ उपविषय द्वारा दर्शाई जाती है

A newsgroup is a discussion about a particular subject consisting of notes written to a central internet sit and them redistributed. It share, discuss and learn about their topics of interest by exchanging text messages, images, videos and other forms of digital format.

चैटिंग (Chatting) यह वृहत स्तर पर भी उपयोग होने वाली टैक्स्ट आधारित संचारण है, जिससे इण्टरनेट पर आपस में बातचीत कर सकते हैं। इसके माध्यम से उपयोगर्ता चित्र, विडियो, ऑडियों इत्यादि भी एक दूसरे के साथ शेयर कर सकते उदाहरण – Skype, Yahoo, messenger इत्यादि।

Chatting is very similar to texting or talking over internet. Now- a- days it is most used communication over the internet. Many of the web portals are providing free chatting to the user. Buring chatting both of aspects has to be connected to internet. One composes and sends and another receives and replies. There are more than two, can that simultaneously known as group chat.

E-mail (Electronic- mail) ई-मेल के माध्यम से कोई भी उपयोगकर्ता किसी भी अन्य व्यक्ति को इलेक्ट्रॉनिक रूप से सन्देश भेज सकता है तथा प्प्त भी कर सकता है। ई-मेल को भेजने के लिए किसी भी उपयोगकर्ता का ई-मेल ऐड्रेस होना बहुत आवश्यक है, जोकि विश्व भर में उस ई-मेल सर्विस पर अदितीय होता है।

It is an important communications service available on the internet.  The concept of sending electronic text messages between parties in a way analogous to mailing letter or memos predates the creation of the internet. Pictures, documents and other files are sent as E-mail attachements.

इण्टरनेट सर्विसेज (Internet Services) इण्टरनेट से उपयोगकर्ता कई प्रकार की सेवाओं का लाभ उठा सकता है, जैसे कि इलेक्ट्रॉनिक मेल मल्टीमीडिया डिस्प्ले

शॉपिंग, रियल टाइम ब्रॉडकास्टिंग इत्यादि। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण सेवाएँ इस प्रकार है-

Internet can be used for various services like E-mails, multimedia display shopping real time broadcasting etc. some of the important services are given below-

विडियों कॉन्फ्रेन्सिंग (Vedio Conferencing) वीडियों कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से की व्यक्ति या व्याक्तियों का समूह किसी अन्य व्यक्ति या समूह के साथ दूर होते हुए भी आमने सामने रहकर वार्तलाप कर सकते हैं। इस कम्युनिकेशन में उच्च गति इण्टरनेट कनेक्शन की आवश्यकता होती है व इसके साथ एक कैमरे, एक माइक्रोफोन, एक वीडियों स्क्रीन तथा एक साउण्ड सिस्टम की भी जरूरत होती है।

ई-लर्निग (E-learning) इनके अन्तर्गत कम्प्यूटर आधारित प्रशिक्षण, इण्टरनेट आधारित प्रशिक्षण, ऑनलाइन शिक्षा इत्यादि सम्मिलित हैं, जिसमें ऑनलाइन शिक्षा इत्यादि सम्मिलित है, जिसमें उपयोगकर्ता को किसी विषय पर आधारित जानकारी को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रदान किया जाता है। इस जानकारी को वह किसी भी आउटपुट माध्यम पर देखकर स्वयं को प्रशिक्षित कर सकता है। यह कम्प्यूटर या इण्टरनेट से ज्ञान को प्राप्त करने में एक माध्यम है।

ई-बैंकिंग (E-banking) इसके माध्यम से उपोयगकर्ता विश्वभर में कहीं से भी अपने बैंक अकाउण्ट को मैनेज कर सकता है। यह एक स्वचालित प्रणाली का अच्छा उदाहरण है, जिसमें उपयोगकर्ता की गतिविधियों (पूँजी निकालने, ट्रांसफर करने, मोबाइल रिचार्ज करने इत्यादि) के साथ उसका बैंक अकाउण्ट भी मैनेज होता है। ई-बैंकिग में किसी भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस (पीसी, मोबिल आदि) इत्यादि पर इण्टरनेट की सहायता ली जा सकती है। इसके मुख्य व व्यावहारिक उदाहरण हैं- बिल पेमेण्ट सेवा, फण्ड ट्रांसफर, रेलवे रिजर्वेशन, शॉपिंग इत्यादि।

ई-शॉपिंग (E-Shopping) इसे ऑनलाइन शॉपिंग भी कहते हैं। जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता कोई भी सामान, जैसे किताबें, कपड़े, घरेलू सामान, खिलौने, हाडवेयर, सॉफ्टवेयर तथा हेल्थ इन्श्योरेन्स इत्यादि को खरीद जा सकता है।

इसमें खरीदे गए समान की कीमत चुकाने के लिए कैश ऑन डिलीवरी व ई-बैंकिग (कम्प्यूटर पर ही वेबसाइट से भुगतान) का प्रयोग करते हैं। यह भी विश्वभर में कहीं से भी की जा सकती है।

ई-रिजर्वेशन (E-reservation) यह किसी भी वेब्साइट पर किसी भी वस्तु या सेवा के लिए स्वयं को या किसी अन्य व्यक्ति को आरक्षित करने के लिए प्रय़ुक्त होती है, जैसे रेलवे रिजर्वेशन में एयरवेज, टिकट बुकिंग में, होटल रूम्स की बुकिंग इत्यादि में। इसकी सहायता से उपयोगर्ता को टिकट काउण्टर पर खड़े रहकर प्रतीक्षा नहीं करनी होती। इसे इण्टरनेट के माध्यम से किसी भी जगह से कर सकते हैं।

सोशल नेटवर्किंग (Social Networking) यह इण्टरनेट के माध्यम से बना हुआ सोशल नेटवर्क (कुछ विशेष व्यक्ति या अन्य असम्बन्धित व्यक्तियों का समूह) होता है।

इसके माध्यम से उस सोशल नेटवर्क के अन्तर्गत ने वाला कोई व्यत् किसी अन्य व्यक्ति से सम्पर्क साध सकता है चाहे वे दोनों कही भी हों। शोशल नेटवर्किंग सोशल साइट्स पर की जा सकती है तथा कम्युनिकेशन टैक्स्ट, पिक्चर्स, वीडियों इत्यादि के रूप में भी स्थापित हो सकता है। कुछ सोशल नेटवर्किग साइट्स इस प्रकार हैं- Facebook, Myspace इत्यादि।

ई-कॉमर्स (E-commerce) इसके अन्तर्गत सामाने का लेन-देन, व्यापारिक सम्बन्धों को बनाए रखना व व्यापारिक जानकारियों को शेयर करना इत्यादि आता है, जिसमें धनराशि का लेन देन इत्यादि भी सम्मिलित है। दूसरे शब्दों में, यह इण्टरनेट सम्बन्धित व्यापार है।

एम-कॉमर्स (M-commerce) यह किसी भी वस्तु या समान इत्यादि को वायरलेस कम्युनिकेशन के माध्यम से खरीदने तथा बेचने के लिए प्रयोग होता हैं। इसमें वायरले उपकरणों, जैसे मोबाइल, टैबलेट इत्यादि का प्रयोग होता है। संक्षेप में, जो कार्य ई-कॉमर्स के अन्तर्गत होते हैं, वही सब कार्य मोबाइल इत्यादि पर करने को एम कॉमर्स कहते हैं।

DOEACC CCC कम्प्यूटर को इण्टरनेट एक्सेस के लिए तैयार करना (Preparing Computer for Internet Acccess) Study

कम्प्यूटर पर इण्टरनेट सर्विस एक्सेस करने के लिए कम्प्यूटर की उचित कॉन्फिगरेशन करनी होती है, जिससे इण्टरनेट सर्विस को ठीक प्रकार एक्सेस किया जा सके।

ISPS and Example (Broad Band /Dial-up/wi-Fi)

किसी कम्प्यूटर को इण्टरनेट से जोड़ने के लिए हमें इण्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) में सेवा लेनी होती है एवं इसके पश्चात् टेलीफोन लाइन के माध्यम से कम्प्यूटर को इण्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर के सर्वर से जोड़ा जाता है।

भारत में इण्टरनेट सेवा का प्रारम्भ 15 अगस्त 1995 में विदेश संचार निगम लिमिटेड द्वारा किया गया था। भारत में क्रियाशील लोकप्रिय इण्टरनेट सेवा प्रदाता निम्नलिखित हैं।

विदेश संचार निगम लिमिटेड (VSNL)

भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL)

महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (MTNL)

मन्त्रा ऑनलाइन (Mantra Online)

सत्यम ऑनलाइन (Satyam Online)

इन सभी कम्पनयों का भारत के अनेकों शहरों में DNS  (Domain Name System) सर्वर है। DNS सर्वर एक कम्प्यूटर है, जो दूसरे कम्प्यूटर के डोमेन (Domain) नाम को IP (Internet Protocol) एड्रेस में अनुवाद करता है।

NIELIT DOEACC CCC इण्टरनेट एक्सेस की तकनीक (Internet Access Techniques) Study Material in Hindi And English

DOEACC CCC Communication and Collaboration Study Material Hindi and English

DOEACC CCC Communication and Collaboration Study Material Hindi and English

इण्टरनेट एक्सेस के लिए कुछ इण्टरनेट कनेक्शन इस प्रकार हैं-

डायल-अप कनेक्शन (Dial –up Connection)

डायल- अप पूर्व उपस्थित टेलीफोन लाइन की सहायता से इण्टरनेट से जुड़ने का एक माध्यम है। जब भी उपयोगकर्ता डायल- अप कनेक्शन को चलाता है, तो पहले मॉडम इण्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर (ISP) का फोन नम्बर डायल करता है। जिसे डायल अप कॉल्स को प्राप्त करने के लिए तैयार किया गया है व फिर आई एस पी (ISP) कनेक्शन स्थापित करता है।

जिसमें सामान्य रूप से दस सेकण्ड लगते हैं। सामान्यत: शब्द ISP उन कम्पनियों के लिए प्रयोग किया जाता है जो उपयोगकर्ताओं को इण्टरनेट कनेक्शन प्रदान करती है। उदाहरण के लिए, कुछ प्रसिद्ध ISP के नाम हैं- Airtel MTNL, Vodafone आदि।

ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन (Broadhand Connection) ब्रॉडबैण्ड का इस्तेमाल हाई स्पीड इण्टरनेट एक्सेस के लिए सामान्य रूप से होता है। यह इण्टरनेट से जुड़ने के लिए टेलीफोन लाइनों को प्रयोग करता है। ब्रॉडबैण्ड उपयोगकर्ता को डायल- अप कनेक्शन से तीव्र गति पर इण्टरनेट से जुड़ने की सुविधा प्रदान करता है। ब्रॉडबैण्ड में विभिन्न प्रकार की हाई स्पीड संचरण तकनीकें भी सम्मिलित हैं, जोकि इस प्रकार हैं

डिजिटल सब्स्क्राइबर लाइन (Digital Subscriber Line-DSL) यह एक लोकप्रिय ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन है, जिसमें इण्टरनेट एक्सेस डिजिटल डेटा को लोकर टेलीफोन नेटवर्क एक्सेस डिजिटल डेटा को लोकर टेलीफोन नेटवर्क के तारों (ताँबें के) द्वारा संचरित किया जाता है। यह डायल सेवा की तरह, किन्तु उससे अधिक तेज गति से कार्य करता हैं। इसके लिए DSL मॉडल की आवश्यकता होती है, जिससे टेलीफोन लाइन तथा कम्प्यूटर को जोड़ा जाता है।

केबल मॉडम (Cable Modem) इसके अन्तर्गत केबल ऑपरेटर्स कोक्सियल केबल के माध्यम से इण्टरनेट इत्यादि की सुविधाएँ भी प्रदान कर सकते हैं। इसकी ट्रांसमिशन स्पीड 1.5Mbps या इससे भी अधिक हो सकती है।

फाइबर ऑप्टिक (Fiber Optic) फाइबर ऑप्टिक तकनीक वैद्दुतीय संकेतों के रूप में उपस्थित डेटा को प्रकाशीय रूप में बदलकर, उस प्रकाश को पारदर्शी ग्लास फाइबर, जिसका व्यास मनुष्य के बाल के लगभग बराबर होता है, के जरिए प्राप्तकर्ता तक भेजता है।

ब्रॉडबैण्ड ऑवर पावर लाइन (Broadband Over Power Line-BPL) निम्न तथा माध्यम वोल्टेज के इलेक्ट्रिक पावर डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क पर ब्रॉडबैण्ड कनेक्शन को सर्विस को ब्रॉडबैण्ड ऑवर पावर लाइन कहते हैं। यह उन क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है, जहाँ पर पावर लाइन के अलावा कोई और माध्यम उपलब्ध नहीं है। उदाहरम –ग्रामीण क्षेत्र इत्यादि।

वायरलेस कनेक्शन (Wireless Connection) वायरलेस ब्रॉडबैण्ड ग्राहक के स्थान और सर्विस प्रोवाइडर के बीच रेडियो लिंक का प्रयोग कर घर या व्यापार इत्यादि को इण्टरनेट से जोड़ता है। वायरलेस ब्रॉडबैण्ड स्थिर या चलायमान होता है। इसे केबल या मॉडल इत्यादि की आवश्यकता नहीं होती व इसका प्रयोग हम किसी भी क्षेत्र में, जहाँ  DSL केबल इत्यादि नहीं पहुँच सकते, कर सकते हैं।

वायरलेस फिडलिटी (Wireless Fidelity-Wi-Fi) यह एक सार्वत्रिक वायरलेस तकनीक है, जिसमें रेडियों आवृत्तियों को डेटा ट्रांसफर करने में प्रयोग किया जाता है। वाई फाई केबल या तारों के बिना ही उच्च गति से इण्टरनेट सेवा प्रदान करती है है।

इसका प्रयोग हम रेस्तराँ, कॉपी शॉप, होटल, एयरपोटर्स, कन्वेशन सेण्टर और सिटी पार्को इत्यादि में कर सकते हैं।

CCC DOEACC वेब ब्राउजिंग सॉफ्टवेयर (Web Browsing Software) Notes Hindi And English

CCC Nielit वेब ब्राउजर कॉन्फिगर करना (Configuring Web Browser) Study Material Notes in Hindi And English

CCC Nielit वेब ब्राउजर कॉन्फिगर करना (Configuring Web Browser) Study Material Notes in Hindi And English

वेब ब्राउजिंग सॉफ्टवेयर को ब्राउजर्स या वेब क्लाइन्ट्स (Web Clients) भी कहा जाता है जो माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन एवं कई अन्य कम्पनियों द्वारा मुफ्ट में प्रदान किया जाता है। इन वेब ब्राउजिंग सॉफ्टवेयर को प्रयोग वर्ल्ड वाइड वेब में नेविगेट करने एवं वेब पेजेस् (Wab Pages) को देखने हेतु किया जाता है।

अधिकांश ब्राउजर्स फ्रीवेयर (Freeware) होते हैं। प्रथम ग्राफिकल वेब ब्राउजर मोजइक (Mosaic) था। जिसे मार्क एण्डरसन ने बनाया था।

एक वेब ब्राउजर की निम्नलिखित विशेषताएँ होती हैं-

वेब ब्राउजर HTTP (Hyeper Text Transfer Protocol) प्रोटोकॉल का प्रयोग करके वेब सर्वर (Wed Server) के साथ संचार कायम करने में सक्षम होता है।

डॉक्यूमेण्ट्स को रिट्रीव करना एवं उन्हें सिस्टम के अनुकूल फॉर्मेट करना, एक वेब ब्राउजर की कार्य प्रणाली के मुख्य आधार स्तम्भ माने जाते हैं।

CCC DOEACC कुछ लोकप्रिय वेब ब्राउजर (Some Popular Web Browsers) Study Material Notes

CCC DOEACC कुछ लोकप्रिय वेब ब्राउजर (Some Popular Web Browsers) Notes in Hindi

CCC DOEACC कुछ लोकप्रिय वेब ब्राउजर (Some Popular Web Browsers) Notes in Hindi

मोजिला फायरफॉक्स (Mozilla Firefox) यह एक नि:शुल्क, ओपर सोर्स वेब ब्राउजर है, जिसे विण्डोज OS, XP तथा लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ साथ मोबाइल डिवाइसों पर इण्टरनेट उपयोग करने के लिए बनाया गया है। इसमें एडॉन्स (Addons), एक्सटेंशन (Extensions), थीम्स् (Themes), टैब्स (Tabs), किसी शब्द को ढूँढने के लिए सर्चिग व Spll Check जैसी बैहतरीन सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

गूगूल क्रोम (Google Chrome) यह एक फ्रीवेयर वेब ब्राउजर है, जिसे Google कम्पनी द्वारा बनाया गया है। इस वेब ब्राउजर में बुकमार्क्स तथा सेटिंग्स सिनक्रोनाइजेशन, वेब स्टैण्डर्ड सपोर्ट, सिक्योरिटी, मालवेयर ब्लॉकिंग, तेज गति से इण्टरनेट एक्सेस, आकर्ष यूजर इण्टरफेस, डेस्कटॉप शॉर्टकट्स व ऐप्स (Apps) ऑटोमैटिक वेब पेज ट्रांसलेशन व कलर, मैनेजमेण्ट के साथ साथ अन्य सभी परम्परागत विशेषताएँ भी उपलब्ध हैं।

इण्टरनेट एक्सप्लोरर (Internet Explorer) इण्टरनेट एक्सप्लोरर एक लोकप्रिय वेब ब्राउजर है, जिसका निर्माण माइक्रोसॉफ्ट द्वारा किया गया है। इण्टरनेट एक्सप्लोरर, विण्डोज मैकिनटॉश (Macintosh) ऑपरेटिंग सिस्टम के सभी संस्करणों में उपयोगी होता है।

CCC NIELIT नेटस्केप नेवीगेटर (Netscape Navigator) Study Material Notes in Hindi

नेटस्केप नेविगेटर वेब ब्राउजर का निर्माण नेस्टस्केप कम्युनिकेशन द्वारा किया गया है। नेस्टस्केप नेविगेटर, विण्डोज, मैकिनटॉश और यूनिक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के सभी संस्करणों के लिए उपलब्ध है।

लिनक्स (Lynx)

लिनक्स एक टैक्स्ट – आधारित ब्राउजर है। इसका निर्माण यूनिवार्सिटी ऑफ कन्सास द्वारा किया गया था। यह मुख्यत: टैक्स्ट आधारित इण्टरनेट कनेक्शन जैसे डायल अप टैक्स्ट ओन्ली Unix अकाउण्ट आदि के लिए उपयुक्त है। इस वेब ब्राउजर के द्वारा आप डॉक्यूमेंण्ट्स को कलर रूप में या ग्राफिक्स को ऑनलाइन नहीं देख सकते।

CCC वेब ब्राउजर विण्डो के मुख्य घटक (Main Components of a Web Browser Window) Notes Hindi and English

इण्टरनेट एक्सप्लोरर एक प्रमुख वेब ब्राउजर है। इसकी विण्डो के भाग निम्नलिखित हैं

टाइटल बार ( Title Bar) यह ब्राउजर विण्डो के सबसे ऊपर स्थित क्षैतिज पट्टी है। इस पर वेब पेज का नाम लिखा होता है। पहला बटवन न्यूनतम (Minimize) बटन होता है, जिससे ब्राउजर विण्डो को स्क्रीन से हटा देते हैं, परन्तु वेब ब्राउजर रन करता रहता है।

दूसरा बटन अधिकतम/री- स्टोर (Miximize/Restore) होता है। यह बटन उपयोगकर्ता को विण्डो को पूर्ण स्क्रीन या छोटी स्क्रीन करने की सुविधा देता है। तीसरा बटन क्लोज (Close) बटन होता है। इस बटन पर क्लिक करके विण्डो बन्द किया जाता है।

मेन्यू बार (Title Bar) टाइटल बार के तुरन्त नीचे मेन्यू बार होता है जिसमें की प्रोग्राम, फाइल, विकल्पों या आदेशों की सूची होती है, जिसमें से किसी एक का चयन करके उस कार्य को क्रियान्वित किया जा सकता है। मेन्यू बार के कुछ मुख्य विकल्प हैं

फाइल (File) न्यू, ओपन, एडिट, सेव आदि।

एडिट (Edit) कट, कॉपी, पेस्ट आदि।

व्यू (View) टूलबार, स्टेटस बार, एक्सप्लोरर बार आदि।

फेवरेट्स (Favourites) एड फेवररेट्स, ऑर्गेनाइज फेवरेट्स आदि।

टूल्स (Tools) मेल एण्ड न्यूज, पॉप अप ब्लॉकर आदि।

हेल्प (Help) कन्कट्स एण्ड इण्डक्स, टिप ऑफ द डे, ऑनलाइन, सपोर्ट आदि।

स्टैण्डर्ड टूलबार (Standard Toolbar) यह बार इण्टरनेट एक्सप्लोरर में प्रयुक्त होने वाले टूल्स को उपलब्ध कराती है। जैसे बैक (Back), फॉरवडर्स (Forwards), रिफ्रेश (Refresh) आदि।

एड्रेस बार (Address Bar) एड्रेस बार में यूजर किसी वेबसाइट से सम्बन्धित यू आर एल (URL) को प्रविष्ट कर Enter कुँजी को दबाते हैं, जिसके फलस्वरूप वेबसाइट खुलकर सामने आ जाती है।

स्क्रॉल बार (Scroll Bar) अगर विण्डो में प्रदर्शित सूचना का आकार विण्डो के आकार से बड़ा हो तो सूचना को ऊपर- नीचे या दाएँ बाएँ करने के लिए स्क्रॉल बार का प्रयोग करते हैं। विण्डो के दाहिने ओर ऊर्ध्वाधन तथा नीचे की तरफ क्षैतिज स्क्रॉल बार होता है।

स्टेटस बार (Status bar) यह बार विण्डो के तल पर स्थित होता है। यह प्रदर्शित हो रहे पेज को प्रगति और उसकी वर्तमान स्थिति को दर्शाता है।

NIELIT CCC वेब ब्राउजर कॉन्फिगर करना (Configuring Web Browser) Study Material Notes in Hindi

वेब ब्राउजर कॉन्फिगर करने से मतलब वेब ब्राउजर सॉफ्टवेयर को अपने मन मुताबित इस्तेमाल करने एवं उसकी व्यक्तिगत सेटिंग से है, जैसे पॉप अप ब्लॉकर, पेस सेटअप, टूलबार को दिखाना या छिपाना, टैक्स्ट साइज सेट करना इत्यादि। यहां हम कुछ वेब ब्राउजर की कॉन्फिगरेशन सेटिंग के विषय में चर्चा करेंगे।

We can configure the personal setting to the web browser. There are a lot of things you can change the setting about like pop up blocker, page setup, hiding/ Showing tool bar, setting text size and so on. Here we will discuss about few of the most used wed browsers configuration settings.

वेब ब्राउजर को कॉन्फिगर करने के लिए निम्न चरणों का अनुपालन करेंगे

सर्वप्रथम Tools मेन्यू Internet Options को चुनें। इससे निम्नलिखित डायलॉग बॉक्स प्रदर्शित होगा-

होम पेज (Home page) होम पेज किसी भी वेब ब्राउजर पर प्रदर्शित होने वाला पहला वेब पेज होता है। होम पेज को सेट करने के लिए, होम पेज एड्रेस टैक्स्ट बॉक्स में, जिस पेज को हम पेज बनाना चाहते हैं, उसका एड्रेस टाइप करें।

ब्राउजिंग हिस्ट्री (Browsing History) इण्टरनेट एक्सप्लोरर का प्रयोग करते समय जो पेजेस् यूजर देखता है इन वेब पेजों को एक पेज पर ग्राफिक्स व अन्य फाइल्स के साथ सेव किया है, जिन्हें Temporary Internet Files कहा जाता है।

ये फाइल विस्तृत ही बनती है तथा डिस्क पर अतिरिक्त स्थान घेरती है। इस स्थान को पुन: प्राप्त करने के लिए Delete बटन पर क्लिक करें। इसके अलावा इस टैब में  Settings बटन भी होता है जिस पर क्लिक करने से निम्न डायलॉग बॉक्स प्रदर्शित होगा। इसमें यूजर टेम्परेरी फाइलों के डिस्क स्पेस को सुनिश्चित करने के लिए (Amount of Disk Space of Use) स्लाइडर को ड्रैग करके अधिकतम सीमा को सुनिश्चत करें तथा इसके बाद OK बटन पर क्लिक करें।

यदि यूजर वेब पेजों को अधिक रीडेबल फॉर्म में बनाना चाहता है, तो टैक्स्ट के फॉण्ट को चुनना आवश्यक होता है। इसके लिए General Tab पर स्थित फॉण्ट्स (Fonts) बटन पर क्लिक करे जिसके परिणामस्वरूप फॉण्ट डायलॉग बॉक्स खुल जाएगा।

डिफॉल्ट फॉण्ट बदलने के लि, वेब पेजेस, के ले अलग फॉण्ट तथा टैक्स्ट के लिए अलग फॉण्ट सिलेक्ट करें तथा इस परिवर्तन को सेव करने के लिए OK बटन पर क्लिक करें।

इण्टरनेट ऑप्शन (Internet Options) डायलॉग बॉक्स में सभी सेटिंग्स को परिवर्तित करने के बाद Save बटन पर क्लिक करके डायलॉग बॉक्स को Close करें।

CCC सर्च इंजन (Search Engines) Study Material Notes in Hindi and English

 

सर्च इंजन एक ऐसा सॉफ्टवेयर है, जिसके द्वारा इण्टरनेट से इन्छानुसार सूचनाओं को खोजा जाता है। सबसे पहले सर्च इंजन के निर्माण का कार्य Mcgill University  में 1990 में आरम्भ हुआ था, जिसे Wais  तथा Gopher ने मिलकर आगे बढ़ाया। इन्होंने इण्टरनेट पर उपलब्ध सूचनाओं को क्रमबद्ध करने का कार्य किया।

NIELIT DOEACC CCC लोकप्रिय सर्च इंजन (Popular Search Engines) Study Material Notes in Hindi

कुछ लोकप्रिय सर्च इंजनों का विवरण निम्न प्रकार हैं

याहू (Yahoo!) यह बेसिक रूप से एक सर्च डायरेक्टरी हैं। यह वेब की डायरेक्ट्री या सब्जेक्ट कैटलॉग के साथ हैरार्किकली ऑर्गेनाइज्ड होती है, जो ब्राउज और सर्च की जा सकती है।

Yahoo! सर्च पेज (Seach Page)

Yahoo! सर्च ऑप्शन्स (Search Options)

Yahoo! सर्च पेज (+) इन्क्लूसिव (Inclusive) और (-) एक्सक्लूसिव (Exclusive) जैसे ऑपरेटर्स का प्रयोग करता है। Yahoo! सर्च ऑप्शन्स (Qptions) सर्च को फाइल ट्यूनिंग के लिए, स्विचेज लाने में मदद करते हैं। यदि Yahoo! में सर्च रिक्वेस्ट असफल हो जाती है तो यह स्वत: ही Alta Vista की ओर मुड़ जाती है ताकि अधिक से अधिक सर्च की जा सके।

याहू!  बहुत- सी अतिरिक्त सेवाएँ जैसे ई-मेल, अकाउण्ट्स, रीजन स्पेसिफिक साइट्स लोगों को खोजने के लिए सर्चेज, साइट रिव्यूज (Site Reviews) एवं एक कस्टमारइजेबल (Customiasble) न्यूज पेज (News Page) प्रदान करता है।

अल्टाविस्टा (Alta Vista) अल्टाविस्टा का निर्माण यू एस ए (USA) की डिजिटल लेक्ट्रॉनिक कॉर्पोशन (DEC) की रिसर्च सुविधा के द्वारा किया गया था। इस सर्च इंजन में इण्डेक्सिंग, एक डॉक्यूमेंण्ट के कुल टैक्स्ट पर आधारित होती है, जिसके अन्तर्गत पहली कुछ लाइन्स एवं ऐब्स्ट्रैक्ट (Abstract) के रूप में प्रयोग की जाती है। इस सर्च इंजन में सर्च टाइप्स को दो मोड्स होते रहैं, जो निम्नलिखित हैं।

सिम्पल सर्च (Simple Search)

एडवान्स्ड सर्च (Advanced Search)

सिम्पल सर्च के अन्तर्गत अल्टाविस्टा, सर्च वडर्स (Sarch Words) को अधिक से अधिक संख्या में ढूँढने का प्रयास करके उन परिणामों को अवरोही क्रम में व्यवस्थित कर प्रदर्शित करता है। एडवान्स्ड सर्च में, पेज एकसमान सिन्टैक्स रूल्स (Syntax Rules) का इस्तेमाल करके हैं, जैसे की सिम्पल सर्च में, लेकिन ये इनमें बूलियन ऑपरेटर्स (Boolean Operators) जोड़ देते हैं ताकि सर्च अधिक से अधिक फ्लेक्सिबल हो सकें। इन ऑपरेटर्स में & (AND), II (Or) और !(Not)  शामिल है।

वेबक्राउलर (WebCrowlers) इस सर्च इंजन में एक वेब रोबोट की सहायता रसे पूरे वेब डॉक्यूमेण्ट्स में सी की- वड्र्स को लेकर एक डेली इन्डेक्स का निर्माण किया जाता है। वेब रोबोट को वेबकोट भी कहा जाता है। यह रोबोट एच टी एम एल (HTML) डॉक्यूमेण्ट्स के शीर्षक और टैक्स्ट को इन्डैक्स करके नये डॉक्यूमेण्ट्स को प्राप्त करने का प्रयास करता है। समें Surf the web backwards’ के नाम से एक दूसरा विकल्प भी होता है, जो आपको एक URL एण्टर (Enter) करने के लिए कहलाता है एवं उससे जुड़ी सभी साइट्स की सूचनी को प्रदर्शित करता है।

गूगल (Golgle) यह एक लोकप्रिय सर्च इंजन है, जिसमें कई सारे अदितीय फीचर्स उपलब्ध होते हैं। इसमें एक ऐसा फीचर होता है जो सबसे सम्भावित मैच को ढूँढने और उसे लोड करने के ले ऑटोमेटिक सुविधा प्रदान करता है। यही वजह की गुगल एक सर्च में बेस्ट मैटिंग वेब साइट्स ढूँढने में कुशल है। इस सुविधा का प्रयोग करने के ले सर्च बॉक्स में कम्प्नी का नाम टाइप कर I am Feeling Lucky बटन पर क्लिक करें।

हॉटबॉट (HotBot) इस सर्ज इंजन का प्रयोग वेब डॉक्यूमेण्ट्स को रिट्रीव एवं उन्हें इण्डेक्स करने के उददेश्य से किया जाता है, जिसके लिए यह सर्च इंजन एक रोबोट एवं वर्क स्टेशन्स के लिए पैरेललर नेटवर्क्स का इस्तेमाल करता है।

हॉटबॉट मुख्यत: दो प्रकार के होते हैं

Like (Ordinary HTML)

Active X

यह सर्ज इंजन विशेष प्रका के शब्दों या वाक्यों (Phrases) को सर्च करने के लिए अधिक उपुयक्त हैं। इस सर्च में प्रयोगकर्ताओं के लिए एक टैक्स्ट बॉक्स होता है, जिसमें वे अपनी क्वरी स्ट्रिंग (Query Strings) प्रविष्ट करते हैं एवं साथ ही एक लिस्ट बॉक्स (List Box) भी होता है जिसमें से किसी सहीं शब्द या वाक्यांश को चुना जा सकता है। अपने सर्च को फाइल ट्यून करने के लिए भी HotBot का प्रयोग कर सकते हैं।

लाइकोस (Lycos) इस सर्च इंजन के डेटाबेस (Database) में लगभग 60 मिलियन पृष्ठ होते हैं, जिसमें नेविगेशन (Navigation) का कार्य एक वेब रोबोट द्वारा होता है, जो Heuristics विधि का प्रयोग कहर नेवीगेशन करता है एवं एक सर्च करने योग्य इण्डेक्स बनाता है।

वेब रोबोट प्रत्येक डॉक्यूमेण्ट की इण्डेक्सिग कर उसके आउटगोइंग लिंक्स को एक कतारा में रखता है और इसमें से URl  का चयन करता है। लाइनकोस टाइटलस, हैडिंग्स और HTML की सब हैडिग्स, FTP एवं Gopher डॉक्यूमेण्ट्स को इण्टेक्स करता है। इस सर्च इंजन में इमेंज एवं साउण्ट्स की सर्च करने की क्षमता होती है। यह न्यज (News), साइट रिव्यू (Site Review) जैसी बहुत सी सामग्रियाँ प्रदान करता है।

CCC NIELIT सर्च इंजन पर कण्टेण्ट ढूँढना (Seaching Content on Sarch Engine) Notes in Hindi

किसी इन्फॉर्मेशन को सर्च करने के लिए निम्नलिखित चरणों का अनुसरण किया जाएगा-

सर्च इंजन के होम पेज पर जाएँ।

सर्च इंजन के होम पेज पर एक टैक्स्ट बॉक्स प्रदर्शित होगा।

इस टैक्स्ट बॉक्स में वो वर्ड टाइप करें। जिसके बारे में आप सर्च करना चाहते हैं।

इसके बाद Google Search  बटन पर किल्क करें। जिससे उस वर्ड से सम्बन्धित वेबसाइटों की लिस्ट प्रदर्शित होगी।

जिस वेबसाइट को आप खोलना चाहते हैं उस वेबसाइट के लिंक पर क्लिक करें, जिससे वह वेबसाइट खुल जाएगी।

CCC DOEACC वेब ब्राउजर एक्सेस करना (Accessing Web Browser) Study Material Notes in Hindi

वेब ब्राउजर एक सॉफ्टवेयर/प्रोग्राम है, जिसका प्रयोग वेब पेजेस् को देखने के लिए किया जाता है।

वेब ब्राउजर पर वेब पेज देखने या वेब को एक्सेस करने के लिए निम्नलिखित चरणों का अनुसरण किया जाता है-

Start – All Programs Internet Explorer या अन्य वेब ब्राउजर को सिलेक्ट करें।

इसमें प्रस्तुत प्रारम्भिक वेब पेज को होम पेज कहा जाता है। इस पेज में यूजर किसी भी कन्टैण्ट के बारे में सर्च कर सकता है तथा वेब ब्राउजर के एड्रेस बार में वेब पेज के इण्टरनेट एड्रेस या यू आर एल (URL) को टाइप करके फिर एण्टर दबा कर उस वेब पेज को एक्सेस कर सकता है।

CCC NIELIT DOEACC फेवराइट्स फोल्डर का प्रयोग (Using Favorites Folder) Study

DOEACC CCC फेवराइट्स में एक आइटम एड करना (Adding One Item in Favorites) Study Material in Hindi

DOEACC CCC फेवराइट्स में एक आइटम एड करना (Adding One Item in Favorites) Study Material in Hindi

इण्टरनेट एक्सप्लोरर में फेवराइट्स कमाण्ड्स (Favourites Commands ) का एक अनुक्रम एवं एक फेवराइट पेजेस् को एक सूची का निर्माण कर सकता है एवं उन्हें फोल्डर्स (Folders) के रूप में व्यवस्थित कर सकता है।

इसके बाद किसी फेवराइट वेब पर जाने के लिए, यूजर को फेवराइट मेन्यू में से केवल उस पेज को सिलेक्ट (Select) करना होता है, जिसे यूजर देखना चाहता है। फेवराइट एक्सप्लोरर बार को डिस्प्ले करने के लिए फेवराइट्स (Favorites) बटन पर क्लिक करना पड़ता है।

CCC NIEIT DOEACC फेवराइट्स में एक आइटम एड करना (Adding One Item in Favorites) Study Material Notes in Hindi

Add to Favorites कमाण्ड का प्रयोग करके यूजर किसी भी पेज को फेवराइट पेज लिस्टिंग में जोड़ सकता है। इस कार्य को करने के लिए निम्नलिखित पदों का अनुसरण किया जाता है

Favorites Menu – Add to Favorites या Favorites Explorer बार में Add to Favorites पर क्लिक करें, इससे निम्न डायलॉग बॉक्स प्रदर्शित होगा-

नेम (Name) टैक्स्ट बॉक्स में, पेज के नाम के लिए यूजर जो भी परिवर्तन करना चाहता है उसे एण्टर करे।

क्रिएट इनबॉक्स (Create Inbox) में फेवराइट पेज की लोकेशन को सिलेक्ट (Select)  करें।

OK बटन पर क्लिक करें, जिसके परिणामस्वरूप करण्ट पेज फेवराइट पेज की लिस्टिंग में जुड़ जाता है।

CCC DOEACC ऑर्गेनाइज फेवराइट्स (Organize Favorites) Study Material Notes in Hindi

इस कमाण्ड के माध्यम से फेवराइट पेज में वापस आ कर उसे देख सकते हैं एवं उसे ऑर्गनाइज कर सकते हैं। इसके लिए फेवराइट्स मेन्यू में से ऑर्गनाइज फेवराइट्स को चुनते हैं।

इससे एक डायलॉग बॉक्स प्रदर्शित होता है, जिसमें फेवराइट्स फोल्डर की सामग्रियाँ प्रदर्शित होती हैं। ऑर्गेनाइज फेवराइट्स डायलॉग बॉक्स के द्वारा नये फोल्डर्स बनाने, आइटम्स को रीनेम (Rename) करने और इच्छानुसार वस्तुओं को ऑर्गेनाइज (Organize) करने आदि जैसे कार्य किये जा सकते हैं।

CCC NIELIT वेबपेज डाउनलोड करना (Downloading Wab Pages) Study Material Notes in Hindi

वेब पेज सूचनाओं का एक ऐसा स्त्रोत है, जिसे WWW पर प्रयोग किया जाता है और इसे वेब ब्राउजर के द्वारा एक्सेस किया जा सकता है। अत: किसी वेब पेज को अपने कम्प्यूटर में सेव (Save) अर्थात् डाउनलोड (Download) करने के लिए निम्नलिखित पदों का अनुसरण किया जाता है-

File मेन्यू – Save as को चुनें, इसके फलस्वरूप Save web Page डायलॉग बॉक्स प्रदर्शित होगा।

File name बॉक्स में फाइल का नाम टाइप करें।

Save as type बॉक्स के सामने स्थित ड्रॉप डाउन ऐरो पर क्लिक करके, सिलेक्टेड फाइल टाइल को सिलेक्ट करें।

यदि वर्तमान में सेव किए जा रहें पेज से सम्बन्धित सभी फाइलों को सेव करना हो तो Wab page, Complete विकल्प को सिलेक्ट करें।

यदि पेज को केवल HTML कोड ही सेव करना हैं तो Wab Page, HTML only विकल्प को सिलेक्ट करें।

यदि वेब पेज के केवल टैक्स्ट को सेव करना है, तो Text Only विकल्प को चुनें। इससे वेब पेज की सूचना Text फॉर्मेट में सेव हो जाएगी।

अन्त में Save बटन पर क्लिक कर इसे सुरक्षित करें।

वेबपेज प्रिण्ट करना (Printing Wab Page)

किसी वेब पेज को प्रिण्ट करने के लिए निम्नलिखित चरणों का अनुसरण किया जाता है

वेब ब्राउजर से उस पेज को एक्सेस करें जिसे आप प्रिण्ट करना चाहते हैं या हार्ड कॉपी के रूप में रखना चाहते हैं।

File  मेन्यू पर क्लिक करके, Print ऑप्शन को सिलेक्ट करें।

या टूलबार पर स्थित Print बटन पर क्लिक करें।

या Ctrl + P शॉर्टकट की का प्रयोग करें।

प्रिण्ट डायलॉग बॉक्स से प्रिण्टर, पेजेस्, कॉपीज की संख्या आदि प्रोपर्टीज का चयन करें।

प्रिण्ट बटन पर क्लिक करें।

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